गंगा सप्तमी पर काशी में उमड़ा आस्था का सैलाब
ललिता घाट
पर
वैदिक
अनुष्ठान
का
दिव्य
दृश्य,
मंत्रोच्चार
के
बीच
माँ
गंगा
का
भव्य
अभिषेक—विश्वकल्याण
की
गूंज
से
सराबोर
हुई
काशी
सुरेश गांधी
वाराणसी। मोक्षदायिनी काशी में गंगा
सप्तमी का पावन पर्व
आज श्रद्धा, विश्वास और सनातन परंपरा
के अद्भुत संगम के रूप
में दिखाई दिया। प्रभात की स्वर्णिम बेला
में श्री काशी विश्वनाथ
धाम के ललिता घाट
पर ऐसा दिव्य दृश्य
उपस्थित हुआ, मानो स्वयं
देवत्व धरती पर अवतरित
हो गया हो। गंगा
तट पर गूंजते वैदिक
मंत्र, शंखध्वनि और भक्तों की
अटूट आस्था ने पूरे वातावरण
को अलौकिक बना दिया।
मंदिर न्यास के निर्देशन में
आयोजित इस भव्य धार्मिक
अनुष्ठान में विद्वान आचार्यों
और अर्चकों ने शास्त्रोक्त विधि
से माँ गंगा का
पूजन-अर्चन कराया। गंगाजल, दुग्ध, पुष्प और विविध पवित्र
सामग्रियों से विधिवत अभिषेक
किया गया। हर मंत्र
के उच्चारण के साथ वातावरण
में एक दिव्य ऊर्जा
का संचार होता रहा, जिसने
उपस्थित श्रद्धालुओं को गहरे आध्यात्मिक
भाव में डुबो दिया।
अभिषेक के उपरांत मंदिर
परिसर में माँ गंगा
के विग्रह की आरती हुई,
जहां श्रद्धालुओं ने भगवान विश्वनाथ
और माँ गंगा के
समक्ष नतमस्तक होकर देश-प्रदेश
की सुख-समृद्धि और
विश्वकल्याण की कामना की।
आस्था का यह अनुपम
दृश्य काशी की जीवंत
आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक बन
गया।
श्री काशी विश्वनाथ
मंदिर न्यास द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न
केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहा,
बल्कि काशी की सनातन
सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का
भी सशक्त उदाहरण बना। गंगा सप्तमी
का यह पर्व एक
बार फिर यह संदेश
दे गया कि काशी
केवल एक नगर नहीं,
बल्कि आध्यात्मिक चेतना की अनवरत धारा
है, जो युगों-युगों
से मानवता को दिशा देती
आ रही है।

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