जब तक वायुसेना है, आप चैन की नींद सो सकते हैं : चीफ मार्शल एपी सिंह
जब
तक
भारतीय
वायुसेना
है,
देशवासी
चैन
की
नींद
सो
सकते
हैं।
यह
भरोसा
केवल
एक
आश्वासन
नहीं,
बल्कि
उन
वायुवीरों
के
निरंतर
अभ्यास,
अनुशासन और
राष्ट्र
के
प्रति
समर्पण
की
याद
दिलाता
है,
जो
हर
परिस्थिति
में
देश
की
सुरक्षा
के
लिए
तैयार
रहते
हैं.
ये बातें ‘विंग्स ओवर
गंगा’
के
दौरान
सीनियर
रिपोर्टर
सुरेश
गांधी
से
भारतीय
वायुसेना
प्रमुख
एयर
चीफ
मार्शल
एपी
सिंह
ने कहीं. उनकी बातों
से
समझ
में
आया
कि
एयर
शो
का
उद्देश्य
केवल
विमानों
की
ताकत
दिखाना
नहीं,
बल्कि
नई
पीढ़ी
को
वायुसेना
की
भूमिका
से
परिचित
कराना
और
युवाओं
में
देश
के
लिए
कुछ
करने
का
जज्बा
जगाना
भी
है।
काशी
की
धरती
पर
गंगा
के
ऊपर
उड़ते
विमानों
ने
मानो
यही
संदेश
दिया—राष्ट्रसेवा
के
सपनों
की
कोई
सीमा
नहीं
होती;
उन्हें
संकल्प,
परिश्रम
और
अनुशासन
से
ऊंचाई
मिलती
है
सुरेश गांधी
फिरहाल, गंगा के आकाश में
लड़ाकू विमानों की गर्जना, नमो
घाट पर उमड़ा जनसमुद्र
और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी।
‘विंग्स ओवर गंगा’ ने
काशी को राष्ट्रीय चर्चा
के केंद्र में ला दिया।
राफेल, सुखोई और तेजस जैसे
विमानों की उड़ानों के
बीच भारतीय वायुसेना की सामरिक क्षमता
का प्रदर्शन हुआ तो एयर
चीफ मार्शल एपी सिंह की
आम लोगों के बीच सहज
मौजूदगी ने आयोजन को
आत्मीयता का रंग भी
दिया। खास यह है
कि ‘विंग्स ओवर गंगा’ के
दौरान भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल
एपी सिंह से मुलाकात
मेरे लिए महज एक
औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि
देश की सामरिक ताकत
का नेतृत्व करने वाले व्यक्तित्व
को करीब से महसूस
करने का अवसर थी।
नीली वर्दी में अनुशासन और
दृढ़ता की झलक थी,
तो व्यवहार में सहजता और
आत्मीयता भी। उनसे हाथ
मिलाने का वह क्षण
एक पत्रकार के लिए यादगार
अनुभव बन गया। गंगा
के ऊपर जब राफेल,
सुखोई और तेजस जैसे
लड़ाकू विमानों की गर्जना गूंज
रही थी, तब यह
आयोजन केवल हवाई करतबों
का प्रदर्शन नहीं रह गया
था। घाटों पर उमड़ी भीड़,
युवाओं की आंखों में
चमक और बच्चों का
उत्साह बता रहा था
कि आसमान में बनती आकृतियां
उनके भीतर भी बड़े
सपनों को आकार दे
रही हैं। वायुसेना प्रमुख
का लोगों के बीच पहुंचना,
बच्चों और युवाओं से
मिलना तथा उनके साथ
तस्वीरें खिंचवाना इसी जुड़ाव को
और गहरा करता दिखा।
बातचीत के दौरान उनकी
वर्दी पर सजे पदक
सैन्य सेवा के गौरव
की कहानी कह रहे थे।
बच्चों और युवाओं से
संवाद, लोगों से हाथ मिलाना
और उनके साथ तस्वीरें
खिंचवाना इस बात का
संकेत था कि सैन्य
संस्थानों और नागरिक समाज
के बीच संवाद भी
राष्ट्रीय सुरक्षा की समझ विकसित
करने में महत्वपूर्ण भूमिका
निभाता है। मेरी नजर
में इस मुलाकात की
सबसे बड़ी उपलब्धि यही
रही कि वायुसेना की
ताकत के पीछे खड़े
मानवीय पक्ष को करीब
से देखने का अवसर मिला।
ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों से
लेकर भविष्य की चुनौतियों तक,
वायुसेना की भूमिका केवल
युद्ध के मैदान तक
सीमित नहीं है। वह
देश के आत्मविश्वास, तकनीकी
आत्मनिर्भरता और नई पीढ़ी
की आकांक्षाओं से भी जुड़ी
है। प्रस्तुत हैं एयर चीफ
मार्शल एपी सिंह के
विचारों पर आधारित विशेष
संवाद के प्रमुख अंश
:-
सवाल : ‘विंग्स
ओवर
गंगा’
जैसे
भव्य
आयोजन
का
उद्देश्य
क्या
केवल
वायुसेना
की
ताकत
दिखाना
है?
