विकास में उजाड़े न जाएं रोज़गार, व्यापारियों ने डीएम को दिए पुनर्वास प्रस्ताव
बहुमंजिली मार्केट
से
लेकर
बेनियाबाग
तक
कई
विकल्प
सामने
रखे
बनारस बदल
रहा
है,
लेकिन
रोज़गार
बचना
चाहिए
: अजीत
सिंह
बग्गा
सुरेश गांधी
वाराणसी। शहर के विकास कार्यों के बीच बेघर होने की आशंका झेल रहे व्यापारियों के लिए उम्मीद की किरण उस समय जगी, जब वाराणसी व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा के नेतृत्व में व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार से मिला और एक सुविचारित पुनर्वास योजना का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। इस दौरान अजीत सिंह बग्गा ने कहा कि विकास की गति अविराम रहे, लेकिन किसी व्यापारी की रोज़ी-रोटी न छिने, यही प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की भी स्पष्ट मंशा है।
अजीत सिंह बग्गा
ने डीएम के सामने
कई व्यावहारिक और विस्तृत सुझाव
रखे, जो न सिर्फ
शासन की सुविधा को
ध्यान में रखते हैं
बल्कि व्यापारियों के हितों को
भी सुरक्षित करते हैं। सबसे
प्रमुख प्रस्ताव गुदरी मार्केट को बहुमंज़िली स्वरूप
में विकसित करने का रहा।
बग्गा ने कहा कि
मौजूदा एकमंजिला ढांचे की जगह एक
आधुनिक, बहुमंज़िली मार्केट बनाई जाए, जिससे
सभी दुकानें सुरक्षित रूप से पुनर्स्थापित
हो सकें और शहर
को भी एक सुव्यवस्थित
व्यावसायिक केंद्र मिल सके।
इसके अलावा नई
सड़क के दाहिने तरफ
स्थित खाली या कम
उपयोग वाली मार्केट को
भी पुनर्वास के लिए उपयोग
में लाने का सुझाव
दिया गया। अजीत सिंह
बग्गा का कहना है
कि जिनकी दुकानें या प्रतिष्ठान विकास
कार्यों के चलते प्रभावित
हो रही हैं, उन्हें
उचित मुआवज़ा और वैकल्पिक स्थान
दोनों मिलें, ताकि न सरकार
को दिक़्कत हो, न ही
किसी परिवार का चूल्हा बुझने
पाए। बेनियाबाग को भी एक
उपयुक्त विकल्प के रूप में
रखा गया, जहां चारों
दिशाओं में बहुमंज़िला मार्केट
बनाने की संभावनाएं अजीत
सिंह बग्गा ने प्रस्तुत कीं।
इसी क्रम में
दालमंडी के लिए एक
बड़ा सुझाव आया, यदि व्यापारी
सहमत हों तो वहां
की 17 फुट चौड़ी सड़क
को 22 फुट किया जाए
और अतिरिक्त पाँच फुट का
मुआवज़ा देकर बहु-मंज़िली
कॉम्प्लेक्स विकसित किया जाए। इससे
न सिर्फ व्यापार सुरक्षित रहेगा बल्कि दालमंडी को एक व्यवस्थित,
आधुनिक व्यापार केंद्र के रूप में
विकसित किया जा सकेगा।
अजीत सिंह बग्गा ने
डीएम को यह भी
अवगत कराया कि जय नारायण
कॉलेज, नेशनल कॉलेज, और पीली कोठी
के आसपास भी उपयुक्त स्थान
उपलब्ध हैं जहाँ सुविचारित
योजना के अंतर्गत प्रभावित
व्यापारियों को स्थापित किया
जा सकता है।
अजीत सिंह बग्गा
के सभी प्रस्तावों में
यह बात स्पष्ट रही
कि कोई भी व्यापारी
विस्थापित नहीं होना चाहिए,
और शासन, प्रशासन को भी किसी
प्रकार की बाधा न
आए। यह भी उल्लेख
किया गया कि सरकार
की आत्मनिर्भरता और स्थानीय रोजगार
सृजन की नीति तभी
सफल होगी जब एक
भी परिवार बेरोज़गार न हो। बैठक
में अजीत सिंह बग्गा
ने यह विश्वास जताया
कि प्रशासन जनभावना को समझते हुए
ऐसे निर्णय लेगा जिससे विकास
और रोजगार, दोनों साथ-साथ चल
सकें। प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख रूप
से अजीत सिंह बग्गा,
प्रदीप मंडल, कविंदर जायसवाल, मनीष गुप्ता, संजय
निरंकारी, शाहिद कुरेशी, आसिफ भाई, हुमाबानो,
खुर्शीदा बनो, प्रिंस, कृष्णा
जी, नीरज सिंह, संतोष
सिंह, गुंजन बग्गा सहित अनेक पदाधिकारी
उपस्थित रहे।


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