Thursday, 5 February 2026

शिवमय होगी काशी, विश्वनाथ धाम में महाशिवरात्रि की दिव्य तैयारियां पूर्ण

मंगला से चतुर्थ प्रहर तक चलेगी आराधना, मोबाइल बैग सहित कई वस्तुएँ रहेंगी निषिद्ध

शिवमय होगी काशी, विश्वनाथ धाम में महाशिवरात्रि की दिव्य तैयारियां पूर्ण 

14 से 17 फरवरी तक केवल झांकी दर्शन की व्यवस्था, प्रतिबंधित वस्तुओं के साथ प्रवेश नहीं

आरतियों की विशेष समय-सारिणी जारी, बाबा दरबार में महाभक्ति की रात, चार प्रहर की आरतियों से गूंजेगी काशी

लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को लेकर प्रशासन अलर्ट, सुगम दर्शन हेतु विशेष व्यवस्था

पारंपरिक विधि से होंगी आरतियां, श्रद्धालुओं से नियम पालन की अपील

शंखनाद से गूंजेगा, पूरी रात चलेगी झांकी दर्शन, सुरक्षा के कड़े इंतजाम लागू

सुरेश गांधी

वाराणसी। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में महाशिवरात्रि का पावन पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि आस्था, आध्यात्मिकता और सनातन परंपरा का विराट उत्सव बनकर सामने आता है। विश्व प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ धाम में इस वर्ष महाशिवरात्रि पर्व को लेकर मंदिर प्रशासन द्वारा विशेष तैयारियां की गई हैं, ताकि देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुगम, सुरक्षित एवं व्यवस्थित दर्शन का लाभ मिल सके। इस अवसर पर बाबा विश्वनाथ की आरतियाँ पारंपरिक वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न होंगी, जिनकी समय-सारिणी भी जारी कर दी गई है। मतलब साफ है महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर काशी एक बार फिर शिवमय होने को तैयार है, जहाँ हर हर महादेव के जयघोष के बीच श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

महाशिवरात्रि पर्व के दौरान श्री काशी विश्वनाथ धाम में उमड़ने वाली अपार श्रद्धालु भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 14 फरवरी से 17 फरवरी तक धाम परिसर में किसी भी प्रकार का वीआईपी दर्शन नहीं कराया जाएगा। इसके साथ ही बाबा विश्वनाथ का स्पर्श दर्शन भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इस अवधि में श्रद्धालुओं को केवल झांकी दर्शन की ही सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मंदिर प्रशासन का मानना है कि महाशिवरात्रि के अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु काशी पहुंचते हैं। ऐसे में सभी भक्तों को समान रूप से सुगम और सुरक्षित दर्शन उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है ताकि भीड़ नियंत्रण के साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

मंगला आरती से होगा शिव जागरण का शुभारंभ

महाशिवरात्रि के पावन दिन की शुरुआत प्रातःकालीन मंगला आरती से होगी। इसके अंतर्गत प्रातः 0215 बजे बाबा का पूजन आरम्भ होगा और 0315 बजे मंगला आरती संपन्न होगी। इसके पश्चात 0330 बजे मंदिर श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोल दिया जाएगा। मान्यता है कि मंगला आरती के समय बाबा विश्वनाथ के दर्शन से जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

मध्याह्न भोग आरती : भक्त और भगवान का मधुर मिलन

मध्याह्न भोग आरती का आयोजन प्रातः 1140 बजे से प्रारम्भ होकर 1220 बजे तक सम्पन्न होगा। इस दौरान बाबा को विशेष भोग अर्पित किया जाएगा, जो सनातन परंपरा में पालन और पोषण के प्रतीक स्वरूप माना जाता है।

चारों प्रहर की आरतियाँ : शिव तत्व की दिव्य अनुभूति

महाशिवरात्रि की विशेषता चारों प्रहर में होने वाली आरतियाँ हैं, जो पूरी रात्रि शिवमय वातावरण का निर्माण करती हैं।

प्रथम प्रहर आरती : रात्रि 0930 बजे शंखनाद के साथ पूजा की तैयारी आरम्भ होगी। 1000 बजे से आरती प्रारम्भ होकर रात्रि 1230 बजे तक चलेगी। इस दौरान श्रद्धालुओं को झाँकी दर्शन का लाभ निरंतर मिलता रहेगा।

द्वितीय प्रहर आरती : रात्रि 0130 बजे से 0230 बजे तक आयोजित होगी, जिसमें भक्तों को सतत झाँकी दर्शन का अवसर मिलेगा।

तृतीय प्रहर आरती : प्रातः 0330 बजे से 0430 बजे तक संपन्न होगी। यह समय शिव साधना के दृष्टिकोण से अत्यंत शुभ माना जाता है।

चतुर्थ प्रहर आरती : प्रातः 0500 बजे से 0615 बजे तक आयोजित होगी, जो शिव आराधना की पूर्णता का प्रतीक मानी जाती है।

धाम परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, कई वस्तुएँ प्रतिबंधित

महाशिवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की अत्यधिक संख्या को देखते हुए धाम परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है। मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पेन, मोबाइल फोन, बैग, डिजिटल या स्मार्ट घड़ी, तम्बाकू, पॉलिथीन, प्लास्टिक की पानी की बोतल सहित अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं को परिसर में लाने की अनुमति नहीं होगी। इन वस्तुओं के साथ आने वाले श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील

मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि वे निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए अनुशासन एवं शांति बनाए रखें। महाशिवरात्रि केवल पर्व नहीं, बल्कि शिव तत्व से जुड़ने का आध्यात्मिक अवसर है। भक्तों के सहयोग से ही यह आयोजन भव्य, दिव्य और सफल बन सकेगा।

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