गंगा सप्तमी पर काशी में सजी भक्ति की सुरमयी शाम
विश्वनाथ
धाम में भजन, नृत्य
और कथक जुगलबंदी का
अद्भुत संगम—“हर-हर महादेव”
के उद्घोष से गूंजा पूरा
परिसर
सुरेश गांधी
वाराणसी. गंगा सप्तमी के
पावन पर्व पर श्री
काशी विश्वनाथ धाम में आयोजित
भव्य सांस्कृतिक संध्या ने काशी की
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गरिमा
को एक नई ऊंचाई
प्रदान की। संध्या होते
ही पूरा धाम भक्ति,
संगीत और नृत्य की
सुरलहरियों में डूब गया,
जहां हर प्रस्तुति ने
श्रद्धालुओं को भावविभोर कर
दिया। “हर-हर महादेव”
के गगनभेदी उद्घोष के बीच पूरा
परिसर दिव्यता और आस्था से
सराबोर नजर आया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुश्री
तनु प्रियंका एवं उनके समूह
द्वारा प्रस्तुत भजन-गायन से
हुआ, जिसने वातावरण को भक्तिमय बना
दिया। मधुर सुरों और
भक्ति रस से ओत-प्रोत इस प्रस्तुति ने
उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक भाव
में डुबो दिया। इसके
पश्चात श्री राहुल मुखर्जी
ने अपनी प्रभावशाली नृत्य-नाटिका के माध्यम से
धर्म और संस्कृति के
विविध आयामों को मंच पर
जीवंत कर दिया। उनकी
प्रस्तुति ने दर्शकों को
मंत्रमुग्ध कर तालियों की
गड़गड़ाहट से पूरे परिसर
को गुंजायमान कर दिया।
कार्यक्रम की अंतिम और
सर्वाधिक आकर्षक प्रस्तुति कोलकाता से आए कलाकारों—श्री मोऊ दत्ता
और सुश्री अश्मिता राय की कथक
जुगलबंदी रही। लय, ताल
और भावों के अद्भुत समन्वय
ने इस प्रस्तुति को
विशेष बना दिया, जिसने
पूरे आयोजन को एक सूत्र
में बांध दिया। गंगा
सप्तमी के अवसर पर
आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या
का उद्देश्य धर्म, अध्यात्म और संस्कृति के
त्रिवेणी संगम को सुदृढ़
करना रहा। बड़ी संख्या
में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस आयोजन
में भाग लेकर न
केवल कला का आनंद
लिया, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का भी अनुभव
किया। काशी में यह
सांस्कृतिक संध्या एक बार फिर
यह संदेश दे गई कि
यहां परंपरा केवल जीवित नहीं,
बल्कि निरंतर प्रवाहित होती एक सजीव
धारा है, जो भक्ति
और संस्कृति के माध्यम से
समाज को जोड़ती है।


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