काशी में वॉलीबॉल का महाकुंभ : 4 से 11 जनवरी तक 72वीं सीनियर नेशनल चैंपियनशिप
प्रधानमंत्री करेंगे
वर्चुअल
शुभारंभ,
‘खेलो
इंडिया’
विजन
को
मिलेगी
नई
उड़ान
पूर्वांचल में
पहली
बार,
73 टीमें
और
1000$ खिलाड़ी
होंगे
शामिल
सुरेश गांधी
वाराणसी। खेल केवल प्रतिस्पर्धा
नहीं, संस्कृति और अनुशासन का
उत्सव भी होता है,
और यही दृश्य 4
से 11 जनवरी तक डॉ. संपूर्णानंद
स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, सिगरा में देखने को
मिलेगा। मौका है राष्ट्रीय
वॉलीबॉल चैंपियनशिप का, जहां देश
भर के श्रेष्ठ खिलाड़ी
अपने कौशल, गति और ताकत
का प्रदर्शन करेंगे। मतलब साफ है
राष्ट्रीय वॉलीबॉल चैंपियनशिप के बहाने काशी
एक बार फिर खेल,
संस्कृति और अतिथि-सत्कार
के अपने विशिष्ट स्वरूप
के साथ राष्ट्रीय पटल
पर चमकने को तैयार है.
खास यह है कि
72वीं सीनियर राष्ट्रीय वॉलीबॉल चैंपियनशिप (पुरुष एवं महिला) का
आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘खेलो
इंडिया’ विजन से प्रेरित
है और पूर्वांचल क्षेत्र
में पहली बार इतने
बड़े राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित
हो रही है।
इस ऐतिहासिक आयोजन
का वर्चुअल शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे, जबकि
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की
भी सहभागिता प्रस्तावित है। प्रतियोगिता में
देशभर से 73 टीमें भाग लेंगी, जिनमें
पुरुष और महिला वर्ग
के 1200 से अधिक खिलाड़ी
शामिल होंगे। आयोजकों के अनुसार, कुल
प्रतिभागियों की संख्या 1500 के
आसपास पहुंच सकती है, जिनमें
लगभग 150 अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी
भी शामिल हैं। खिलाड़ी संख्या
के लिहाज से यह देश
की सबसे बड़ी वॉलीबॉल
चैंपियनशिप मानी जा रही
है।
चैंपियनशिप से पहले गुरुवार
को उत्तर प्रदेश की महिला और
पुरुष टीम का चयन
परीक्षण संपन्न हुआ। चयन प्रक्रिया
के दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं
महापौर अशोक तिवारी की
मौजूदगी ने खिलाड़ियों का
उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि चयन
पूरी तरह ओवरऑल प्रदर्शन
के आधार पर किया
जा रहा है, ताकि
प्रदेश की सबसे सशक्त
और संतुलित टीम तैयार हो
सके। चयन परीक्षण में
18 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं
और शुक्रवार को अंतिम टीम
की घोषणा कर दी जाएगी।
वॉलीबॉल जैसे तेज़-तर्रार
खेल में गति और
चपलता की भूमिका अहम
होती है। आयोजकों के
अनुसार, जहां दक्षिण भारत
के खिलाड़ी गति में आगे
माने जाते हैं, वहीं
उत्तर भारत के खिलाड़ी
ताकत और आक्रामक खेल
के लिए पहचाने जाते
हैं। उत्तर प्रदेश के पास हर
पोजीशन के लिए सक्षम
और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का संतुलन मौजूद
है, जो टीम को
मजबूती देगा।
चैंपियनशिप को दर्शकों और
खिलाड़ियों, दोनों के लिए खास
बनाने की तैयारी है।
प्रतियोगिता में प्रवेश पूरी
तरह निशुल्क रहेगा, ताकि खेल प्रेमी
बिना किसी बाधा के
राष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों
का आनंद ले सकें।
साथ ही, बाहर से
आने वाली टीमों को
चरणबद्ध तरीके से काशी दर्शन
भी कराया जाएगा, जिससे वे खेल के
साथ शहर की सांस्कृतिक
