Saturday, 21 February 2026

मौन साधना से राष्ट्रकल्याण तक : सेना परिवार ने बाबा विश्वेश्वर का किया पावन जलाभिषेक

मौन साधना से राष्ट्रकल्याण तक : सेना परिवार ने

बाबा विश्वेश्वर का किया पावन जलाभिषेक 

मौनी अमावस्या पर श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक समर्पण का अद्भुत संगम

सुरेश गांधी

वाराणसी। आस्था और अध्यात्म की अनादि परंपरा को जीवंत करते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन हुआ। प्रयागराज स्थित आयुध भंडार से जुड़े भारतीय सेना के सेना परिवार के सदस्यों ने पवित्र तिथि पर श्रद्धा और अनुशासन के साथ भगवान श्री विश्वेश्वर का विधि-विधानपूर्वक जलाभिषेक किया।

इस अवसर पर संगम नगरी से लाए गए पवित्र जल तथा मंदिर परिसर स्थित सरस्वती कूप के जल से अभिषेक संपन्न कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और रुद्रपाठ के बीच वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा। मौनी अमावस्या के शुभ नक्षत्र में किए गए इस अभिषेक में राष्ट्र की सुख-समृद्धि, शांति और समग्र कल्याण की कामना विशेष रूप से की गई।

सेना परिवार के सदस्यों ने अत्यंत अनुशासित और श्रद्धामय भाव से पूजन-अर्चन करते हुएसर्वे भवन्तु सुखिनःके सनातन मंत्र को आत्मसात किया। उनके लिए यह अनुष्ठान केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म और आध्यात्मिक चेतना का संगम भी रहा। देश की सीमाओं पर तैनात वीर सैनिकों की सुरक्षा, उनके परिवारों के मंगल और समस्त देशवासियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई।

पूजन के दौरान उपस्थित सदस्यों ने यह संकल्प भी लिया कि वे राष्ट्रसेवा के साथ-साथ सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए निरंतर सक्रिय रहेंगे। उनके अनुसार, आध्यात्मिक ऊर्जा ही वह आधार है जो कर्तव्यनिष्ठा को शक्ति देती है और राष्ट्रप्रेम को स्थायी बनाती है।

मौनी अमावस्या का यह पावन अनुष्ठान काशी की उस जीवंत परंपरा का प्रतीक बन गया, जहां भक्ति और राष्ट्रभाव एक साथ प्रवाहित होते हैं। शिवनगरी में गूंजते वैदिक मंत्रों के बीच सेना परिवार की यह उपस्थिति इस संदेश को पुनः स्थापित करती दिखी कि जब श्रद्धा और सेवा का संगम होता है, तब आध्यात्मिकता स्वयं राष्ट्रशक्ति का स्वरूप धारण कर लेती है।

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