Wednesday, 11 March 2026

अन्नपूर्णा की नगरी में भी एलपीजी की किल्लत से रसोई पर दबाव

प्रसाद की थाली भी हुई हल्की, दो की जगह एक सब्जी, सेवई भी हटाई गई

अन्नपूर्णा की नगरी में भी एलपीजी की किल्लत से रसोई पर दबाव 

गैस बचाने के लिए काशी विश्वनाथ धाम के अन्न क्षेत्र में बदला प्रसाद मेनू

रोज 850 से 1000 श्रद्धालुओं को मिलता है निःशुल्क भोजन

सुरेश गांधी

वाराणसी। देश में एलपीजी आपूर्ति को लेकर बन रही अनिश्चितता का असर अब धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी तक पहुंच गया है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में संचालित अन्न क्षेत्र भी गैस संकट की आंच से अछूता नहीं रहा। एलपीजी की किल्लत को देखते हुए यहां प्रसाद के मेनू में कटौती कर दी गई है।

विश्वनाथ धाम स्थित मां अन्नपूर्णा भवन में चल रहे अन्न क्षेत्र में प्रतिदिन करीब 850 से 1000 श्रद्धालुओं को निःशुल्क भोजन कराया जाता है। लेकिन गैस की बचत के लिए अब प्रसाद की थाली में बदलाव करना पड़ा है। जहां पहले प्रसाद में दो तरह की सब्जियां परोसी जाती थीं, अब केवल एक ही सब्जी दी जा रही है। इसके साथ ही थाली में रोज मिलने वाली सेवई को भी फिलहाल मेनू से हटा दिया गया है।

मां अन्नपूर्णा की नगरी में भी दिखा असर

काशी के बारे में प्रचलित मान्यता है कि यहां मां अन्नपूर्णा की विशेष कृपा रहती है और इस नगरी में कोई भूखा नहीं सोता। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए विश्वनाथ धाम के मां अन्नपूर्णा भवन में पिछले कुछ वर्षों से अन्न क्षेत्र संचालित किया जा रहा है। यहां बाबा विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को प्रतिदिन निःशुल्क प्रसाद के रूप में भोजन कराया जाता है। लेकिन मौजूदा हालात में एलपीजी की बचत के लिए व्यवस्थाओं में बदलाव करना पड़ा है।

ट्रस्ट और संस्थान मिलकर करते हैं संचालन

अन्न क्षेत्र का संचालन काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट और तमिलनाडु के धार्मिक संस्थान काशी नट्टकोट्टई नगरा छत्रम के संयुक्त सहयोग से किया जाता है। अन्न क्षेत्र के मैनेजर रवि ने बताया कि गैस की संभावित कमी को देखते हुए पहले से ही एहतियाती कदम उठाए गए हैं। इसी के तहत प्रसाद के मेनू में कटौती की गई है ताकि उपलब्ध एलपीजी का उपयोग लंबे समय तक किया जा सके। उन्होंने बताया कि सामान्य दिनों में श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में दो सब्जियां, रोटी, वेज बिरयानी, सांभर, पापड़ और सेवई दी जाती है। फिलहाल गैस बचाने के लिए एक सब्जी और सेवई को मेनू से हटाना पड़ा है।

रोजाना ढाई सिलेंडर की खपत

अन्न क्षेत्र में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में भोजन तैयार किया जाता है। इसके लिए औसतन ढाई कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल होता है। मैनेजर रवि के अनुसार गैस का ऑर्डर पहले ही दिया गया है, लेकिन अगले दिन के लिए एलपीजी की आपूर्ति अभी तक नहीं हो पाई है। हालांकि उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही गैस की उपलब्धता सामान्य हो जाएगी। फिलहाल एहतियात के तौर पर दो सिलेंडर रिजर्व रखे गए हैं ताकि अन्न क्षेत्र का संचालन अचानक प्रभावित हो।

रसोई की व्यवस्था में भी बदलाव

गैस की बचत के लिए रसोई की कार्यप्रणाली में भी बदलाव किए गए हैं। अन्न क्षेत्र में भोजन बनाने वाली रसोइया प्रेमलता और सोनी ने बताया कि पहले चावल और सांभर बड़े पतीलों में पकाए जाते थे, लेकिन अब गैस बचाने के लिए कुकर का उपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि एलपीजी की आपूर्ति में और दिक्कत आती है तो आने वाले दिनों में मेनू से रोटी भी हटानी पड़ सकती है।

श्रद्धालुओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया

अन्न क्षेत्र में प्रसाद ग्रहण करने पहुंचे साधु मुरली कृष्ण ने कहा कि देश में एलपीजी का बड़ा घरेलू स्रोत नहीं है और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण ऐसे हालात बन सकते हैं। उनके अनुसार यदि कुछ समय के लिए प्रसाद की व्यवस्था प्रभावित भी होती है तो इससे घबराने की जरूरत नहीं है। वहीं रोज प्रसाद ग्रहण करने आने वाले संतोष शर्मा का कहना है कि फिलहाल तो मेनू से एक सब्जी और सेवई हटाई गई है, लेकिन यदि एलपीजी संकट और गहरा गया और अन्न क्षेत्र का संचालन प्रभावित हुआ तो श्रद्धालुओं को परेशानी हो सकती है।

आस्था के साथ व्यवस्था की चुनौती

काशी विश्वनाथ धाम में प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अन्न क्षेत्र की व्यवस्था यहां आने वाले भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण सेवा मानी जाती है। एलपीजी की संभावित कमी को देखते हुए फिलहाल मेनू में कटौती कर गैस की बचत की जा रही है, ताकि अन्न क्षेत्र की सेवा लगातार जारी रखी जा सके।

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