Wednesday, 7 October 2026

सेवा के मंच पर सियासत का शंखनाद, काशी से खुला भाजपा के अगले अध्याय का पन्ना

सेवा के मंच पर सियासत का शंखनाद, काशी से खुला भाजपा के अगले अध्याय का पन्ना  

मोदी के 25 साल को उपलब्धियों और सेवा की कथा में बदलने की कोशिश, नितिन नवीन ने संगठन को साधा, योगी ने यूपी के बदले चेहरे का हिसाब दिया और हिमंता ने विपक्ष को ललकारा; उपचुनावों के बीच काशी की सभा ने साफ किया—अब विकास के साथ नैरेटिव और चुनाव, दोनों पर एक साथ जोर. मोदी के 25 वर्ष का समारोह भाजपा के लिए अतीत की उपलब्धियों को गिनाने भर का अवसर नहीं है। यह 2027 की जमीन पर पुराने अनुभव और नए संकल्प को एक साथ उतारने की तैयारी है। वडनगर से काशी आई बाइक यात्रा ने इस कथा को दृश्य दिया। मोदी के वर्चुअल भाषण ने इसे विचार दिया। नितिन नवीन ने संगठन का ढांचा दिया। योगी ने यूपी की राजनीति का आक्रामक पक्ष रखा। हिमंता ने राष्ट्रीय विपक्ष को निशाने पर लिया। और उपचुनावों की पृष्ठभूमि ने पूरे आयोजन को चुनावी संदर्भ दे दिया। इसलिए काशी की आज की सभा की सबसे बड़ी खबर मंच पर बोले गए शब्दों में नहीं, उन शब्दों के बीच छिपे संकेत में है 

सुरेश गांधी

काशी में बुधवार का दिन केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने की स्मृति का दिन नहीं था। यह दिन भाजपा की उस राजनीतिक पटकथा का भी खुला हुआ पन्ना था, जिसमें ‘सेवा’ भावनात्मक आधार है, ‘विकसित भारत’ भविष्य का लक्ष्य है और चुनाव संगठन की अगली परीक्षा। वडनगर से काशी तक पहुंची सेवा संकल्प बाइक यात्रा के स्वागत से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुबह के वर्चुअल संबोधन और फिर जगतपुर की जनसभा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के भाषणों तक एक ही संदेश अलग-अलग सुरों में सुनाई दिया—25 वर्ष की राजनीतिक यात्रा को अब अगले चरण के संकल्प से जोड़ना है।

सुबह संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में वडनगर से पहुंचे करीब 500 सेवा यात्रियों का स्वागत हुआ। तिलक, पुष्पवर्षा और अभिनंदन के बीच यह यात्रा केवल गुजरात से काशी तक आए बाइक सवारों का सफर नहीं रह गई। इसके पीछे भाजपा ने मोदी के सार्वजनिक जीवन की यात्रा को प्रतीकात्मक रूप से जन्मभूमि से कर्मभूमि तक जोड़ने की कोशिश की। करीब 2200 किलोमीटर का यह सफर सेवा, संपर्क और संगठन—तीनों का संदेश लेकर काशी पहुंचा। इसके बाद आया वह क्षण, जिसने पूरे आयोजन को राजनीतिक अर्थ दे दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए सेवा को राजनीति से ऊपर जीवन का मूल मंत्र बताया। उनका जोर इस बात पर रहा कि सेवा केवल सत्ता तक पहुंचने का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की driving force बने। युवाओं को विकसित भारत का निर्माता बताते हुए उन्होंने 2047 के लक्ष्य को फिर सामने रखा। काशी में मौजूद युवा और कार्यकर्ता जब ‘वी विल डू इट’ के संकल्प के साथ जुड़े तो संदेश साफ था—25 वर्ष की यात्रा का उत्सव समाप्त नहीं, अगले लक्ष्य की शुरुआत है। लेकिन सुबह का भावनात्मक वातावरण दोपहर तक आते-आते पूरी तरह राजनीतिक हो गया।

जगतपुर की सभा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मोदी के 25 वर्ष के सफर को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में पेश करने के बजाय उसे भाजपा और देश की राजनीतिक यात्रा से जोड़ा। गुजरात के भूकंप से लेकर विकास मॉडल और 2014 के बाद देश में आए बदलाव तक की चर्चा ने मोदी के नेतृत्व को एक लंबी राजनीतिक निरंतरता के रूप में स्थापित करने की कोशिश की। राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में काशी में उनकी पहली बड़ी जनसभा का अपना संगठनात्मक महत्व भी रहा। इसके बाद मंच पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आए तो ‘सेवा’ का आख्यान सीधे उत्तर प्रदेश के राजनीतिक अनुभव से जुड़ गया। योगी ने गुजरात के भूकंप और उसके बाद मोदी के नेतृत्व में गुजरात के पुनर्निर्माण का उदाहरण देते हुए उत्तर प्रदेश के पुराने दौर और वर्तमान के बीच तुलना खींची। उनका सबसे धारदार राजनीतिक संदेश यही था कि जिस गुजरात ने भूकंप से उठकर विकास की मिसाल बनाई, उसी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने माफिया और भय के दौर से निकलकर नई पहचान बनाई।

काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या का राम मंदिर, विंध्यवासिनी धाम, महाकुंभ और मथुरा-वृंदावन का उल्लेख करते हुए योगी ने उत्तर प्रदेश की बदलती पहचान को मोदी के 25 वर्ष के राजनीतिक सफर से जोड़ा। यानी मोदी की कहानी को केवल गुजरात या दिल्ली की कहानी न रखकर काशी और उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर से जोड़ना। यहीं से सभा का दूसरा अर्थ निकलता है—भाजपा अतीत का हिसाब भी दे रही है और भविष्य का एजेंडा भी। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का भाषण इस राजनीतिक धार को और तेज कर गया। कामाख्या से काशी तक की सांस्कृतिक कड़ी, 2001 का गुजरात और आज का भारत—इन संदर्भों के बीच उन्होंने मोदी के नेतृत्व को मजबूत भारत की राजनीति से जोड़ा। विपक्ष पर उनके हमले ने सभा को सीधे मौजूदा राष्ट्रीय राजनीतिक संघर्ष से जोड़ दिया। यानी मंच पर तीन अलग-अलग आवाजें थीं, लेकिन लक्ष्य एक था। मोदी ने सेवा का भाव दिया। नितिन नवीन ने संगठन का स्वर दिया। योगी ने उत्तर प्रदेश का राजनीतिक हिसाब दिया। हिमंता ने राष्ट्रीय विपक्ष को चुनौती दी। यही इस पूरे आयोजन की असली राजनीतिक रचना है।

काशी से 2027 की तैयारी का संकेत

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नितिन नवीन का काशी दौरा केवल जनसभा तक सीमित नहीं है। उनके कार्यक्रम में विधायकों, पूर्व जनप्रतिनिधियों, क्षेत्र और जिला पदाधिकारियों तथा अन्य संगठनात्मक समूहों के साथ बैठकें भी शामिल हैं। यानी जनसभा के समानांतर संगठन की नब्ज टटोलने का काम भी चल रहा है। इसका अर्थ यह निकाला जा सकता है कि सेवा संकल्प अभियान का भावनात्मक मंच अब संगठनात्मक तैयारी के मंच में बदल रहा है। और यही वह बिंदु है जहां उपचुनाव और आने वाले चुनावी संघर्ष की तस्वीर जुड़ती है। देश में एक ओर उपचुनावों की मतदान प्रक्रिया पूरी हुई है और 9 अक्टूबर को परिणाम आने हैं। पांच विधानसभा सीटों और असम की एक लोकसभा सीट पर हुए इन उपचुनावों में अलग-अलग राज्यों में मुकाबला भाजपा समेत विभिन्न दलों के लिए राजनीतिक संकेत लेकर आएगा। दूसरी ओर दिल्ली में चुनाव आयोग, मतदाता सूची और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर विपक्ष और भाजपा आमने-सामने हैं। विपक्ष के आरोपों के जवाब में भाजपा चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने को राजनीतिक अभियान का हिस्सा बता रही है। ऐसे समय काशी की सभा को केवल श्रद्धा, सेवा और स्मरण का कार्यक्रम मानना अधूरा होगा। यह नैरेटिव की लड़ाई भी है। एक तरफ विपक्ष चुनावी संस्थाओं और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठा रहा है। दूसरी तरफ भाजपा मोदी के 25 वर्ष को ‘सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण’ की कथा के रूप में जनता के सामने रख रही है। दोनों तरफ अपने-अपने राजनीतिक आख्यान गढ़े जा रहे हैं। काशी की सभा में भाजपा ने दूसरा आख्यान जोर से सामने रख दिया। मोदी के 25 वर्ष का समारोह भाजपा के लिए अतीत की उपलब्धियों को गिनाने भर का अवसर नहीं है। यह 2027 की जमीन पर पुराने अनुभव और नए संकल्प को एक साथ उतारने की तैयारी है। वडनगर से काशी आई बाइक यात्रा ने इस कथा को दृश्य दिया। मोदी के वर्चुअल भाषण ने इसे विचार दिया। नितिन नवीन ने संगठन का ढांचा दिया। योगी ने यूपी की राजनीति का आक्रामक पक्ष रखा। हिमंता ने राष्ट्रीय विपक्ष को निशाने पर लिया। और उपचुनावों की पृष्ठभूमि ने पूरे आयोजन को चुनावी संदर्भ दे दिया। इसलिए काशी की आज की सभा की सबसे बड़ी खबर मंच पर बोले गए शब्दों में नहीं, उन शब्दों के बीच छिपे संकेत में है। सेवा संकल्प का एक महीना पूरा होने की ओर है, लेकिन भाजपा के लिए असली संकल्प अब शुरू होता दिख रहा है—मोदी के 25 वर्ष की विरासत को 2047 के विकसित भारत और उत्तर प्रदेश में अगले राजनीतिक पड़ाव से जोड़ना। काशी ने आज केवल सेवा यात्रियों का स्वागत नहीं किया। काशी ने भाजपा की अगली राजनीतिक पटकथा का पहला पन्ना भी खोल दिया।

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