विरासत से रूबरू हो
सकें।
आयोजन सचिव सर्वेश पाण्डेय
ने बताया कि खिलाड़ियों के
आतिथ्य में काशी की
पहचान भी झलकेगी। प्रतियोगिता
के दौरान खिलाड़ियों को बनारसी नाश्ता
परोसा जाएगा। देश के कोने-कोने से आए
खिलाड़ियों को किसी तरह
की असुविधा न हो, इसके
लिए हर टीम के
साथ स्थानीय प्रबंधक तैनात किए गए हैं।
चैंपियनशिप का विस्तृत कार्यक्रम
शीघ्र जारी किया जाएगा।
काशी की मेजबानी, यूपी को गौरव
वर्ष 1985 के बाद पहली
बार उत्तर प्रदेश को सीनियर नेशनल
वॉलीबॉल चैंपियनशिप की मेजबानी मिली
है और यह गौरव
काशी को प्राप्त हुआ
है। अत्याधुनिक इनडोर स्टेडियम अब इस राष्ट्रीय
खेल महोत्सव का केंद्र बनेगा,
जिसे वाराणसी की खेल पहचान
के लिए एक टर्निंग
प्वाइंट माना जा रहा
है।
तैयारियों की समीक्षा, व्यवस्थाओं पर जोर
आगामी आयोजन की तैयारियों को
लेकर मंगलवार को महापौर अशोक
तिवारी की अध्यक्षता में
आयोजन समिति और प्रशासनिक अधिकारियों
की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक
में सुरक्षा, आवागमन, आवास, चिकित्सा सुविधा, दर्शक प्रबंधन, यातायात और प्रशासनिक समन्वय
जैसे सभी पहलुओं पर
विस्तार से चर्चा की
गई। महापौर ने स्पष्ट निर्देश
दिए कि यह आयोजन
न केवल भव्य हो,
बल्कि पूरी तरह सुरक्षित,
अनुशासित और सुव्यवस्थित भी
हो, ताकि राष्ट्रीय स्तर
पर काशी की छवि
और मजबूत हो। इससे पूर्व
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने स्टेडियम परिसर
और आसपास की व्यवस्थाओं का
स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने खेल मैदान, दर्शक
दीर्घा, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग, साफ-सफाई और
यातायात प्रबंधन को लेकर आवश्यक
दिशा-निर्देश दिए। नगर आयुक्त
ने कहा कि यह
प्रतियोगिता वाराणसी के लिए ऐतिहासिक
अवसर है और इसमें
किसी भी स्तर पर
लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
खेल के साथ संस्कृति का संगम
चैंपियनशिप के लिए विशेष
शुभंकर भी प्रस्तुत किए
गए हैं, ‘नंदू’, जो नंदी से
प्रेरित है, और ‘नीरा’,
जो गंगा डॉल्फिन पर
आधारित है। ये शुभंकर
काशी की सांस्कृतिक और
पर्यावरणीय पहचान को राष्ट्रीय मंच
पर प्रस्तुत करेंगे।
राष्ट्रीय टीम चयन की राह
बैठक में यह
भी बताया गया कि वॉलीबॉल
को “भारत का गांव-घर का खेल”
माना जाता है और
इस आयोजन से इसकी लोकप्रियता
को नई ऊर्जा मिलेगी।
प्रतियोगिता में प्रदर्शन के
आधार पर शीर्ष 8 टीमें
फेडरेशन कप के लिए
क्वालीफाई करेंगी, वहीं यही प्रदर्शन
राष्ट्रीय टीम चयन के
लिए भी निर्णायक साबित
होगा।
दर्शकों से सहभागिता की अपील
आयोजन समिति ने काशीवासियों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में स्टेडियम पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाएं। आयोजकों का कहना है कि किसी भी राष्ट्रीय आयोजन की सफलता केवल प्रशासन या समिति से नहीं, बल्कि दर्शकों की सक्रिय भागीदारी से सुनिश्चित होती है। कुल मिलाकर, 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि खेल, संस्कृति और संगठन के स्तर पर वाराणसी को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला एक ऐतिहासिक अध्याय बनने जा रही है।

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