एयर चीफ
मार्शल
एपी
सिंह
: जब तक वायुसेना है,
आप चैन की नींद
सो सकते हैं। ऐसे
आयोजनों का उद्देश्य केवल
विमानों की क्षमता और
उनके करतब दिखाना नहीं
है। बच्चों और युवाओं में
वायुसेना के प्रति जागरूकता
पैदा करना, उन्हें देश के लिए
काम करने की प्रेरणा
देना और राष्ट्रसेवा की
भावना मजबूत करना भी इसका
महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
सवाल : ऑपरेशन
सिंदूर
ने
दुनिया
को
भारतीय
वायुसेना
की
क्षमता
के
बारे
में
क्या
संदेश
दिया?
एयर चीफ
मार्शल
एपी
सिंह
: ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया
कि कोई भी लक्ष्य
भारतीय वायुसेना की पहुंच से
बाहर नहीं है। पश्चिमी
मोर्चे पर सटीक कार्रवाई
ने वायुशक्ति की निर्णायक भूमिका
को फिर से स्थापित
किया। इस अभियान ने
हमारी क्षमता-केंद्रित कार्यप्रणाली की पुष्टि की।
देश की सुरक्षा के
लिए जरूरी है कि हम
परिस्थितियों के अनुरूप तेजी
से निर्णय लें और उपलब्ध
क्षमताओं का समन्वित इस्तेमाल
करें।
सवाल : क्या
इस
सफलता
का
श्रेय
किसी
एक
लड़ाकू
विमान
या
हथियार
को
दिया
जा
सकता
है?
एयर चीफ
मार्शल
एपी
सिंह
: आधुनिक सैन्य अभियान की सफलता किसी
एक विमान या हथियार पर
निर्भर नहीं करती। सटीक
खुफिया जानकारी, नेटवर्क आधारित संचालन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, मारक हथियारों और
वायु रक्षा प्रणालियों का समन्वय महत्वपूर्ण
होता है। ऑपरेशन सिंदूर
में विभिन्न क्षमताओं ने एक प्रणाली
के रूप में काम
किया। यही आधुनिक वायुशक्ति
की वास्तविक ताकत है।
सवाल : ऑपरेशन
सिंदूर
से
भविष्य
के
सैन्य
अभियानों
के
लिए
सबसे
बड़ी
सीख
क्या
मिली?
एयर चीफ
मार्शल
एपी
सिंह
: हमारे पास हमेशा अनेक
विकल्प होने चाहिए। परिस्थितियां
बदलने पर दुश्मन की
रणनीति के अनुरूप तेजी
से खुद को ढालने
की क्षमता जरूरी है। किसी एक
साधन पर निर्भर रहने
के बजाय विभिन्न क्षमताओं
का इस्तेमाल करने वाला बल
अधिक लचीले ढंग से कार्रवाई
कर सकता है। साथ
ही, सफलता के बाद रुकना
नहीं चाहिए। क्षमताओं को लगातार मजबूत
करना आवश्यक है।
सवाल : स्वदेशी
तकनीक
और
आत्मनिर्भरता
भारतीय
वायुसेना
के
भविष्य
के
लिए
कितनी
महत्वपूर्ण
हैं?
एयर चीफ
मार्शल
एपी
सिंह
: स्वदेश में विकसित हथियार
प्रणालियों ने ऑपरेशन सिंदूर
में अच्छा प्रदर्शन किया। आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल
हथियार बनाना नहीं, बल्कि ऐसी तकनीकी और
औद्योगिक व्यवस्था विकसित करना भी है,
जो लंबे समय तक
सैन्य क्षमताओं को बनाए रख
सके। इसके लिए अनुसंधान,
उत्पादन, रखरखाव, प्रशिक्षण और तकनीकी नवाचार
पर निरंतर ध्यान देना होगा।
सवाल : भविष्य
की
चुनौतियों
के
लिए
वायुसेना
किन
क्षेत्रों
पर
ध्यान
केंद्रित
कर
रही
है?
