Thursday, 21 May 2026

फर्जीवाड़े के आरोपों पर घिरा बिजली बिल कलेक्शन सिस्टम, कर्मचारियों ने खोला मोर्चा

फर्जीवाड़े के आरोपों पर घिरा बिजली बिल कलेक्शन सिस्टम, कर्मचारियों ने खोला मोर्चा 

बिजली बिल वसूली में कथित गड़बड़ियों पर गरमाई सियासत, निजी एजेंसियों की भूमिका पर उठे सवाल

सुरेश गांधी

वाराणसी. पूर्वांचल डिस्कॉम में नई तैनाती के बाद अधिकारियों से मुलाकात करने पहुंचे विद्युत मजदूर पंचायत उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने कर्मचारियों की समस्याओं के साथ-साथ बिजली बिल वसूली व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। पंचायत ने आरोप लगाया कि बिजली बिल कलेक्शन से जुड़ी निजी कंपनियों की कार्यप्रणाली ने उपभोक्ताओं और विभाग दोनों के लिए चिंता की स्थिति पैदा कर दी है।

प्रांतीय कार्यवाहक अध्यक्ष राजनारायण सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने निदेशक कार्मिक एवं प्रशासन तथा निदेशक वित्त से मुलाकात कर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी। साथ ही कर्मचारियों से जुड़ी लंबित समस्याओं और बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग भी रखी। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पूर्वांचल क्षेत्र में लगातार बढ़ते बिजली भार और उपभोक्ताओं की संख्या को देखते हुए पर्याप्त मानव संसाधन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मानक के अनुरूप हटाए गए संविदाकर्मियों की दोबारा तैनाती की जाए ताकि उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा पूर्व में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा स्वीकृत 5436 रिक्त पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू कराने के प्रस्ताव को भी आगे बढ़ाने की मांग की गई।

मुलाकात के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा बिजली बिल वसूली व्यवस्था को लेकर उठा। पंचायत ने आरोप लगाया कि बीएलएस (फिनटेक) कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं से बिजली बिल की राशि जमा करने के बावजूद विभागीय रिकॉर्ड में भुगतान दर्ज होने जैसी शिकायतें सामने आई थीं, जिस पर कार्रवाई भी की गई। इसके बावजूद अन्य निजी एजेंसियों को कैश काउंटर संचालन सौंपे जाने पर संगठन ने नाराजगी जताई। प्रतिनिधिमंडल ने मांग रखी कि मेसर्स सरल समेत सभी निजी एजेंसियों को दिए गए कैश काउंटरों का संचालन विभागीय कर्मचारियों के माध्यम से कराया जाए। साथ ही पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की गई।

संगठन ने कहा कि बिजली बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं का हित सर्वोपरि होना चाहिए। जिन उपभोक्ताओं के भुगतान रिकॉर्ड में विसंगतियां सामने आई हैं, उनके भुगतानों का सत्यापन कर उन्हें राहत दी जानी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल में .पी. सिंह, जिउतलाल, अंकुर पाण्डेय, श्यामलाल और के.पी. दुबे समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

पंचायत की प्रमुख मांगें

सभी कैश काउंटरों पर विभागीय कर्मचारियों की तैनाती

कथित फर्जीवाड़े के मामले में एफआईआर दर्ज हो

संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए

प्रभावित उपभोक्ताओं के भुगतान का सत्यापन हो

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