मेरे लिए सत्ता नहीं, सेवा सबसे बड़ा धर्म है : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
हिमालय
की
शांत
वादियों
में
बसे
एक
छोटे
से
गांव
पंचूर
से
निकला
एक
युवा
जब
22 वर्ष
की
आयु
में
सांसारिक
जीवन
त्यागकर
संन्यास
की
राह
पर
चला,
तब
शायद
किसी
ने
नहीं
सोचा
था
कि
यही
युवक
एक
दिन
देश
के
सबसे
बड़े
राज्य
की
राजनीति
का
सबसे
प्रभावशाली
चेहरा
बनेगा।
यह
कहानी
केवल
एक
व्यक्ति
की
नहीं,
बल्कि
उस
संकल्प,
साधना
और
नेतृत्व
की
है
जिसने
उत्तर
प्रदेश
की
राजनीति
और
प्रशासन
दोनों
को
नई
दिशा
दी।
मुख्यमंत्री
योगी
आदित्यनाथ
का
जीवन
विरोधाभासों
को
साध
लेने
की
एक
अद्भुत
मिसाल
है।
एक
ओर
वे
नाथ
परंपरा
के
सन्यासी
हैं,
तो
दूसरी
ओर
करोड़ों
लोगों
की
आकांक्षाओं
का
प्रतिनिधित्व
करने
वाले
जननेता।
मंदिर
की
घंटियों
और
सत्ता
के
गलियारों
के
बीच
उन्होंने
ऐसा
संतुलन
स्थापित
किया,
जिसने
उन्हें
भारतीय
राजनीति
में
विशिष्ट
पहचान
दिलाई।
उनके
समर्थक
उन्हें
हिंदुत्व
का
सबसे
मुखर
चेहरा
मानते
हैं,
जबकि
प्रशासनिक
हलकों
में
उनकी
पहचान
तेज
निर्णय
क्षमता
और
परिणामोन्मुखी
कार्यशैली
वाले
मुख्यमंत्री
के
रूप
में
है।
पिछले
वर्षों
में
उत्तर
प्रदेश
ने
जिस
बदलाव
का
अनुभव
किया,
उसमें
कानून-व्यवस्था
से
लेकर
आधारभूत
संरचना,
निवेश,
पर्यटन
और
सांस्कृतिक
पुनर्जागरण
तक
अनेक
आयाम
शामिल
हैं।
यही
कारण
है
कि
आज
"योगी
मॉडल"
केवल
एक
राजनीतिक
नारा
नहीं,
बल्कि
राष्ट्रीय
विमर्श
का
हिस्सा
बन
चुका
है।
उनका
व्यक्तित्व
एक
ऐसे
राजनेता
के
रूप
में
सामने
खड़ा
दिखाई
देता
है,
जिसकी
यात्रा
साधना
से
शुरू
होकर
सुशासन
की
नई
परिभाषा
तक
पहुंचती
है.
मतलब साफ है उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल
जिले
के
छोटे
से
गांव
पंचूर
से
निकलकर
गोरक्षपीठ
की
आध्यात्मिक
परंपरा
का
उत्तराधिकारी
बनना,
26 वर्ष
की
उम्र
में
देश
के
सबसे
युवा
सांसदों
में
शामिल
होना
और
फिर
देश
के
सबसे
बड़े
राज्य
उत्तर
प्रदेश
के
मुख्यमंत्री
के
रूप
में
सुशासन
का
नया
मॉडल
प्रस्तुत
करना—यह
यात्रा
साधारण
नहीं
है।
54वें
जन्मदिवस
के
अवसर
पर
सीनियर
रिपोर्टर
सुरेश
गांधी
ने
मुख्यमंत्री
योगी
आदित्यनाथ
से
उनकी
जीवन
यात्रा,
हिंदुत्व,
बुलडोजर
मॉडल,
विकास,
राजनीति,
युवाओं
और
भविष्य
के
भारत
को
लेकर
विस्तृत
बातचीत
की.
प्रस्तुत है उसके कुछ प्रमुख अंश:-
प्रश्न : विपक्ष लगातार पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की राजनीति को भाजपा के लिए चुनौती बता रहा है। वहीं 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी दावे किए जा रहे हैं। आप इसे कैसे देखते हैं?
