13 करोड़ वोट चोरी का शोर या कांग्रेस की सियासी जमीन खिसकने का डर? : संबित पात्रा
राहुल की
राजनीति
में
हार
का
ठीकरा
आयोग
पर,
प्रियंका
पर
भी
साधा
निशाना
13 करोड़ वोट चोरी का
शोर,
राहुल
बताएं
56 चुनाव
क्यों
हारे?
घुसपैठियों के
वोट
पर
सियासत
नहीं
चलेगी,
काशी
से
ममता
को
भाजपा
की
दोटूक
राहुल-प्रियंका
से
ममता
तक,
एसआईआर
पर
भाजपा
का
चौतरफा
हमला
सुरेश गांधी
वाराणसी। मतदाता सूची का शुद्धिकरण
किसी राजनीतिक दल की सुविधा-असुविधा का विषय नहीं,
बल्कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता का
सवाल है। 13 करोड़ वोट चोरी के
आरोपों से लेकर चुनाव
आयोग की निष्पक्षता पर
उठाए जा रहे सवालों
तक, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता
ने सोमवार को काशी की
धरती से कांग्रेस नेतृत्व
और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता
बनर्जी को निशाने पर
लिया। राहुल गांधी पर सीधा प्रहार
करते हुए उन्होंने कहा
कि चुनाव में हार का
ठीकरा कभी ईवीएम पर
तो कभी चुनाव आयोग
पर फोड़ना कांग्रेस की पुरानी राजनीतिक
शैली बन गई है।
एसआईआर को वोट चोरी
बताकर देश में भ्रम
फैलाया जा रहा है,
जबकि यह मतदाता सूची
को दुरुस्त करने की संवैधानिक
प्रक्रिया है।
राष्ट्रीय प्रवक्ता ने राहुल गांधी
के साथ प्रियंका गांधी
को भी अपने हमले
के दायरे में लिया। गांधी
परिवार की राजनीति पर
सवाल उठाते हुए उन्होंने भाई-बहन के बीच
राजनीतिक दरार और अलग-अलग राजनीतिक दृष्टिकोण
का मुद्दा उठाया। उनका कहना था
कि कांग्रेस को पहले अपने
राजनीतिक नेतृत्व और आपसी तालमेल
की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, फिर
लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाने
चाहिए। उन्होंने गांधी परिवार की राजनीति को
लेकर भी कटाक्ष किए।
12 बार हो चुका है एसआईआर, कांग्रेस के शासन में दस बार
एसआईआर को लेकर कांग्रेस
के आरोपों का जवाब देते
हुए उन्होंने कहा कि नरेंद्र
मोदी सरकार ने पहली बार
यह प्रक्रिया शुरू नहीं की
है। देश में अब
तक 12 बार विशेष गहन
पुनरीक्षण हो चुका है।
इनमें दस बार कांग्रेस
शासनकाल और दो बार
भाजपा शासनकाल में यह प्रक्रिया
अपनाई गई। ऐसे में
इसे भाजपा की राजनीतिक साजिश
बताना तथ्यों को नजरअंदाज करना
है। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने की
प्रक्रिया समझाते हुए कहा कि इसके चार प्रमुख आधार हैं- (ASDD) Absent-अनुपस्थित,
shifted- स्थायी रूप से स्थानांतरित, Death-मृतक और Duplicate डुप्लीकेट मतदाता। यानी
ऐसे नाम हटाए जाते हैं, जिनका संबंधित क्षेत्र में मतदाता के रूप में बने रहना उचित
नहीं है। उन्होंने दावा किया कि करीब तीन करोड़ लोग अनुपस्थित श्रेणी में चिह्नित हुए,
छह करोड़ लोगों ने फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वाने की प्रक्रिया अपनाई, जबकि छह करोड़ स्थानांतरित
मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। उनके मुताबिक, इन आंकड़ों को जोड़कर 13 करोड़ वोट
चोरी का आरोप लगाना राजनीतिक दुष्प्रचार है।
ममता पर निशाना, घुसपैठियों के मुद्दे को बनाया हथियार
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता
बनर्जी को घेरते हुए
भाजपा प्रवक्ता ने घुसपैठियों और
मतदाता सूची की शुद्धता
का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारतीय
लोकतंत्र और देश के
संसाधनों पर पहला अधिकार
