श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में प्राचीन पीपल के संरक्षण का अभियान
वैज्ञानिक और पारंपरिक
उपचार का संगम, 200 वर्षों तक सुरक्षित रखने की पहल
सुरेश गांधी
वाराणसी। आस्था और परंपरा की नगरी में स्थित काशी
विश्वनाथ मंदिर प्रांगण के प्राचीन पीपल वृक्ष के संरक्षण के लिए एक विशेष अभियान प्रारंभ
किया गया है। इस पवित्र वृक्ष को आने वाले 100 से 200 वर्षों तक सुरक्षित और सजीव बनाए
रखने के उद्देश्य से वैज्ञानिक तकनीकों और पारंपरिक विधियों के समन्वय से उपचार प्रक्रिया
शुरू की गई।
इस अवसर पर प्रोफेसर एस.पी. सिंह, डॉ.
प्रशांत, डॉ. कल्याण बर्मन, श्री ओम प्रकाश तथा श्री तेजनाथ वर्मा सहित विशेषज्ञों
की टीम उपस्थित रही। सभी ने बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना की कि यह प्राचीन वृक्ष अपनी
आध्यात्मिक गरिमा और ऐतिहासिक महत्व के साथ आने वाली पीढ़ियों को आशीर्वाद देता रहे।
उपचार प्रक्रिया के अंतर्गत वृक्ष पर
औषधीय तत्वों के साथ नीम तेल का जैविक मिश्रण तैयार कर छिड़काव किया गया। विशेष बात
यह रही कि इस उपचार में लगभग 1200 लीटर गंगा नदी का जल तथा त्रिवेणी संगम का पवित्र
जल सम्मिलित किया गया, जिससे आध्यात्मिक पवित्रता और पर्यावरणीय शुद्धता दोनों का ध्यान
रखा गया।
वृक्ष की वर्तमान स्थिति पर जानकारी देते
हुए डॉ. प्रशांत ने बताया कि पीपल की पत्तियाँ पूर्णतः पीली हो चुकी हैं, जो हरितहीनता
और पोषक तत्वों की कमी का संकेत है। सामान्य पत्तियों की तुलना में इसमें स्पष्ट अंतर
दिखाई दे रहा है। यदि समय रहते उपचार नहीं किया गया तो भविष्य में वृक्ष के स्वास्थ्य
पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों
द्वारा नियमित अंतराल पर उपचार और छिड़काव जारी रखने का निर्णय लिया गया है, ताकि यह
प्राचीन पीपल वृक्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था, संस्कृति और पर्यावरण चेतना का
प्रतीक बना रहे।

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