Sunday, 1 February 2026

गुरु रविदास की जन्मस्थली पर उमड़ा आस्था का सैलाब, सीर गोवर्धनपुर में मेले सा दृश्य

गुरु रविदास की जन्मस्थली पर उमड़ा आस्था

का सैलाब, सीर गोवर्धनपुर में मेले सा दृश्य 

देशदृप्रदेश के कोने-कोने से पहुंचे रैदासी श्रद्धालु

नगीना सांसद चंद्रशेखर रावण ने टेका मत्था, लंगर में हुए शामिल

पीएम मोदी और सीएम योगी ने जयंती पर दी शुभकामनाएं

सुरेश गांधी

वाराणसी। संत शिरोमणि गुरु रविदास की जयंती के अवसर पर उनकी जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर आस्था, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का विराट केंद्र बन गई। रविवार को तड़के से ही बड़ी संख्या में रैदासी श्रद्धालु मंदिर परिसर में दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहा और जन्मस्थली परिसर मेले के रूप में तब्दील हो गया।

श्रद्धालुओं ने संत रविदास के चरणों में मत्था टेककर सामाजिक समानता, मानवता और बंधुत्व के संदेश को स्मरण किया। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, जयघोष और गुरु वाणी की गूंज से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह सेवा शिविर और लंगर की व्यवस्था की गई, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

इस अवसर पर नगीना सांसद चंद्रशेखर रावण भी संत रविदास की जन्मस्थली पहुंचे। उन्होंने मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन किया और रैदासी समाज के लोगों से मुलाकात कर उन्हें जयंती की बधाई दी। सांसद चंद्रशेखर रावण ने लंगर में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया और संत रविदास के विचारों को आज के समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास का जीवन जाति, भेदभाव और असमानता के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक है।

गुरु रविदास जयंती के अवसर पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने भी श्रद्धा प्रकट की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंचएक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर गुरु रविदास को सामाजिक समरसता और मानवता का महान प्रतीक बताते हुए देशवासियों को जयंती की शुभकामनाएं दीं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी गुरु रविदास जयंती पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि संत रविदास ने अपने विचारों और कर्मों से समाज को समानता और सद्भाव का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि संतों की वाणी आज भी सामाजिक एकता की प्रेरणा है।

सीर गोवर्धनपुर में सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था चाक-चौबंद रही। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार व्यवस्था संभालते नजर आए। श्रद्धालुओं के आवागमन, दर्शन और लंगर व्यवस्था को लेकर विशेष इंतज़ाम किए गए थे। गुरु रविदास की जयंती पर उमड़ा यह जनसैलाब केवल धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि वह संदेश भी था कि संत रविदास की विचारधारा आज भी समाज को जोड़ने और समरस भारत की कल्पना को साकार करने की शक्ति रखती है।

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