Wednesday, 11 March 2026

तेल-गैस संकट की आहट : थाली से ठेला तक बढ़ी चिंता

तेल-गैस संकट की आहट : थाली से ठेला तक बढ़ी चिंता 

जंग की आंच, जेब पर वार : चाय से प्रसाद तक दिखा महंगाई का असर

गैस बचाने के लिए काशी विश्वनाथ धाम के अन्न क्षेत्र में बदला प्रसाद मेनू

दो की जगह एक सब्जी, सेवई भी हटाई गई

रोज 850 से 1000 श्रद्धालुओं को मिलता है निःशुल्क भोजन

सुरेश गांधी

वाराणसी. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल बाजार में पैदा हुई अनिश्चितता की आहट अब भारत के बाजारों में भी महसूस होने लगी है। पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की संभावित कीमतों को लेकर पैदा हुई चिंता ने रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका को जन्म दे दिया है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है तो इसका असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि घर की रसोई से लेकर सड़क किनारे लगने वाले ठेला-खुमचों और होटल-ढाबों की थाली तक दिखाई देगा। वाराणसी समेत कई शहरों में छोटे कारोबारियों, रेहड़ी-पटरी वालों और ठेला संचालकों ने पहले ही इस संभावित संकट को लेकर चिंता जतानी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि यदि गैस सिलेंडर और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं तो चाय-नाश्ते से लेकर सब्जी और थाली तक के दाम बढ़ाना मजबूरी हो जाएगी।

थाली से ठेला तक महंगाई का डर

महंगाई का पहला झटका अक्सर छोटे कारोबारों को ही झेलना पड़ता है। चाय की दुकानों, समोसा-कचौड़ी के ठेलों, नाश्ते के खोमचों और सड़क किनारे के ढाबों की पूरी व्यवस्था ईंधन और गैस पर निर्भर होती है। कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतें पहले ही कई कारोबारियों के लिए चुनौती बन चुकी हैं। वाराणसी के सिगरा क्षेत्र में चाय का ठेला लगाने वाले राजेश कुमार बताते हैं, “सिलेंडर पहले से ही महंगा है। अगर इसमें और बढ़ोतरी हुई तो दस रुपये वाली चाय पंद्रह रुपये करनी पड़ेगी। नहीं तो दुकान चलाना मुश्किल हो जाएगा।पिछले कुछ वर्षों में ही चाय-नाश्ते की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। जहां कभी दस रुपये में मिलने वाली चाय आज कई जगह पंद्रह से बीस रुपये तक पहुंच चुकी है। नाश्ते की प्लेट और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है। भेल-पूरी का ठेला लगाने वाले गुड्डू साहनी का कहना है कि बाजार में पहले ही आलू, खाद्य तेल और मसालों के दाम बढ़ चुके हैं।अगर डीजल महंगा हुआ तो माल की ढुलाई भी महंगी हो जाएगी। ऐसे में हमें भी अपने रेट बढ़ाने पड़ेंगे।

सब्जी और राशन पर भी पड़ेगा असर

व्यापारियों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे सीधा असर सब्जियों और खाद्यान्न की ढुलाई पर पड़ता है। मंडियों से बाजार तक सब्जियां ट्रकों और छोटे मालवाहक वाहनों के जरिए पहुंचती हैं। डीजल की कीमत बढ़ने पर परिवहन लागत भी बढ़ जाती है, जिसका सीधा प्रभाव खुदरा कीमतों पर दिखाई देता है। फल-सब्जी विक्रेता रामदास गुप्ता बताते हैं, “जैसे ही डीजल महंगा होता है, ट्रांसपोर्टर तुरंत किराया बढ़ा देते हैं। अंत में इसका बोझ ग्राहक पर ही पड़ता है। सब्जी के दाम बढ़ाना मजबूरी हो जाती है।आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि ईंधन की कीमतों में तेज वृद्धि होती है तो इसका असर केवल सब्जियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दूध, आटा, दाल, खाद्य तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि देखने को मिल सकती है।

होटल और रेस्तरां उद्योग की बढ़ती चिंता

एलपीजी की संभावित कमी और बढ़ती कीमतों का असर होटल और रेस्तरां उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। कई छोटे रेस्तरां और ढाबा संचालक पहले से ही लागत बढ़ने की समस्या से जूझ रहे हैं। कुछ रेस्तरां संचालकों ने अपने मेनू में बदलाव करना शुरू कर दिया है। कहीं व्यंजनों की संख्या कम कर दी गई है तो कहीं थाली के दाम बढ़ा दिए गए हैं। कुछ स्थानों पर गैस की खपत कम करने के लिए इलेक्ट्रिक तंदूर और इंडक्शन चूल्हों का उपयोग भी बढ़ाया जा रहा है। ढाबा संचालक शिवकुमार यादव कहते हैं, “खर्च लगातार बढ़ रहा है लेकिन ग्राहक उतना ही पैसा देना चाहता है। अगर गैस और डीजल महंगा हुआ तो थाली के दाम बढ़ाना ही पड़ेगा।