एयर चीफ
मार्शल
एपी
सिंह
: भविष्य के अभियानों में
निगरानी और खुफिया क्षमताओं,
इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन से निपटने वाली
प्रणालियों, सुरक्षित नेटवर्क और कृत्रिम बुद्धिमत्ता
आधारित निर्णय सहायता की भूमिका बढ़ेगी।
वायुसेना को ऐसी बहु-क्षेत्रीय शक्ति के रूप में
विकसित करना होगा, जो
बदलती परिस्थितियों में प्रभावी ढंग
से काम कर सके।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के
लिए सुरक्षित और तकनीकी रूप
से आत्मनिर्भर भारत आवश्यक है।
सवाल : एयर
शो
में
बच्चों
और
युवाओं
का
उत्साह
देखकर
आप
क्या
संदेश
देना
चाहेंगे?
एयर चीफ
मार्शल
एपी
सिंह
: युवाओं में देश के
लिए कुछ करने की
भावना महत्वपूर्ण है। ऐसे आयोजन
उन्हें वायुसेना की कार्यप्रणाली, तकनीकी
क्षमताओं और करियर की
संभावनाओं से परिचित कराते
हैं। राष्ट्रसेवा के लिए अनुशासन,
मेहनत, ज्ञान और समर्पण जरूरी
हैं। देश की सुरक्षा
में योगदान देने के अनेक
रास्ते हैं और युवाओं
को अपनी रुचि तथा
योग्यता के अनुसार आगे
बढ़ना चाहिए।
सवाल : काशी
में
गंगा
के
ऊपर
एयर
शो
और
विशेष
डाक
टिकट
जारी
करने
का
क्या
महत्व
है?
एयर चीफ
मार्शल
एपी
सिंह
: गंगा के ऊपर विमानों
का प्रदर्शन काशी की सांस्कृतिक
पहचान के साथ वायुसेना
की आधुनिक क्षमता को प्रस्तुत करता
है। विशेष डाक टिकट इस
आयोजन की स्मृति को
स्थायी बनाता है। उस पर
गंगा और विमानों की
छवियां भारत की सांस्कृतिक
विरासत तथा आधुनिक सामरिक
सामर्थ्य को एक साथ
सामने लाती हैं।
सवाल : अपने
लंबे
सैन्य
अनुभव
के
आधार
पर
देश
की
युवा
पीढ़ी
को
क्या
संदेश
देना
चाहेंगे?
एयर चीफ
मार्शल
एपी
सिंह
: देश की प्रगति और
सुरक्षा के लिए हर
क्षेत्र में उत्कृष्टता जरूरी
है। युवाओं को ज्ञान, कौशल,
अनुशासन और जिम्मेदारी को
महत्व देना चाहिए। तकनीक
तेजी से बदल रही
है, इसलिए सीखते रहना और नई
चुनौतियों के अनुरूप स्वयं
को तैयार करना आवश्यक है।
राष्ट्रनिर्माण सामूहिक प्रयास से होता है
और प्रत्येक नागरिक अपनी भूमिका निभा
सकता है।
गंगा के आकाश से राष्ट्रसेवा का संदेश
‘विंग्स ओवर गंगा’ की स्मृतियों में लड़ाकू विमानों की गर्जना, सूर्यकिरण की कलाबाजियां, नमो घाट पर उमड़ी भीड़ और वायुसेना प्रमुख का सहज व्यवहार लंबे समय तक याद रखा जाएगा। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह द्वारा जारी विशेष डाक टिकट ने आयोजन को ऐतिहासिक स्मृति से जोड़ दिया। टिकट पर गंगा के ऊपर उड़ते विमान और काशी की सांस्कृतिक छवियां भारत की परंपरा और आधुनिकता के साथ आगे बढ़ने का प्रतीक हैं। ऑपरेशन सिंदूर ने जहां वायुसेना की सामरिक क्षमता और विभिन्न प्रणालियों के समन्वय का महत्व रेखांकित किया, वहीं एयर शो ने नई पीढ़ी को वायुसेना के करीब आने का अवसर दिया। काशी में इन दोनों पक्षों का एक साथ दिखाई देना आयोजन की विशेषता रहा। सुरक्षा का भरोसा, तकनीक में आत्मनिर्भरता और युवाओं में राष्ट्रसेवा की भावना—यही वे तीन सूत्र हैं, जो इस आयोजन के संदेश को गंगा के घाटों से आगे पूरे देश तक पहुंचाते हैं। अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण की याद दिलाता है, जो हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा के लिए तैयार रहते हैं।

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