अग्नि को साक्षी मान एक दूजे के हुए अतुल व निधि
बनारसी आभा
में
सजा
वैवाहिक
उत्सव,
आशीर्वाद
से
आलोकित
हुआ
नवदंपति
का
जीवन
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग
से
महाराष्ट्र
के
नेता
ने
दिया
आशीष,
सांस्कृतिक
रंगों
से
महका
काशी
का
विवाह
समारोह
सुरेश गांधी
वाराणसी. काशी की सांस्कृतिक परंपरा, संगीत और आत्मीयता से सराबोर एक भव्य वैवाहिक समारोह में अतुल उमरवैश्य पुत्र अनुसूईया उमरवैश्य का विवाह निधि पुत्री सीता मुकेश चंद उमरवैश्य के साथ अत्यंत हर्षोल्लास और वैदिक रीति-विधान के साथ संपन्न हुआ। ऐतिहासिक परिवेश से सुसज्जित वाराणसी किला परिसर में आयोजित इस समारोह ने पारंपरिक बनारसी वैभव और आधुनिक तकनीक के अद्भुत संगम को साकार कर दिया।
जयमाला के पावन अवसर
पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री
एवं उप मुख्यमंत्री एकनाथ
शिंदे तथा उनकी धर्मपत्नी
लता एकशिंदे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग
के माध्यम से नवविवाहित जोड़े
को सुखमय वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद
दिया। दूर रहकर भी
उनके स्नेह और शुभकामनाओं की
उपस्थिति ने समारोह की
गरिमा को और अधिक
बढ़ा दिया। बता दें, दोनों
अतिथियों का विवाह समारोह
में आना था, लेकिन
कुछ कारणों से एनवक्त पर
उनका कार्यक्रम निरस्त हो गया. अतुल
एकनाथ शिंदे के पारीवारिक पीआरओं
हैं. उनका गहजनपद प्रतापगढ़
है, लेकिन वे मुंबई में
ही शिंदे के परिवार का
मैनेजमेंट देखते हैं.
समारोह में विभिन्न राज्यों
से आए जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों,
विधायकों, नगर सेवकों तथा
सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र
की अनेक नामचीन हस्तियों
ने वर-वधू को
आशीष प्रदान किया। पारिवारिक आत्मीयता और सामाजिक सहभागिता
का यह समागम काशी
की जीवंत परंपरा का सुंदर उदाहरण
बनकर उभरा। बनारसी आभा से सजे
इस विवाह समारोह का वातावरण ऐसा
प्रतीत हो रहा था
मानो काशी की आध्यात्मिक
आत्मा स्वयं इस शुभ रात्रि
को अपनी मधुरता से
आलोकित कर रही हो।
दूल्हा-दुल्हन के चेहरे पर
झलकती प्रसन्नता, परिवारजनों का उल्लास और
अतिथियों की रौनक ने
पूरे आयोजन को अविस्मरणीय बना
दिया।
बारात के आगमन के
साथ ही उत्सव अपने
चरम पर पहुंच गया।
शहनाई की मधुर धुनें
और बैंड-बाजों की
गूंज ने काशी की
संगीत परंपरा को जीवंत कर
दिया। पारंपरिक बनारसी पगड़ी, शेरवानी और सांस्कृतिक परिधानों
में सजे युवाओं से
लेकर बुजुर्गों तक हर कोई
उत्सव की लय में
थिरकता नजर आया। यह
दृश्य केवल एक विवाह
नहीं, बल्कि संस्कृति और संबंधों का
उत्सव प्रतीत हो रहा था।
समारोह की भव्यता और
आकर्षण का प्रभाव सोशल
मीडिया पर भी स्पष्ट
दिखाई दिया। विवाह की झलकियां तेजी
से फेसबुक, वाट्स्प, ट्वीटर सहित सोशल मीडिया
पर साझा की जाने
लगीं। तस्वीरों और वीडियो को
लाखों लोगों ने देखा और
नवदंपति के उज्ज्वल भविष्य
की मंगलकामनाएं दीं।
काशी की परंपरा,
आधुनिक तकनीक और सामाजिक आत्मीयता
के संगम से सजा
यह वैवाहिक समारोह इस बात का
प्रतीक बना कि भारतीय
संस्कृति में विवाह केवल
दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि
दो परिवारों और सामाजिक संबंधों
का पवित्र उत्सव होता हैकृजिसमें आशीर्वाद,
परंपरा और आनंद की
निरंतर धारा बहती रहती
है।


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