पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने की पहल : ढाबों, रेस्टोरेंट और लघु उद्योगों को मिलेगा विकल्प
ईरान-इजरायल युद्ध के साए के बीच वैकल्पिक ईंधन की तैयारी, मंडल के डिपो में 1407 घनमीटर जलौनी लकड़ी
वन विभाग
की
बैठक
: आमजन
और
छोटे
उद्योगों
को
विभागीय
दर
पर
मिलेगी
जलौनी
लकड़ी
सुरेश गांधी
वाराणसी. मध्य-पूर्व के खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध की स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के संयमित उपयोग तथा वैकल्पिक ऊर्जा संसाधनों को बढ़ावा देने की दिशा में वन एवं वन्यजीव विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में सोमवार को वृत्त कार्यालय वाराणसी में वन संरक्षक डॉ. रवि कुमार सिंह की अध्यक्षता में मंडलीय बैठक हाइब्रिड मोड में आयोजित की गई, जिसमें वन निगम और वन विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में उत्तर
प्रदेश वन निगम के
प्रभागीय विक्रय प्रबंधक तौफीक अहमद ने जानकारी
दी कि वाराणसी जोन
के सात प्रमुख प्रकाष्ठ
डिपो में वर्तमान समय
में कुल 1407.2391 घनमीटर जलौनी लकड़ी उपलब्ध है। यह लकड़ी
प्रयागराज, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, वाराणसी, जौनपुर और गाजीपुर जिलों
के डिपो में रखी
गई है, जिसे आमजन
तथा लघु उद्योग नीलामी
प्रक्रिया के माध्यम से
खरीद सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार प्रयागराज
के मेजा और मऊआइमा
डिपो में सबसे अधिक
487.90 घनमीटर लकड़ी उपलब्ध है। इसके अलावा
जौनपुर डिपो में 352.04 घनमीटर,
प्रतापगढ़ के तवंकलपुर डिपो
में 208.79 घनमीटर, वाराणसी के रतनबाग डिपो
में 159.50 घनमीटर, कौशाम्बी के फतेहपुर डिपो
में 171 घनमीटर तथा गाजीपुर के
नंदगंज डिपो में 28 घनमीटर
जलौनी लकड़ी उपलब्ध है।
वन निगम अधिकारियों
ने बताया कि वित्तीय वर्ष
2025-26 के लिए जलौनी लकड़ी
का आधार मूल्य 405 रुपये
प्रति घनमीटर निर्धारित किया गया है,
जबकि सामान्य नीलामी के माध्यम से
आमजन इसे 866 रुपये प्रति घनमीटर की दर से
खरीद सकते हैं। डिपो
में उपलब्ध लकड़ी में बबूल, सागौन,
जामुन और शीशम जैसी
उच्च कैलोरी मान वाली प्रजातियां
भी पर्याप्त मात्रा में हैं, जो
लघु उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों
के लिए उपयोगी हैं।
बैठक में वन
संरक्षक डॉ. रवि कुमार
सिंह ने वन निगम
के अधिकारियों को निर्देश दिया
कि आमजन को राहत
देने के लिए नीलामी
प्रक्रिया में छूट प्रदान
करते हुए आधार मूल्य
पर विभागीय दर से जलौनी
लकड़ी उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित
की जाए, ताकि जरूरत
पड़ने पर वैकल्पिक ईंधन
की उपलब्धता बनी रहे।
इसके अलावा प्रभागीय
वनाधिकारी वाराणसी, सामाजिक वानिकी वन प्रभाग गाजीपुर
और जौनपुर के प्रभागीय निदेशकों
तथा काशी वन्यजीव प्रभाग
रामनगर (चंदौली) के अधिकारियों को
निर्देशित किया गया कि
लाइसेंसी आरा मशीनों के
माध्यम से लकड़ी की
चिरान कराकर आमजन को विभागीय
दरों पर जलौनी लकड़ी
उपलब्ध कराई जाए।
वन विभाग का
मानना है कि वर्तमान
वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए
ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों
को बढ़ावा देना आवश्यक है।
विभाग की इस पहल
से जहां छोटे उद्योगों,
ढाबों और रेस्टोरेंट संचालकों
को ईंधन के रूप
में एक सुलभ विकल्प
मिलेगा, वहीं आम नागरिकों
को भी किफायती दरों
पर जलौनी लकड़ी उपलब्ध हो सकेगी।


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