Tuesday, 10 March 2026

इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल के खिलाफ बनारस में उबाल, बिजली कर्मचारियों का प्रदर्शन

इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल के खिलाफ बनारस में उबाल, बिजली कर्मचारियों का प्रदर्शन

क्षेत्र में हर बिजली कार्यालय पर विरोध सभा

कर्मचारियों ने बिल को किसान-उपभोक्ता विरोधी बताया

सरकार से जनहित में प्रस्ताव वापस लेने की अपील

सुरेश गांधी

वाराणसी. प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 के विरोध में मंगलवार को वाराणसी में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने व्यापक प्रदर्शन किया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र बनारस के लगभग सभी बिजली कार्यालयों पर कर्मचारियों ने विरोध सभा कर बिल को जनविरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की।

qदेशव्यापी आह्वान के तहत आयोजित इस विरोध कार्यक्रम में बिजलीघरों, ट्रांसमिशन केंद्रों, वितरण कार्यालयों और जिला मुख्यालयों पर बड़ी संख्या में बिजली कर्मचारी और इंजीनियर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित संशोधन को किसान, उपभोक्ता और कर्मचारी विरोधी बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की।

वक्ताओं ने कहा कि पूर्व में किसानों के साथ हुए समझौते में इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल को वापस लेने का आश्वासन दिया गया था, इसके बावजूद इसे संसद में पारित कराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए इस बिल को तत्काल वापस लिया जाए।

संघर्ष समिति के नेताओं ने बताया कि यह प्रदर्शन नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर आयोजित किया गया है। उनका आरोप है कि प्रस्तावित बिल का मुख्य उद्देश्य बिजली वितरण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निजीकरण को बढ़ावा देना और सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर करना है।

वक्ताओं के अनुसार, बिल में प्रस्तावित प्रावधानों के तहत पांच वर्षों में क्रॉस-सब्सिडी समाप्त करने से कृषि उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का भारी बोझ पड़ेगा। वर्तमान में सिंचाई के लिए रियायती दरों पर बिजली पाने वाले किसानों को अधिक शुल्क देना पड़ सकता है, जिससे खेती की लागत बढ़ेगी और ग्रामीण संकट गहरा सकता है। साथ ही निजी वितरण कंपनियां ग्रामीण और कम राजस्व वाले क्षेत्रों में सेवा देने से बच सकती हैं, जिससे गांवों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है।

संघर्ष समिति ने कहा कि एक ही क्षेत्र में एकाधिक वितरण लाइसेंस देने की व्यवस्था से निजी कंपनियां केवल अधिक भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को चुनेंगी, जबकि घाटे वाले उपभोक्ता सार्वजनिक वितरण कंपनियों के पास रह जाएंगे। इससे घरेलू उपभोक्ताओं, विशेषकर कम आय वाले परिवारों के लिए बिजली दरों में भारी वृद्धि हो सकती है और बिजली सेवा एक सामाजिक सेवा के बजाय मुनाफे पर आधारित व्यापार बन जाएगी।

कर्मचारी नेताओं ने आशंका जताई कि बिल से बिजली क्षेत्र में पिछले दरवाजे से निजीकरण का रास्ता खुलेगा, जिससे हजारों कर्मचारियों और इंजीनियरों की नौकरी तथा सेवा शर्तों पर खतरा पैदा होगा। उन्होंने कहा कि निजीकरण के पिछले अनुभव बताते हैं कि इससे कर्मचारियों की संख्या में कटौती, ठेका प्रथा में वृद्धि और सेवा शर्तों में गिरावट आती है।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि यह बिल देश की संघीय व्यवस्था को भी प्रभावित करता है। बिजली समवर्ती सूची का विषय होने के बावजूद प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से केंद्र सरकार के अधिकारों में अत्यधिक वृद्धि की जा रही है, जिससे राज्यों की स्वायत्तता और स्थानीय जरूरतों के अनुसार बिजली नीति तय करने की क्षमता कमजोर पड़ सकती है।

समिति ने सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से अपील की कि वे संसद में इस बिल के संभावित प्रभावों पर गंभीरता से विचार करें और किसानों, उपभोक्ताओं तथा बिजली कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए इसका विरोध करें। विरोध सभा को राजेंद्र सिंह, . एस.के. सिंह, . मनोज गुप्ता, अंकुर पांडेय, कृष्णा सिंह, प्रवीन कुमार, अनुराग सिंह, उदयभान दुबे, अरुण कुमार, रमेश सिंह, पंकज यादव, अमित कुमार, धर्मेंद्र यादव, एस.के. भूषण, कृपाल सिंह, रोहित कुमार और विनोद कुमार सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।

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