ललिता घाट पर सजी आस्था की नई ज्योति : काशी विश्वनाथ धाम से गूंजा ‘जय माँ गंगा’ का स्वर
नवरात्रि के
प्रथम
दिवस
से
शुरू
हुई
गंगा
आरती,
हजारों
श्रद्धालुओं
ने
लिया
दिव्य
अनुभव
सुरेश गांधी
वाराणसी। चैत्र नवरात्रि के पावन प्रथम
दिवस, विक्रम संवत 2083 के शुभारंभ के
साथ काशी ने एक
और ऐतिहासिक अध्याय रच दिया। विश्व
प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ
मंदिर न्यास द्वारा संचालित गंगा आरती का
भव्य शुभारंभ गुरुवार की संध्या ललिता
घाट पर हुआ। यह
केवल एक धार्मिक अनुष्ठान
नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और नवाचार का
ऐसा संगम बना, जिसने
हर उपस्थित श्रद्धालु के मन को
आध्यात्मिक आलोक से भर
दिया।
संध्या के ठीक छह
बजते ही गंगा तट
पर दीपों की रेखाएं झिलमिलाने
लगीं और सात अर्चकों
के मंत्रोच्चार के बीच आरती
का शुभारंभ हुआ। लगभग 45 मिनट
तक चली इस दिव्य
आरती में गूंजते “हर-हर महादेव” और
“जय माँ गंगा” के
उद्घोष ने वातावरण को
अलौकिक बना दिया। ऐसा
प्रतीत हो रहा था
मानो स्वयं माँ गंगा अपने
भक्तों की आराधना स्वीकार
कर रही हों।
कार्यक्रम में प्रदेश सरकार
के मंत्री रविंद्र जायसवाल, विधायक नीलकंठ तिवारी, एमएलसी धर्मेंद्र राय, हंसराज विश्वकर्मा,
अवधेश सिंह के अलावा
मंडलायुक्त एस राजलिंगम तथा
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार सहित कई गणमान्य
अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
रही। सभी ने इस
पहल को काशी की
सांस्कृतिक विरासत को नए आयाम
देने वाला कदम बताया।
विशेष बात यह रही
कि यह आरती उन
श्रद्धालुओं के लिए एक
नया विकल्प बनकर सामने आई
है, जो भीड़ के
कारण दशाश्वमेध घाट तक नहीं
पहुंच पाते। अब ललिता घाट
पर भी उसी भव्यता
और श्रद्धा के साथ गंगा
आरती का अनुभव संभव
हो सकेगा। मंदिर प्रशासन ने यह भी
सुनिश्चित किया है कि
जो श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के
दर्शन के लिए जिस
द्वार से प्रवेश करेंगे,
वे आरती देखने के
बाद उसी मार्ग से
सुरक्षित बाहर निकल सकें।
पूरे घाट क्षेत्र
को आकर्षक प्रकाश व्यवस्था और सजावट से
सुसज्जित किया गया है।
गंगा किनारे मजबूत रेलिंग और बैरिकेडिंग की
व्यवस्था की गई है,
जिससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित और
सुव्यवस्थित ढंग से आरती
देखने में सुविधा मिले।
सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन
के विशेष इंतजाम भी प्रशासन द्वारा
किए गए हैं, ताकि
श्रद्धालुओं की आस्था में
किसी प्रकार की बाधा न
आए।
यह आयोजन केवल
एक धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं,
बल्कि सनातन संस्कृति के संरक्षण और
उसके आधुनिक स्वरूप में पुनर्स्थापन का
प्रयास भी है। काशी
विश्वनाथ मंदिर न्यास की यह पहल
न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं,
बल्कि देश-विदेश से
आने वाले पर्यटकों के
लिए भी आकर्षण का
केंद्र बनेगी। निस्संदेह, ललिता घाट पर आरंभ
हुई यह गंगा आरती
आने वाले समय में
काशी की पहचान का
एक नया अध्याय बनेगी,
जहां हर संध्या आस्था
का दीप प्रज्वलित होगा
और माँ गंगा के
चरणों में श्रद्धा का
सागर उमड़ेगा.






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