खाड़ी संकट की मार, 50वां इंडिया कारपेट एक्सपो टला
अंतरराष्ट्रीय खरीदारों
की
भागीदारी
पर
असर
की
आशंका,
सीईपीसी
ने
लिया
बड़ा
फैसला
सुरेश गांधी
भदोही/वाराणसी।
जिस आशंका की चर्चा पिछले
कई दिनों से कालीन उद्योग
से जुड़े हलकों में हो रही
थी, आखिरकार वही सच साबित
हुई। खाड़ी देशों में जारी तनावपूर्ण
हालात और संभावित महायुद्ध
की स्थिति के बीच कारपेट
इक्सपोर्ट प्रमोशन कौंसिल (सीईपीसी) ने 50वें इंडिया
कारपेट एक्सपो को स्थगित करने
की घोषणा कर दी है।
यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय आयोजन 11 से 14 अप्रैल 2026 के बीच आयोजित
होना था।
काउंसिल की ओर से
जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया
है कि वर्तमान वैश्विक
परिस्थितियों को देखते हुए
यह निर्णय लिया गया है।
खासकर खाड़ी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय
बाजारों से आने वाले
खरीदारों की भागीदारी पर
पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल
प्रभाव को ध्यान में
रखते हुए एक्सपो को
स्थगित करना आवश्यक समझा
गया।
दरअसल, भारत का कालीन
उद्योग बड़े पैमाने पर
निर्यात आधारित है, जिसमें खाड़ी
देशों सहित यूरोप और
अमेरिका के खरीदारों की
अहम भूमिका होती है। मौजूदा
भू-राजनीतिक तनाव और यात्रा
संबंधी अनिश्चितताओं के कारण विदेशी
खरीदारों के आगमन पर
संकट के बादल मंडरा
रहे थे। ऐसे में
आयोजकों के सामने एक्सपो
की गुणवत्ता और प्रभाव को
बनाए रखना एक बड़ी
चुनौती बन गया था।
सीईपीसी ने स्पष्ट किया
है कि एक्सपो की
नई तिथियों की घोषणा स्थिति
सामान्य होने के बाद
की जाएगी। साथ ही, काउंसिल
ने इस फैसले से
संबंधित सभी हितधारकों—निर्यातकों,
खरीदारों और अन्य प्रतिभागियों—को हुई असुविधा
के लिए खेद व्यक्त
किया है और उनके
सहयोग की अपेक्षा जताई
है। कालीन नगरी भदोही और
आसपास के क्षेत्रों में
इस फैसले का सीधा असर
देखने को मिल रहा
है। स्थानीय निर्यातकों और कारोबारियों को
इस एक्सपो से बड़े ऑर्डर
और नए व्यापारिक संबंधों
की उम्मीद थी। हालांकि, उद्योग
से जुड़े जानकारों का मानना है
कि वर्तमान परिस्थितियों में यह निर्णय
व्यावहारिक और दूरदर्शी है,
क्योंकि अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के बिना इस
तरह के आयोजन का
उद्देश्य अधूरा रह जाता। विशेषज्ञों का
कहना है कि खाड़ी
क्षेत्र में बढ़ते तनाव
का असर केवल इस
एक्सपो तक सीमित नहीं
रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव पूरे
निर्यात सेक्टर पर पड़ सकता
है। ऐसे में उद्योग
को वैकल्पिक रणनीतियों और नए बाजारों
की तलाश पर भी
ध्यान देना होगा, ताकि
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच संतुलन
बनाए रखा जा सके।

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