अंकिता के साहस और फॉलोअप का असर
लापरवाही पर अस्सी चौकी प्रभारी निलंबित
सॉफ्टवेयर इंजीनियर
अंकिता
गुप्ता
ने
तकनीक
से
खोला
था
चोरों
का
ठिकाना,
पत्रकार
के
सहयोग
से
खुली
पुलिस
की
पोल
एसीपी जांच
में
दोषी
पाए
गए
चौकी
प्रभारी
रोहित
त्रिपाठी
सुरेश गांधी
वाराणसी। अस्सी घाट से सॉफ्टवेयर
इंजीनियर अंकिता का मोबाइल चोरी
होने के मामले में
आखिरकार पुलिसिया लापरवाही पर कार्रवाई हुई
है। प्रकरण में ढिलाई बरतने
के आरोप में अस्सी
चौकी प्रभारी रोहित त्रिपाठी को निलंबित कर
दिया गया है। यह
कार्रवाई एसीपी की जांच रिपोर्ट
के आधार पर डीसीपी
काशी जोन द्वारा की
गई है। यह निलंबन
न सिर्फ पुलिसिंग पर एक सवालिया
निशान है, बल्कि यह
भी साबित करता है कि
एक जागरूक नागरिक, एक साहसी महिला
और एक जिम्मेदार पत्रकार
का फॉलोअप सिस्टम को झकझोर सकता
है।
जांच में
यह स्पष्ट हुआ कि चौकी
प्रभारी शिकायतकर्ता महिला के साथ मौके
पर तो गए, लेकिन
मोबाइल की बरामदगी के
लिए कोई ठोस कार्रवाई
नहीं की गई। इसे
गंभीर लापरवाही मानते हुए निलंबन की
कार्रवाई की गई है।
घटना की पृष्ठभूमि
30 दिसंबर को अस्सी घाट पर भ्रमण के दौरान एक उचक्के ने उनका करीब दो लाख रुपये कीमत का आई फोन छीन लिया। घटना के तुरंत बाद अंकिता ने अस्सी पुलिस को सूचना दी।
थाना भेलूपुर
पुलिस ने गुमशुदगी की
रिपोर्ट दर्ज कर ली,
लेकिन इसके बाद जांच
की गति ठहर गई।
जब पुलिस रुकी, तब नागरिक आगे बढ़े
मोबाइल एक ही मकान के भीतर दिख रहा था। अंकिता व पत्रकार द्वारा मकान मालिक से आग्रह कर कमरा खुलवाया, जहां से 20-25 चोरी के मोबाइल फोन बरामद हुए। खास यह है जब अंकिता मोबाइलों की झुंड में अपना मोबाइल देखा तो वह खुशी से झूम उठी, भला क्यों नहीं उसकी महनत जो सफल हुई थी.
मकान मालिक ने बताया कि
उसने यह कमरा किसी
व्यक्ति को किराये पर
दिया था, जो उसी
रात से फरार है।
पत्रकार का फॉलोअप बना निर्णायक
इस पूरे घटनाक्रम में पत्रकार सुरेश गांधी का सक्रिय सहयोग और पुलिसिया सूचना-तंत्र महत्वपूर्ण रहा। बरामदगी के बाद लगातार फॉलोअप, तथ्य सामने लाना और मामले को सार्वजनिक करना ही वह कारण बना, जिससे पुलिसिया जांच आगे बढ़ी और अंततः लापरवाही उजागर होकर निलंबन तक बात पहुंची।
मतलब साफ है यह मामला सिर्फ एक मोबाइल चोरी का नहीं है। यह पर्यटक सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही और नागरिक अधिकारों का प्रश्न है।
अगर अंकिता जैसी शिक्षित, साहसी और तकनीक-सक्षम युवती खुद खड़ी न होती, अगर पत्रकार स्तर पर फॉलोअप न होता, तो शायद यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता।
अस्सी घाट जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल पर यह घटना प्रशासन के लिए चेतावनी है कि अपराध सिर्फ चोर नहीं बढ़ाते, उदासीनता भी अपराध को संरक्षण देती है।
चौकी प्रभारी का
निलंबन यह साबित करता
है कि इस प्रकरण
में लापरवाही बरती गई, और
यह भी कि जनदबाव
व सच के सामने
सिस्टम को झुकना पड़ता
है। अंकिता का साहस और
सुरेश गांधी का फॉलोअप न
केवल सराहनीय है, बल्कि यह
काशी ही नहीं, पूरे
प्रदेश के लिए नागरिक
जागरूकता की मिसाल बन
गया है।






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