हेमटेक्सटाइल में भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों का जलवा, जर्मनी से मिला सालभर के कारोबार का संकेत
कालीन और
रग्स
को
अलग
से
सेगमेंट
बनाना
भारतीय
उद्योग
के
लिए
बड़ी
उपलब्धि
डोमोटेक्स हनोवर
से
हटकर
हेमटेक्सटाइल
की
ओर
उद्योग
का
स्पष्ट
झुकाव
यूरोप, अमेरिका
और
एशिया
के
खरीदारों
की
मजबूत
भागीदारी,
जबरदस्त
फुटफॉल
भारतीय वाणिज्य
दूतावास
द्वारा
आयोजित
बिजनेस
संवाद
सत्रों
से
द्विपक्षीय
व्यापार
को
बढ़ावा
अमेरिकी टैरिफ
चुनौतियों
के
बीच
जर्मनी
की
प्रदर्शनी
बनी
कारोबार
का
भरोसेमंद
मंच
सुरेश गांधी
वाराणसी. वैश्विक होम टेक्सटाइल उद्योग के सबसे प्रतिष्ठित मंचों में शामिल हेमटेक्सटाइल 2026 एक बार फिर भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के लिए उम्मीदों और अवसरों का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में आयोजित इस मेले में कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (सीईपीसी) के तत्वावधान में 50 भारतीय निर्यातकों ने भाग लेकर अपनी कारीगरी, परंपरा और आधुनिक डिजाइनों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया.
इस वर्ष हेमटेक्सटाइल
प्रबंधन द्वारा कालीन और रग्स को
एक समर्पित सेगमेंट के रूप में
शामिल किया जाना भारतीय
उद्योग के लिए ऐतिहासिक
उपलब्धि माना जा रहा
है। इससे न सिर्फ
हस्तनिर्मित कालीनों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों
के बीच अलग पहचान
मिली, बल्कि भारत की पारंपरिक
बुनाई और डिज़ाइन कौशल
को भी वैश्विक मान्यता
मिली।
डोमोटेक्स से हेमटेक्सटाइल की ओर बदला रुख
उद्योग जगत में इस
बार एक बड़ा बदलाव
देखने को मिला। हस्तनिर्मित
कालीन उद्योग के बड़े हिस्से
ने पारंपरिक रूप से प्रसिद्ध
डोमोटेक्स हनोवर की जगह हेमटेक्सटाइल
2026 को प्राथमिकता दी। जानकारों के
मुताबिक, इसका कारण खरीदारों
की बेहतर मौजूदगी, व्यापक नेटवर्किंग और होम टेक्सटाइल
सेक्टर के साथ कालीन
उद्योग का बेहतर तालमेल
है।
खरीदारों की मजबूत दिलचस्पी, बढ़ी कारोबारी उम्मीदें
मेले के दौरान
भारतीय पवेलियन में जबरदस्त भीड़
देखने को मिली। यूरोप,
अमेरिका, पश्चिम एशिया और एशियाई देशों
से आए खरीदारों ने
भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों और रग्स में
गहरी रुचि दिखाई। निर्यातकों
के अनुसार, डिज़ाइन, सस्टेनेबिलिटी और इको-फ्रेंडली
मैटेरियल्स को लेकर खास
तौर पर पूछताछ हुई,
जिससे आने वाले महीनों
में बड़े ऑर्डर मिलने
की संभावना मजबूत हुई है।
भारतीय वाणिज्य दूतावास की अहम भूमिका
मेले के समानांतर
फ्रैंकफर्ट स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास की ओर से
बिजनेस इंटरैक्टिव सेशन आयोजित किए
गए। इन बैठकों में
भारतीय निर्यातकों और जर्मन आयातकों
के बीच सीधा संवाद
हुआ। बातचीत में यूरोपीय बाजार
की मांग, गुणवत्ता मानक, सस्टेनेबिलिटी और दीर्घकालिक व्यापारिक
सहयोग जैसे मुद्दों पर
विस्तार से चर्चा की
गई।
वैश्विक चुनौतियों के बीच जर्मनी बना भरोसेमंद बाजार
अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ
और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं के
बीच जर्मनी और यूरोप की
प्रदर्शनियां भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के लिए सालभर
की बिजनेस प्लानिंग का आधार बनती
जा रही हैं। उद्योग
विशेषज्ञों का मानना है
कि हेमटेक्सटाइल जैसे मंच न
केवल ऑर्डर दिलाते हैं, बल्कि नए
बाजारों की राह भी
खोलते हैं। कुल मिलाकर,
हेमटेक्सटाइल 2026 भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के लिए सिर्फ
एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में मजबूती से
खड़े रहने की रणनीतिक
शुरुआत साबित हुआ है। यह
आयोजन भारत की पारंपरिक
कारीगरी को नई ऊंचाइयों
तक ले जाने की
दिशा में एक महत्वपूर्ण
कदम माना जा रहा
है।



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