राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने निकले जागरूकता रथ
जिला जज
ने
हरी
झंडी
दिखाकर
प्रचार-प्रसार
वाहनों
को
किया
रवाना,
आमजन
से
विवादों
के
त्वरित
समाधान
का
आह्वान
सुरेश गांधी
वाराणसी। न्याय केवल अदालतों की
चारदीवारी तक सीमित न
रहे, बल्कि समाज के अंतिम
व्यक्ति तक सरल, सुलभ
और त्वरित रूप में पहुंचे.
इसी उद्देश्य के साथ 9 मई
को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय
लोक अदालत को सफल बनाने
के लिए गुरुवार को
जनपद न्यायालय परिसर से व्यापक जागरूकता
अभियान की शुरुआत की
गई। जिला विधिक सेवा
प्राधिकरण वाराणसी की ओर से
आयोजित कार्यक्रम में जनपद न्यायाधीश
एवं जिला विधिक सेवा
प्राधिकरण के अध्यक्ष संजीव
शुक्ला ने प्रचार-प्रसार
वाहनों को हरी झंडी
दिखाकर रवाना किया।
न्यायालय परिसर से रवाना हुए
ये जागरूकता वाहन शहर से
लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचकर लोगों
को राष्ट्रीय लोक अदालत के
महत्व, उसकी प्रक्रिया और
त्वरित न्याय व्यवस्था के प्रति जागरूक
करेंगे। कार्यक्रम के दौरान जिला
जज संजीव शुक्ला ने कहा कि
राष्ट्रीय लोक अदालत केवल
मुकदमों के निस्तारण का
माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और न्यायिक सरलता
का एक प्रभावी मंच
है। उन्होंने कहा कि लोक
अदालत के माध्यम से
आपसी सहमति के आधार पर
मामलों का समाधान होता
है, जिससे वर्षों पुराने विवाद भी कम समय
में समाप्त हो जाते हैं
और लोगों को आर्थिक व
मानसिक राहत मिलती है।
उन्होंने कहा कि आम
नागरिकों को न्यायालयी प्रक्रियाओं
में अनावश्यक विलंब और खर्च से
बचाने के लिए राष्ट्रीय
लोक अदालत एक महत्वपूर्ण पहल
है। प्रचार-प्रसार वाहनों का उद्देश्य यही
है कि अधिक से
अधिक लोग इस व्यवस्था
से जुड़ें और अपने लंबित
मामलों का समाधान आपसी
सहमति से करा सकें।
जागरूकता अभियान के तहत वाहन
विभिन्न तहसीलों, ब्लॉकों और सार्वजनिक स्थलों
पर जाकर लोगों को
यह जानकारी देंगे कि राष्ट्रीय लोक
अदालत में बैंक ऋण,
मोटर दुर्घटना दावा, पारिवारिक विवाद, बिजली-पानी बिल, श्रम
विवाद, राजस्व वाद तथा अन्य
सुलह योग्य मामलों का निस्तारण सरल
प्रक्रिया के तहत किया
जाएगा।
कार्यक्रम में मोटर दावा
एवं दुर्घटना अधिकरण के पीठासीन अधिकारी
रामकेश, अपर जनपद न्यायाधीश
एवं राष्ट्रीय लोक अदालत के
नोडल अधिकारी आलोक कुमार सहित
जनपद वाराणसी के समस्त न्यायिक
अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासनिक स्तर
पर मुख्य राजस्व अधिकारी अजीत कुमार, यूनियन
बैंक ऑफ इंडिया के
अग्रणी जिला प्रबंधक अविनाश
अग्रवाल तथा विभिन्न विभागों
के अधिकारी और कर्मचारी भी
कार्यक्रम में शामिल हुए।
इस अवसर पर
न्यायिक अधिकारियों ने कहा कि
लोक अदालतें भारतीय न्याय व्यवस्था की उस मानवीय
सोच का प्रतीक हैं,
जहां न्याय को सरल और
जनोन्मुख बनाने का प्रयास निरंतर
किया जा रहा है।
बीते वर्षों में राष्ट्रीय लोक
अदालतों के माध्यम से
लाखों मामलों का निस्तारण हुआ
है, जिससे अदालतों पर लंबित मामलों
का बोझ भी कम
हुआ है और लोगों
का न्यायपालिका पर विश्वास भी
मजबूत हुआ है।
जिला विधिक सेवा
प्राधिकरण के पूर्णकालिक सचिव
राजीव मुकुल पाण्डेय ने बताया कि
9 मई को आयोजित राष्ट्रीय
लोक अदालत में अधिकाधिक मामलों
के निस्तारण के लिए व्यापक
तैयारी की गई है।
उन्होंने आमजन से अपील
की कि वे इस
अवसर का लाभ उठाकर
अपने मामलों का त्वरित और
सौहार्दपूर्ण समाधान कराएं।
काशी में राष्ट्रीय
लोक अदालत को लेकर शुरू
हुआ यह अभियान केवल
एक औपचारिक पहल नहीं, बल्कि
न्याय को जन-जन
तक पहुंचाने की दिशा में
एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा
है। न्यायपालिका और प्रशासन की
संयुक्त सक्रियता यह संकेत दे
रही है कि अब
न्याय व्यवस्था को अधिक संवेदनशील,
सरल और सहभागी बनाने
की दिशा में गंभीर
प्रयास तेज हो चुके
हैं।

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