“सोना छोड़िए, देश जोड़िए”: पीएम मोदी की अपील को सफल बनाने में जुटे भाजपाई
पेट्रोल-डीजल
की
बचत,
सादगी
और
संयम
ही
आत्मनिर्भर
भारत
की
असली
ताकत:
सरवर
सिद्दीकी
सुरेश गांधी
वाराणसी. देश में बढ़ती
आर्थिक चुनौतियों, वैश्विक अस्थिरता और ऊर्जा संकट
के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र
मोदी द्वारा देशवासियों से एक वर्ष
तक सोना न खरीदने,
पेट्रोल-डीजल की खपत
कम करने और सादगीपूर्ण
जीवन अपनाने की अपील को
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी
सदस्य सरवर सिद्दीकी ने
राष्ट्रहित में बड़ा और
दूरदर्शी कदम बताया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री
का संदेश केवल आर्थिक सलाह
नहीं, बल्कि “राष्ट्र निर्माण का सामाजिक अभियान”
है, जिसे हर नागरिक
को गंभीरता से अपनाना चाहिए।
सरवर सिद्दीकी ने
कहा कि आज विश्व
आर्थिक अस्थिरता, ऊर्जा संकट और बढ़ती
उपभोक्तावादी संस्कृति से जूझ रहा
है। ऐसे समय में
प्रधानमंत्री मोदी का यह
संदेश देश को आत्मनिर्भरता,
अनुशासन और जिम्मेदार नागरिकता
की ओर ले जाने
वाला है। उन्होंने कहा
कि यदि देशवासी एक
वर्ष तक अनावश्यक सोने
की खरीदारी से बचें और
ईंधन की खपत सीमित
करें, तो इससे देश
की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी
और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी सकारात्मक
प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पेट्रोल
और डीजल की बचत
केवल आर्थिक विषय नहीं, बल्कि
पर्यावरण संरक्षण और आने वाली
पीढ़ियों के भविष्य से
भी जुड़ा हुआ मुद्दा
है। लोगों को निजी वाहनों
का कम उपयोग कर
मेट्रो, रेल, बस और
साझा परिवहन व्यवस्था को अपनाना चाहिए।
इससे प्रदूषण भी कम होगा
और देश ऊर्जा बचत
की दिशा में आगे
बढ़ेगा।
भाजपा नेता ने प्रधानमंत्री
की उस अपील का
भी समर्थन किया, जिसमें उन्होंने लोगों से भोजन में
तेल और घी का
सीमित उपयोग करने तथा अनावश्यक
विलासिता से बचने की
बात कही। सिद्दीकी ने
कहा कि भारतीय संस्कृति
सदैव सादगी, संयम और संतुलित
जीवन की पक्षधर रही
है। आज आवश्यकता इस
बात की है कि
समाज दिखावे और फिजूलखर्ची से
बाहर निकलकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता दे।
उन्होंने कहा कि “फालतू
की सैर-सपाटा, अनावश्यक
विदेश यात्राएं और अत्यधिक खर्च
वाले आयोजनों से बचना भी
देशभक्ति का हिस्सा है।”
घर से ही अधिकतर
कार्य निपटाने की आदत विकसित
करनी चाहिए ताकि ईंधन की
बचत हो और समय
का भी सदुपयोग हो
सके।
सरवर सिद्दीकी ने
पूर्व प्रधानमंत्री प्दकपतं ळंदकीप का उदाहरण देते
हुए कहा कि वर्ष
1967 में भी उन्होंने देशवासियों
से सोना न खरीदने
की अपील की थी।
उस समय भी देश
आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा
था और राष्ट्रीय हित
को सर्वोपरि मानते हुए जनता से
सहयोग मांगा गया था। उन्होंने
कहा कि इतिहास गवाह
है कि जब-जब
देश कठिन दौर से
गुजरा है, तब-तब
जनता ने त्याग और
अनुशासन के माध्यम से
राष्ट्र को मजबूत किया
है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते
हुए कहा कि कुछ
लोग प्रधानमंत्री की हर अपील
को नकारात्मक राजनीति के चश्मे से
देखते हैं, जबकि यह
संदेश पूरी तरह राष्ट्रहित
और जनकल्याण से जुड़ा हुआ
है। देश को मजबूत
बनाने के लिए राजनीति
से ऊपर उठकर सहयोग
की भावना आवश्यक है।
सिद्दीकी ने कहा कि
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
केवल सरकार की नीति नहीं,
बल्कि “नए भारत की
जीवनशैली” का संकेत है,
जहां आत्मसंयम, स्वदेशी सोच और राष्ट्रीय
प्राथमिकताओं को महत्व दिया
जाएगा। उन्होंने देशवासियों से अपील की
कि वे प्रधानमंत्री के
इस संदेश को जन आंदोलन
का रूप दें और
आने वाली पीढ़ियों के
लिए मजबूत, आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत
के निर्माण में भागीदार बनें।

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