Sunday, 1 February 2026

इतिहास, विज्ञान, हास्य और युवा चेतना का संगम बना बीएलएफ

इतिहास, विज्ञान, हास्य और युवा चेतना का संगम बना बीएलएफ 

अश्विन सांघी बोले, इतिहास अतीत नहीं, रचनात्मक भविष्य की नींव

खगोल विज्ञान से राष्ट्र निर्माण तक, युवाओं को मिला दिशा-संदेश

बाइचुंग भूटिया, एम.जे. अकबर और स्टैंडअप कॉमेडी ने रचा यादगार माहौल

सुरेश गांधी

वाराणसी। ताज गंगेज में आयोजित काशी साहित्य कला उत्सव (बनारस लिटरेचर फेस्टिवल4) के तीसरे दिन साहित्य केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इतिहास, विज्ञान, खेल, हास्य और एआई युग के राष्ट्र-निर्माण जैसे विषयों के साथ विचारों का विराट मंच बन गया। तीसरा दिन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि साहित्य, विज्ञान और संस्कृति मिलकर ही भविष्य का भारत गढ़ते हैं। सूबे के मंत्री रवीन्द्र जायसवाल व दयाशंकर मिश्र दयालु ने बीएलएफ के मेधावियों एवं विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय योगदान के लिए स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया.

सारस्वत मंच पर प्रख्यात लेखक अश्विन सांघी नेआध्यात्मिकता, आधुनिकता और साहित्यविषय पर संवाद में कहा कि इतिहास अतीत की कथा नहीं, बल्कि रचनात्मक भविष्य की मजबूत नींव है। तकनीक ने लेखकों के लिए शोध और लेखन को आसान बनाया है और कल्पनाशीलता के साथ इतिहास का प्रयोग साहित्य को गहराई देता है। इसी मंच पर अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त खगोल भौतिक विज्ञानी डॉ. देबीप्रसाद दुआरी नेन्यू होराइजन्सः खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान की चुनौतियाँविषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने चंद्रयान-3, मंगल मिशन, सूर्य-चंद्रमा, ग्रहण और अंतरिक्ष-समय जैसे विषयों को युवाओं से जोड़ते हुए कहा कि राष्ट्र का निर्माण चेतन युवा पीढ़ी से ही होगा।

महिला-केंद्रित साहित्य पर आयोजित सत्रबीजी वोमेनमें लेखिका सिंजिनी कुमान और लेखक-पत्रकार सौरभ चक्रवर्ती ने महिलाओं की स्वतंत्रता, लेखन और सामाजिक जिम्मेदारियों पर सार्थक संवाद किया। सिंजिनी ने कहा कि यात्रा और लेखन महिलाओं को आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास देता है। ज्ञान गंगा मंच पर बीएलएफ की यात्रा पर संवाद में फेस्टिवल अध्यक्ष डॉ. दीपक मधोक और सचिव बृजेश सिंह ने इसे एक सांस्कृतिक आंदोलन बताया। उन्होंने कहा कि बीएलएफ का लक्ष्य आधुनिकीकरण के साथ सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखना है।

दरबार हॉल में स्टैंडअप कॉमेडियन संदीप शर्मा की प्रस्तुति ने दर्शकों को ठहाकों से भर दिया, वहीं पूर्व फुटबॉल कप्तान बाइचुंग भूटिया ने संघर्ष, अनुशासन और समर्पण की प्रेरक कहानी साझा की। वरिष्ठ लेखक एम.जे. अकबर ने मुग़ल इतिहास और ज्योतिष पर बोलते हुए सांस्कृतिक सह-अस्तित्व का संदेश दिया, जबकि एआई युग में युवाओं की भूमिका पर पैनल चर्चा ने तकनीक, मूल्य और मानवता के संतुलन पर जोर दिया।

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