गोल्डन जुबली में कालीन का जलवा, 500 करोड़ की पूछताछ
45 देशों से 216 विदेशी
खरीदार
पहुंचे
भदोही,
231 बाइंग
हाउस
प्रतिनिधियों
ने
परखे
भारतीय
कालीनों
के
हुनर
चार दिन
में
500 करोड़
के
सैंपल
नेगोशिएशन
और
कारोबारी
पूछताछ
के
अवसर
सुरेश गांधी
भदोही. कालीन सिर्फ फर्श पर बिछने
वाला कपड़ा नहीं, यह उन उंगलियों
की रचना है जो
महीनों और वर्षों तक
धागों में रंग, डिजाइन
और धैर्य पिरोती हैं। भदोही में
चार दिन तक सजे
50वें गोल्डन जुबली इंडिया कार्पेट एक्सपो में इन्हीं धागों
ने दुनिया के बाजारों से
संवाद किया। मंदी के बीच
भी करीब 45 देशों से 216 विदेशी कालीन खरीदार और 231 खरीद प्रतिनिधि एवं
बाइंग हाउस भदोही पहुंचे।
नतीजा—एक्सपो के दौरान लगभग
500 करोड़ रुपये के सैंपल नेगोशिएशन
ऑर्डर और कारोबारी पूछताछ
के अवसर सामने आए।
अब इन पूछताछ और
नमूनों के सौदों के
वास्तविक कारोबार में बदलने की
उम्मीद है।
एक्सपो का उद्घाटन चार
अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ ने किया था।
इस दौरान भदोही सांसद डॉ. विनोद बिंद,
औराई विधायक दीनानाथ भास्कर, ज्ञानपुर विधायक विपुल दुबे, जिला पंचायत अध्यक्ष
अनिरुद्ध त्रिपाठी, एमएसएमई के प्रमुख सचिव
शशि भूषण लाल सुशील,
IEML अध्यक्ष राकेश कुमार, CEPC अध्यक्ष कैप्टन मुकेश कुमार गोम्बर, उपाध्यक्ष असलम महबूब समेत
परिषद के पदाधिकारी, अधिकारी
और प्रदर्शक मौजूद रहे।
मंदी के बीच बाजार ने दिखाई उम्मीद
CEPC अध्यक्ष कैप्टन मुकेश कुमार गोम्बर ने कहा कि
चार दिवसीय आयोजन में मिले करीब
500 करोड़ रुपये के सैंपल नेगोशिएशन
ऑर्डर और कारोबारी पूछताछ
आने वाले वर्षों में
वास्तविक व्यवसाय में बदल सकते
हैं। उनके अनुसार एक्सपो
छोटे और मध्यम भारतीय
निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय
बाजार तक पहुंच बनाने
का महत्वपूर्ण माध्यम बना है। यह
पहल उन निर्यातकों के
लिए खास मायने रखती
है, जो विदेशों में
होने वाली बड़ी प्रदर्शनियों
में अपने उत्पाद ले
जाने का खर्च नहीं
उठा सकते। भदोही में विदेशी खरीदारों
को एक ही छत
के नीचे भारतीय कालीनों
के विविध डिजाइन, बुनाई, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता
देखने का अवसर मिला।
यही वजह है कि
एक्सपो को भारतीय हस्तनिर्मित
कालीन उद्योग और वैश्विक खरीद
बाजार के बीच सेतु
के रूप में देखा
जा रहा है।
45 देशों से आई दुनिया, 223 निर्यातकों ने खोले हुनर के दरवाजे
अर्जेंटीना से लेकर अमेरिका
तक और ऑस्ट्रेलिया से
लेकर जापान तक करीब 45 देशों
के खरीदारों ने एक्सपो में
भाग लिया। अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, बेलारूस, बेल्जियम, ब्राजील, कनाडा, चिली, चीन, डेनमार्क, मिस्र,
फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, इजराइल, इटली, जापान, कजाकिस्तान, केन्या, लेबनान, मैक्सिको, नेपाल, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड, ओमान, रूस, सऊदी अरब,
दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्वीडन, थाईलैंड, तुर्की, यूएई, ब्रिटेन, यूक्रेन, अमेरिका, उरुग्वे और उज्बेकिस्तान समेत
अनेक देशों से खरीदार पहुंचे।
इनके साथ 231 विदेशी खरीदारों, बाइंग हाउसों, डिजाइनरों और आर्किटेक्ट्स के
प्रतिनिधियों ने भी उत्पादों
को देखा। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर समेत विभिन्न राज्यों
के 223 छोटे, मध्यम और बड़े निर्माता-निर्यातकों ने अपने उत्पाद
प्रदर्शित किए।
बीस लाख हाथों की रोजी से जुड़ा है यह कारोबार
भदोही के कालीन उद्योग
की चमक के पीछे
उन लाखों हाथों की मेहनत है,
जिनका जीवन धागों और
गांठों से जुड़ा है।
CEPC के अनुसार यह श्रमप्रधान ग्रामीण
एमएसएमई-कुटीर उद्योग करीब 20 लाख बुनकरों और
कारीगरों की आजीविका से
जुड़ा है। इसलिए एक्सपो
में होने वाला प्रत्येक
कारोबारी संवाद सिर्फ निर्यात के आंकड़े नहीं
बढ़ाता, बल्कि गांवों तक रोजगार और
आमदनी की संभावनाएं भी
पहुंचाता है। CEPC का लक्ष्य आयातकों
और निर्माता-निर्यातकों के बीच ऐसा
व्यावसायिक वातावरण तैयार करना है, जिसमें
दोनों पक्ष दीर्घकालिक कारोबारी
संबंध बना सकें। एक्सपो
में मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया
ने प्रदर्शकों में भी नए
बाजारों को लेकर उम्मीद
जगाई।
गोल्डन जुबली ने मजबूत की अंतरराष्ट्रीय पहचान
50वां गोल्डन जुबली इंडिया कार्पेट एक्सपो भारतीय हस्तनिर्मित कालीन और फ्लोर-कवरिंग उद्योग की यात्रा का अहम पड़ाव बनकर सामने आया। CEPC के उपाध्यक्ष असलम महबूब और COA सदस्यों ने विदेशी खरीदारों की भागीदारी और प्रदर्शित कलेक्शनों को मिली प्रतिक्रिया पर संतोष जताया। मेले के दौरान विंध्याचल मंडल के मंडलायुक्त राजेश प्रकाश, जिलाधिकारी शैलेश कुमार, पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी और BIDA के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी निखिल यादव भी पहुंचे। अंतिम दिन दिल्ली के मालवीय नगर विधायक सतीश उपाध्याय ने एक्सपो का दौरा कर अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन के लिए की गई व्यवस्थाओं की सराहना की।चार दिन के इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि भदोही की पहचान केवल कालीन बुनने वाले शहर की नहीं, बल्कि भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने वाले कारोबारी केंद्र की भी है। धागे भले छोटे हों, मगर उनसे बुना बाजार अब दुनिया के नक्शे पर बड़ा होता जा रहा है।



