ऑनलाइन व्यापार की मार से त्रस्त छोटे दुकानदार, काशी के व्यापारियों ने सरकार से उठाई राहत की मांग
नमो घाट
स्थित
गोवर्धन
धाम
में
काशी
बिस्किट्स
एंड
कन्फेक्शनरी
व्यापार
मंडल
की
वार्षिक
बैठक
ऑनलाइन कारोबार,
जीएसटी,
चेक
बाउंस
और
विस्थापन
पर
सरकार
से
ठोस
नीति
की
मांग
सुरेश गांधी
वाराणसी। काशी बिस्किट्स एंड
कन्फेक्शनरी व्यापार मंडल की ओर
से हर वर्ष की
भांति इस वर्ष भी
नववर्ष की सालाना बैठक
रविवार 4 जनवरी 2026 को नमो घाट
स्थित गोवर्धन धाम में आयोजित
की गई। बैठक की
अध्यक्षता राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अजित सिंह बग्गा
ने की, जबकि संचालन
प्रदेश उपाध्यक्ष एवं काशी बिस्किट्स
एंड कन्फेक्शनरी व्यापार मंडल के महामंत्री
रमेश निरंकारी ने किया।
बैठक की शुरुआत
नववर्ष की शुभकामनाओं के
साथ हुई, जहां संगठन
की मजबूती और एकजुटता पर
विशेष जोर दिया गया।
वक्ताओं ने कहा कि
बदलते आर्थिक परिदृश्य में संगठन ही
व्यापारियों की सबसे बड़ी
ताकत है। बैठक में
व्यापारियों ने एक स्वर
में सरकार से मांग की
कि ऑनलाइन कारोबार के अनियंत्रित विस्तार
के कारण छोटे उद्योग
और पारंपरिक व्यापार तेजी से बंद
हो रहे हैं। छोटे
दुकानदार कर्ज के बोझ
तले दबते जा रहे
हैं और महंगाई के
इस दौर में परिवार
चलाना भी कठिन हो
गया है। व्यापारियों ने
मांग की कि ऑनलाइन
कारोबार करने वाली बड़ी
कंपनियों को स्टॉक लिमिट
के दायरे में बांधा जाए,
जैसा प्रावधान पूर्ववर्ती सरकारों के समय रहा
है।
व्यापारियों ने यह भी
कहा कि जीएसटी लागू
होने के बाद व्यापारी
वर्ग अधिक पारदर्शिता के
साथ पक्के बिलों में व्यापार कर
रहा है, जिससे सरकार
को कर के रूप
में लाभ मिल रहा
है, लेकिन दूसरी ओर चेक बाउंस
की बढ़ती घटनाओं से व्यापारी वर्ग
की कमर टूट रही
है। चेक बाउंस के
मामले वर्षों तक न्यायालयों में
लंबित रहते हैं, जिससे
व्यापारियों की पूंजी फंस
जाती है। इस समस्या
के समाधान के लिए चेक
बाउंस मामलों की सुनवाई फास्ट
ट्रैक कोर्ट में कराए जाने
की मांग की गई।
बैठक में शहर
के विकास के नाम पर
छोटे दुकानदारों को उजाड़े जाने
पर भी गहरी चिंता
जताई गई। व्यापारियों ने
कहा कि विकास आवश्यक
है, लेकिन विकास से पहले विस्थापित
होने वाले छोटे व्यापारियों
के पुनर्वास की ठोस व्यवस्था
की जाए। जिस प्रकार
मकान मालिकों को मुआवजा दिया
जाता है, उसी तरह
30-40 वर्षों से किराए पर
दुकान चलाने वाले किरायेदारों को
भी मुआवजा और पुनर्स्थापन का
प्रावधान किया जाए, ताकि
उनकी रोजी-रोटी सुरक्षित
रह सके।
बैठक में यह
भी निश्चय लिया गया कि
किसी भी प्रकार के
उत्पीड़न और भ्रष्टाचार के
सामने व्यापारी वर्ग झुकेगा नहीं।
सभी व्यापारी संगठित रहकर अपने अधिकारों
की लड़ाई लड़ेंगे। इस अवसर पर
प्रमुख रूप से रमेश
निरंकारी, सुशील लखमानी, कविंद्र जायसवाल, सुरेंद्र कुमार जायसवाल, दिलीप चौहान, संजय गुप्ता, मनीष
गुप्ता, हाजी शाहिद कुरैशी,
सत्यप्रकाश जायसवाल, राजीव वर्मा, मनोज विश्वकर्मा, अमित
गुप्ता, अशोक गुप्ता, रोशन
जायसवाल, अनिल आहूजा, धर्मेंद्र
सिंह, हरीलाल गुप्ता, आशीष गुप्ता, आनंद
पटेल सहित बड़ी संख्या
में व्यापारी उपस्थित रहे। बैठक के अंत में
व्यापारियों ने सरकार से
अपील की कि विकास
और व्यापार दोनों में संतुलन बनाते
हुए छोटे व्यापारियों के
हितों की रक्षा की
जाए, ताकि काशी की
पारंपरिक व्यापारिक पहचान सुरक्षित रह सके।

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