सूर्या कार्पेट में मौत का टैंक, सीवेज गैस ने छीनी तीन मजदूरों की सांसें, एक अस्पताल में जिंदगी से जूझ रहा…
सुरेश गांधी
औराई (भदोही).
भदोही के औद्योगिक क्षेत्र
औराई स्थित सूर्या कार्पेट कंपनी में सोमवार सुबह
वह दिल दहला देने
वाला हादसा हुआ जिसने पूरे
क्षेत्र को शोक में
डुबो दिया। वाशिंग वाटर सीवेज टैंक
की सफाई और मोटर
रिपेयरिंग के दौरान जहरीली
गैस रिसाव से तीन मजदूरों
की मौत हो गई,
जबकि एक मजदूर गंभीर
हालत में सूर्या हॉस्पिटल
में भर्ती है। हादसे ने
एक बार फिर औद्योगिक
इकाइयों में सुरक्षा मानकों
की पोल खोल दी
है।
सूर्या कार्पेट में सुबह करीब
10:30 बजे नियमित सफाई व मरम्मत
कार्य चल रहा था।
इसी दौरान अचानक एक मजदूर वाशिंग
वाटर सीवेज टैंक में फिसलकर
नीचे गिर पड़ा। साथी
को बचाने की कोशिश में
तीन मजदूर तुरंत टैंक में उतर
गए, मगर उन्हें अंदेशा
नहीं था कि टैंक
के भीतर हानिकारक गैस
भरी है। जैसे ही
वे नीचे पहुंचे, गैस
ने कुछ ही क्षणों
में उनका दम घोट
दिया। टैंक से कोई
आवाज नहीं आने पर
बाहर मौजूद कर्मचारियों ने हड़कंप मचा
दिया और ताबड़तोड़ उन्हें
बाहर निकाला गया, लेकिन तब
तक बहुत देर हो
चुकी थी।
DM और SP मौके पर पहुँचे, अस्पताल में घायल का हाल
जाना
हादसे की सूचना मिलते
ही जिलाधिकारी शैलेश कुमार और पुलिस अधीक्षक
अभिमन्यु मांगलिक सूर्या हॉस्पिटल पहुँचे। उन्होंने उपचाराधीन राजकिशोर का हालचाल लिया।
इसके बाद दोनों वरिष्ठ
अधिकारी सूर्या कार्पेट पहुंचे और घटना स्थल
का विस्तृत निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अधिकारियों ने कंपनी परिसर
में सुरक्षा प्रोटोकॉल, गैस जांच प्रणाली
और सेफ्टी गियर की उपलब्धता
पर भी जानकारी ली।
सूत्रों के अनुसार, टीम
ने कंपनी प्रबंधन को सुरक्षा मानकों
में संभावित लापरवाही पर जवाबदेही तय
करने के निर्देश दिए
हैं। औराई थाना पुलिस ने
घटनास्थल का निरीक्षण किया
और तीनों शवों को कब्जे
में लेकर पंचायतनामा की
कार्रवाई शुरू कर दी
है। परिजनों की तहरीर पर
औराई थाने में मुकदमा
दर्ज किया जा रहा
है। पुलिस ने बताया कि
टैंक के भीतर खतरनाक
गैस की मात्रा, सुरक्षा
उपकरणों की कमी तथा
कार्यस्थल प्रबंधन की जिम्मेदारी की
जांच की जा रही
है। मौके पर शांति
व्यवस्था सामान्य है, और पुलिस
बल तैनात किया गया है।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल—क्या रोकी जा सकती थी यह दुर्घटना?
औद्योगिक क्षेत्र में लगातार हो
रही दुर्घटनाएं एक ही बात
कह रही हैं— सुरक्षा
नियमों को कागजों में
ताक पर रखकर मजदूरों
की जान जोखिम में
डाली जा रही है।
सीवेज टैंक, विशेष रूप से ऐसे
जहां वाशिंग व कैमिकल वेस्ट
जमा होता हो, उसमें
मीथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी घातक गैसें
बनती रहती हैं। ऐसे
टैंकों में उतरने से
पहले— गैस मॉनिटरिंग, सेफ्टी
बेल्ट, ऑक्सीजन सिलेंडर, सुरक्षा किट और प्रशिक्षित
टीम की आवश्यकता होती
है। लेकिन प्रारंभिक जांच बताती है
कि इन सभी मानकों
का या तो पालन
नहीं हुआ, या बेहद
लापरवाही बरती गई।
परिवारों में कोहराम—घर के सहारे छिन गए
शिवम दुबे, रामसूरत
यादव और शीतला प्रसाद
मिश्रा की अचानक मौत
ने परिवारों को गहरे सदमे
में डाल दिया है।
कई घरों के चूल्हे इन्हीं
की मजदूरी से जलते थे।
मृतकों के परिजन कंपनी
व प्रशासन से मुआवजे और
जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई
की मांग कर रहे
हैं।
प्रशासन की कड़ी निगरानी, कंपनी से जवाब-तलब
जिलाधिकारी ने बताया कि
घटना की विस्तृत जांच
रिपोर्ट तैयार की जा रही
है। औद्योगिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप न
पाए जाने पर कंपनी
पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित
होगी। फिलहाल—तीन मजदूरों की
मौत और एक घायल
का उपचार… औराई का सूर्या
कार्पेट आज खामोश है।
मौत की गंध अब तक
टैंक के आसपास तैर
रही है।


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