प्रावि कलकलीबहरा में शिक्षा का उत्सव : 88 फीसदी अंक के साथ ‘निपुण विद्यालय’ बना गौरव
गरबा की
रंगत
में
झूमते
नन्हे
कदम
और
तालियों
से
गूंजता
पंडाल,
कलकलीबहरा
विद्यालय
का
वार्षिकोत्सव
बना
यादगार
वार्षिकोत्सव व
शारदा
संगोष्ठी
में
शिक्षा,
संस्कृति
और
अभिभावकों
की
सहभागिता
का
दिखा
अद्भुत
संगम
बच्चों की
रंगारंग
प्रस्तुतियों
ने
मोहा
मन
सुरेश गांधी
सोनभद्र (दुद्धी).
गांवों की पगडंडियों से
निकलकर जब शिक्षा अपने
वास्तविक स्वरूप में खिलती है,
तो वह केवल अक्षरज्ञान
तक सीमित नहीं रहती, बल्कि
संस्कार, संस्कृति और सामूहिक चेतना
का उत्सव बन जाती है।
कुछ ऐसा ही जीवंत
दृश्य प्राथमिक विद्यालय कलकलीबहरा-1 में देखने को
मिला, जहां वार्षिकोत्सव और
शारदा संगोष्ठी ने पूरे परिसर
को उत्साह, उमंग और उपलब्धि
के रंगों से भर दिया।
विद्यालय परिसर में सजा भव्य
पंडाल, अभिभावकों की शत-प्रतिशत
उपस्थिति और बच्चों की
मासूम मुस्कान इस बात की
गवाही दे रही थी
कि यह आयोजन केवल
एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति जागरूक
होते समाज का प्रतीक
है। यह उस बदलते
ग्रामीण भारत की तस्वीर
थी, जहां शिक्षा के
प्रति जागरूकता अब एक आंदोलन
का रूप लेती दिख
रही है।
‘निपुण’ उपलब्धि : मेहनत का उजला परिणाम
संस्कृति के रंगों में सजी प्रस्तुति
अभिभावकों की भागीदारी : शिक्षा का मजबूत आधार
सम्मान और प्रेरणा का मंच
कार्यक्रम में कक्षा-5 की
छात्रा सृष्टि कुमारी को ‘बेस्ट स्टूडेंट
अवार्ड’ तथा श्रीमती रीमा
देवी को ‘उत्कृष्ट अभिभावक
पुरस्कार’ से सम्मानित किया
गया। इसके साथ ही
कक्षा-5 उत्तीर्ण विद्यार्थियों को भावभीनी विदाई
दी गई, जिसमें खुशी
और भावुकता का अनूठा संगम
देखने को मिला, जो
उनके जीवन के नए
अध्याय की शुरुआत का
प्रतीक बना। समाजसेवा के
क्षेत्र में योगदान के
लिए विनीता मसीह तथा सेवानिवृत्त
शिक्षामित्र लक्ष्मीपुरी सिंह का सम्मान
कार्यक्रम को भावनात्मक ऊंचाई
दे गया।
शिक्षा से आत्मनिर्भरता की ओर संदेश
मुख्य अतिथि डॉ. प्रियंका जायसवाल
ने अपने संबोधन में
कहा कि शिक्षा ही
बच्चों के भविष्य की
असली पूंजी है। शिक्षा ही
वह शक्ति है, जो बच्चों
को आत्मनिर्भर और समाज को
सशक्त बनाती है। उन्होंने अभिभावकों
से बच्चों की शिक्षा में
सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा यह आयोजन
केवल एक दिन का
उत्सव नहीं, बल्कि उस दिशा का
संकेत है, जहां गांवों
के विद्यालय भी उत्कृष्टता की
नई परिभाषा गढ़ रहे हैं।
वहीं डॉ. रितिका श्रीवास्तव ने शिक्षा को
राष्ट्र निर्माण का आधार बताते
हुए कहा कि विद्यालयों
की ऐसी पहलें ही
आत्मनिर्भर भारत की नींव
मजबूत करती हैं। इस
दौरान उन्होंने अभिभावकों से निरंतर सहयोग
की अपील की।
आभार और संकल्प
कार्यक्रम के अंत में
प्रा.वि. कलकली बहरा
की प्रधानाध्यापिका वर्षा रानी जायसवाल, सहायक
अध्यापक अविनाश कुमार गुप्ता और सरिता मैडम
ने सभी अतिथियों, अभिभावकों
और सहयोगियों का आभार व्यक्त
किया। संचालन भी प्रधानाध्यापिका द्वारा
प्रभावशाली ढंग से किया
गया, जिसने पूरे आयोजन को
एक सूत्र में बांधे रखा।
‘निपुण विद्यालय’ बनने का सफर
‘निपुण’ बना प्रा.वि.
कलकलीबहरा विद्यालय
88 % अंक के
साथ हासिल की उपलब्धि
पूरे जिले में
मिला प्रशस्ति पत्र
बच्चों और अभिभावकों का
सम्मान
शिक्षा में सामूहिक भागीदारी
का मॉडल
डीएलएड प्रशिक्षुओं के आकलन में
उत्कृष्ट प्रदर्शन
शिक्षकों की सतत मेहनत
और नवाचार का परिणाम
अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी
बनी सफलता की कुंजी
ग्रामीण शिक्षा का बदलता चेहरा
प्रा.वि. कलकलीबहरा का यह आयोजन बताता है कि यदि विद्यालय, शिक्षक और अभिभावक एक साथ खड़े हों, तो संसाधनों की कमी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती। ‘निपुण विद्यालय’ केवल एक टैग नहीं, बल्कि उस विश्वास का प्रतीक है, जो आने वाले भारत की नींव तैयार कर रहा है.






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