भारतीय नागरिकों का है। घुसपैठियों
को किसी भी सूरत
में मतदाता नहीं बनने दिया
जा सकता। एसआईआर का उद्देश्य भी
यही है कि मतदाता
सूची में पात्र भारतीय
नागरिकों के नाम रहें
और अपात्र नाम हटें। उन्होंने
विपक्ष पर इस संवेदनशील
विषय को राजनीतिक रंग
देने का आरोप लगाया।
बंगाल की 20 विधानसभा सीटों का उदाहरण देते
हुए उन्होंने दावा किया कि
जिन क्षेत्रों में सर्वाधिक मतदाताओं
के नाम कटे, उनमें
अधिकांश सीटों पर तृणमूल कांग्रेस
ने जीत दर्ज की।
ऐसे में यह आरोप
कि नाम काटकर भाजपा
को चुनाव जिताने की कोशिश हो
रही है, अपने ही
तर्कों से कमजोर पड़ता
है।
राहुल के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट का हवाला
राष्ट्रीय प्रवक्ता ने एसआईआर को
लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल चुनाव
आयोग के हलफनामे और
अदालती कार्यवाही का भी उल्लेख
किया। उन्होंने कहा कि फॉर्म-6
में कोई संशोधन नहीं
किया गया है। केवल
घोषणा पत्र जोड़कर वर्ष
2002 से 2004 के बीच मतदाता
सूची में नाम होने
से संबंधित जानकारी मांगी गई है। उन्होंने
दावा किया कि जून
2025 से अब तक 18 से
28 वर्ष के आयु वर्ग
के करीब 2.37 करोड़ युवाओं के नाम मतदाता
सूची में जोड़े गए
हैं। इससे यह आरोप
भी निराधार साबित होता है कि
एसआईआर के जरिए नए
मतदाताओं को सूची से
बाहर किया जा रहा
है।
कांग्रेस के बूथ एजेंट कहां हैं?
उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी
को बूथ स्तर पर
चुनौती देते हुए कहा
कि चुनाव आयोग ने प्रत्येक
मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल को बूथ
लेवल एजेंट नियुक्त करने का अधिकार
दिया है। भाजपा के
साथ कांग्रेस और सपा के
एजेंट भी मतदाता सूची
की जांच कर सकते
हैं। यदि कहीं गलत
नाम जुड़ा है या पात्र
मतदाता का नाम छूटा
है तो उसे सामने
लाना चाहिए। केवल आरोप लगाने
से लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत नहीं होगी। चुनाव
आयुक्तों की नियुक्ति और
उनके बीच कथित मतभेदों
को लेकर उठाए गए
सवालों पर भी उन्होंने
कांग्रेस को घेरा। पूर्व
मुख्य चुनाव आयुक्तों के राजनीतिक नियुक्तियों
और सम्मान का हवाला देते
हुए पूछा कि जब
कांग्रेस के शासन में
चुनाव आयोग के अधिकारियों
को पद्म सम्मान, राज्यपाल
और मंत्री जैसे पद दिए
गए, तब संस्थाओं की
निष्पक्षता पर सवाल क्यों
नहीं उठे?
56 हार का तमगा लेकर घूम रहे राहुल
राहुल गांधी के चुनाव आयोग
पर हमलों पर कटाक्ष करते
हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि
2014 से 2025 के बीच कांग्रेस
को 56 विधानसभा चुनावों में हार का
सामना करना पड़ा। उन्होंने
तंज कसा कि राहुल
गांधी इस हार की
जिम्मेदारी लेने के बजाय
चुनाव आयोग को कठघरे
में खड़ा कर रहे
हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस
तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार और त्रिपुरा समेत
कई राज्यों में लंबे समय
से सत्ता से बाहर है।
इसकी वजह चुनाव आयोग
नहीं, बल्कि कांग्रेस की अपनी राजनीतिक
विफलताएं हैं। उन्होंने अंत
में कहा कि लोकतंत्र
में सवाल उठाना हर
दल का अधिकार है,
लेकिन तथ्यों के आधार पर।
एसआईआर में कहीं त्रुटि
है तो उसे सामने
लाया जाए, सुधार किया
जाएगा। मगर मतदाता सूची
की शुद्धता को ही राजनीतिक
विवाद का हथियार बनाना
देशहित में नहीं है।

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