ब्रज के आँगन से काशी के धाम तक पहुँचा प्रेम का रंग
रंगभरी एकादशी
पर
परंपरा
का
अद्भुत
विस्तार,
ब्रज
से
चली
आस्था
की
शोभायात्रा
पहुँचेगी
शिवनगरी
सुरेश गांधी
वाराणसी. मथुरा से रवाना हुई
भव्य गुलाल-यात्रा, अबीर-गुलाल, संकीर्तन
और ब्रज होली की
रसधारा में सराबोर हुए
श्रद्धालु ; ब्रज-काशी सांस्कृतिक
सेतु हुआ और सुदृढ़।
फाल्गुन की रंगभरी उमंग
और भक्ति की मधुर लय
के बीच गुरुवार को
ब्रजभूमि से एक ऐसी
परंपरा ने आकार लिया,
जिसने दो महान आध्यात्मिक
धामों को फिर से
भावनाओं के रंग में
जोड़ दिया। रंगभरी एकादशी के पावन अवसर
पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर से काशी विश्वनाथ
धाम के लिए भव्य
गुलाल-यात्रा श्रद्धा और उत्साह के
वातावरण में रवाना की
गई।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के
पदाधिकारियों ने बताया कि
ब्रज और काशी के
मध्य होली के अवसर
पर फाग, प्रसाद और
पूजन सामग्री के आदान-प्रदान
की परंपरा पिछले वर्ष से आरंभ
हुई है, जो अब
सांस्कृतिक संवाद का स्वरूप ले
चुकी है। इस वर्ष
काशी से प्राप्त सुगंधित
गुलाल, वस्त्र और प्रसाद को
ब्रज के रंगोत्सव में
अर्पित किया जाएगा, जबकि
ब्रज से नील-गुलाल,
फल और मेवा को
विशेष रूप से सजाए
गए वाहन द्वारा काशी
भेजा गया है।
रंगभरी एकादशी पर दोनों धामों
में आयोजित होने वाले विशेष
होली उत्सव में इस प्रसादी
गुलाल का उपयोग किया
जाएगा। ब्रज और काशी
के बीच रंगों का
यह आध्यात्मिक आदान-प्रदान केवल
परंपरा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की उस निरंतर
प्रवाहित धारा का प्रतीक
है, जो देश की
आस्था, लोकजीवन और सांस्कृतिक एकता
को युगों से सशक्त करती
रही है।




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