स्लम के सपनों को मंच मिला: नुक्कड़ नाटक बना जागरूकता का स्वर
युवाओं की पहल—शिक्षा,
सम्मान और अवसर के संदेश से समाज को जोड़ा
सुरेश गांधी
वाराणसी। शहर के युवाओं द्वारा संचालित सामाजिक
संस्था स्नोड्रॉप फाउंडेशन ने अपने स्थापना दिवस के अवसर पर प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक
का आयोजन कर वंचित बच्चों की वास्तविक स्थिति और उनकी छिपी संभावनाओं को समाज के सामने
प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का उद्देश्य संस्था के कार्यों से लोगों को अवगत कराना और
समाज को सहयोग के लिए प्रेरित करना रहा।
कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा शुरू की
गई इस संस्था का मुख्य लक्ष्य स्लम क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को शिक्षा और समग्र
विकास के अवसर उपलब्ध कराना है। “स्नोड्रॉप” नाम एक छोटे सफेद फूल से प्रेरित है,
जो कठिन परिस्थितियों में भी खिलकर आशा, दृढ़ता और नई शुरुआत का संदेश देता है।
संस्था के स्वयंसेवक बच्चों को निःशुल्क
शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ आवश्यक सामग्री जैसे कपड़े व अन्य उपयोगी वस्तुओं की
व्यवस्था करते हैं। साथ ही बच्चों को उनके अधिकारों, अवसरों और भविष्य की संभावनाओं
के प्रति जागरूक किया जाता है। संस्था विशेष रूप से बच्चों में आत्मसम्मान और आत्मविश्वास
विकसित करने पर कार्य कर रही है, ताकि वे स्वयं को समाज से अलग न समझें।
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से समाज की उदासीनता
को चुनौती देते हुए यह संदेश दिया गया कि गरीबी प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि अवसरों
की कमी का परिणाम है। संस्था ने लोगों से अपील की कि वे स्वयंसेवक बनकर या अन्य माध्यमों
से इस अभियान से जुड़ें।
कार्यक्रम में अदिति पांडेय, मानिशा त्रिपाठी,
प्रियंशु राय, ओमकार पांडेय, शोभा पासवान, स्वाति रंजन, मोहित, आयुषी, श्रवण और पल्लवी
ने अभिनय किया, जबकि आयोजन का समन्वय सोनू तथा सचिव के रूप में शोभोजीत मिश्रा ने जिम्मेदारी
निभाई। संस्था के सदस्यों ने कहा कि उनका उद्देश्य बच्चों की बेबसी को उम्मीद में बदलना
और उन्हें यह विश्वास दिलाना है कि वे भी अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।

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