जमाखोरी और कालाबाजारी का खतरा

ऐसे समय में बाजार में जमाखोरी और कालाबाजारी की आशंका भी बढ़ जाती है। अतीत में कई बार देखा गया है कि संकट की आशंका होते ही कुछ व्यापारी आवश्यक वस्तुओं का भंडारण कर लेते हैं, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो जाती है। खाद्य तेल, दाल, चीनी और गैस सिलेंडर जैसी वस्तुओं में इस तरह की स्थिति बनने की संभावना हमेशा बनी रहती है। यदि बाजार में कृत्रिम कमी पैदा होती है तो कीमतों में अचानक तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

आम आदमी के बजट पर बढ़ता दबाव

महंगाई का सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ता है। गैस सिलेंडर, दूध, सब्जी, राशन, बच्चों की पढ़ाई और बिजली बिल जैसे खर्च पहले से ही बढ़ रहे हैं। ऐसे में यदि ईंधन की कीमतों में और वृद्धि होती है तो मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। गृहिणियों का कहना है कि घर का बजट पहले ही मुश्किल से संतुलित हो पा रहा है। यदि गैस और राशन के दाम बढ़े तो खर्च संभालना और कठिन हो जाएगा।

श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में अन्नक्षेत्र की थाली भी हुई हल्की

तेल और गैस संकट की आशंका का असर अब धर्म और आस्था की नगरी काशी में भी दिखाई देने लगा है। बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में संचालित अन्न क्षेत्र में गैस बचाने के लिए प्रसाद के मेनू में कटौती करनी पड़ी है। विश्वनाथ धाम स्थित मां अन्नपूर्णा भवन में प्रतिदिन लगभग 850 से 1000 श्रद्धालुओं को निःशुल्क भोजन कराया जाता है। यह सेवा वर्षों से बाबा विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए संचालित की जा रही है। लेकिन एलपीजी की संभावित कमी को देखते हुए अब प्रसाद की थाली में बदलाव किया गया है। जहां पहले श्रद्धालुओं को दो प्रकार की सब्जियां परोसी जाती थीं, अब केवल एक ही सब्जी दी जा रही है। इसके साथ ही रोज मिलने वाली सेवई को भी फिलहाल मेनू से हटा दिया गया है।

अन्न क्षेत्र में रोजाना ढाई सिलेंडर की खपत

अन्न क्षेत्र में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में भोजन तैयार किया जाता है। इसके लिए औसतन ढाई कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की खपत होती है। प्रबंधन के अनुसार गैस की आपूर्ति में अनिश्चितता को देखते हुए एहतियात के तौर पर दो सिलेंडर रिजर्व रखे गए हैं, ताकि व्यवस्था अचानक प्रभावित हो। रसोई में काम करने वाली रसोइयों ने बताया कि गैस की बचत के लिए अब कुछ बदलाव भी किए गए हैं। पहले जहां बड़े पतीलों में भोजन पकाया जाता था, वहीं अब कुकर का उपयोग बढ़ा दिया गया है ताकि ईंधन की खपत कम हो सके।

आस्था के साथ व्यवस्था की चुनौती

काशी विश्वनाथ धाम में प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अन्न क्षेत्र की व्यवस्था यहां आने वाले भक्तों के लिए महत्वपूर्ण सेवा मानी जाती है। हालांकि प्रबंधन का कहना है कि फिलहाल केवल एहतियात के तौर पर मेनू में बदलाव किया गया है ताकि उपलब्ध गैस का उपयोग अधिक समय तक किया जा सके। यदि आपूर्ति सामान्य हो जाती है तो व्यवस्था पहले की तरह ही जारी रहेगी। फिलहाल स्थिति यह है कि पश्चिम एशिया की हलचल से उठी तेल संकट की आहट अब बाजार, रसोई और मंदिर की थाली तक महसूस की जाने लगी है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात किस दिशा में जाते हैं, यह तय करेगा कि महंगाई का यह दबाव कितना बढ़ेगा। लेकिन इतना तय है कि यदि ईंधन की कीमतों में उछाल आया तो उसका असर आम आदमी की जेब से लेकर सड़क किनारे के ठेले और मंदिर के अन्न क्षेत्र तक हर जगह दिखाई देगा।

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