योगी
आदित्यनाथ
: देखिए, लोकतंत्र में हर राजनीतिक
दल को अपनी रणनीति
बनाने का अधिकार है।
लेकिन उत्तर प्रदेश की जनता अब
जाति, तुष्टिकरण और परिवारवाद की
राजनीति से ऊपर उठ
चुकी है। प्रदेश ने
वर्षों तक ऐसी राजनीति
का दुष्परिणाम देखा है, जहां
विकास की जगह जातीय
समीकरण और वोट बैंक
को प्राथमिकता दी गई। हम
मानते हैं कि समाज
को बांटकर नहीं, जोड़कर आगे बढ़ाया जा
सकता है। हमारी सरकार
ने किसी जाति, धर्म
या वर्ग को देखकर
योजनाएं नहीं बनाईं। गरीब
चाहे किसी भी जाति
या मजहब का हो,
उसे आवास मिला, शौचालय
मिला, राशन मिला, आयुष्मान
कार्ड मिला और सुरक्षा
का वातावरण मिला। जहां तक पीडीए की
बात है, मैं कहता
हूं कि हमारा सूत्र
है—"परफॉर्मेंस, डेवलपमेंट और अकाउंटेबिलिटी"। जनता
अब नारे नहीं, परिणाम
देखती है। प्रदेश का
युवा रोजगार चाहता है, किसान समृद्धि
चाहता है, महिलाएं सुरक्षा
चाहती हैं और व्यापारी
बेहतर माहौल चाहता है। 2027 का चुनाव अभी
दूर है, लेकिन हमें
विश्वास है कि पिछले
वर्षों में जो कार्य
हुए हैं, जनता उनका
मूल्यांकन करेगी। उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेस-वे
बने, मेडिकल कॉलेज बने, निवेश आया,
माफिया पर कार्रवाई हुई
और सांस्कृतिक गौरव की पुनर्स्थापना
हुई। यह सब जनता
के सामने है। जो लोग
पीडीए के नाम पर
समाज को बांटने का
प्रयास कर रहे हैं,
उन्हें यह समझना चाहिए
कि आज का मतदाता
जागरूक है। वह जाति
के आधार पर नहीं,
विकास और सुशासन के
आधार पर निर्णय ले
रहा है। हमें विश्वास
है कि 2027 में भी जनता
विकास, सुरक्षा और सुशासन के
पक्ष में अपना आशीर्वाद
देगी। हमारा लक्ष्य चुनाव जीतना भर नहीं है,
बल्कि उत्तर प्रदेश को देश की
सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना
और विकसित भारत के निर्माण
में अग्रणी भूमिका निभाना है।
प्रश्न : महाराज जी, 54 वर्ष की आयु में पीछे मुड़कर अपनी यात्रा को देखते हैं तो सबसे पहले क्या याद आता है?
योगी
आदित्यनाथ
: जब भी मैं पीछे
देखता हूं तो सबसे
पहले अपने माता-पिता,
अपने गांव पंचूर और
अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी
का स्मरण करता हूं। जीवन
में जो कुछ भी
प्राप्त हुआ है, वह
व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। यह
समाज, संगठन और जनता के
विश्वास का परिणाम है।
मैं हमेशा मानता हूं कि व्यक्ति
का जीवन उसके लिए
नहीं, समाज और राष्ट्र
के लिए होना चाहिए।
यदि किसी का जीवन
दूसरों के काम आ
जाए, तो वही उसकी
सबसे बड़ी सफलता है।
प्रश्न : एक सामान्य परिवार का युवक आखिर संन्यास की ओर कैसे आकर्षित हुआ?
योगी
आदित्यनाथ
: भारतीय संस्कृति में आध्यात्म केवल
व्यक्तिगत मुक्ति का मार्ग नहीं
है, बल्कि लोककल्याण का माध्यम भी
है। छात्र जीवन से ही
समाज और राष्ट्र के
प्रति कुछ करने की
भावना थी। जब गोरखपुर
आया और गोरक्षपीठ की
परंपरा को निकट से
देखा, तो लगा कि
यही वह मार्ग है
जहां आध्यात्म और समाज सेवा
दोनों का समन्वय है।
22 वर्ष की आयु में
संन्यास लेना कोई भावनात्मक
निर्णय नहीं था। यह
एक संकल्प था कि जीवन
समाज और राष्ट्र को
समर्पित रहेगा।
प्रश्न : अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ बनने के बाद जीवन में सबसे बड़ा परिवर्तन क्या आया?
योगी
आदित्यनाथ
: सबसे बड़ा परिवर्तन जिम्मेदारी
का था। संन्यास लेने
के बाद व्यक्ति स्वयं
के लिए नहीं जीता।
वह समाज के लिए
जीता है। गोरक्षपीठ केवल
एक धार्मिक संस्था नहीं है। यह
शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा और सामाजिक
जागरण का केंद्र है।
जब गुरुदेव ने मुझे उत्तराधिकारी
बनाया, तब मुझे समझ
में आया कि सेवा
का दायरा कितना व्यापक है।
प्रश्न : 26 वर्ष की आयु में सांसद बनना और लगातार पांच बार जीतना आपके लिए कितना चुनौतीपूर्ण था?
योगी
आदित्यनाथ
: जनता का विश्वास सबसे
बड़ी पूंजी होती है। पूर्वांचल
लंबे समय तक विकास
की दौड़ में पीछे
रहा। वहां की समस्याएं
गंभीर थीं। मैंने संसद
में क्षेत्र के विकास, किसानों,
युवाओं, गरीबों और सुरक्षा के
मुद्दे उठाए। जनता ने मेरे
प्रयासों को स्वीकार किया
और लगातार पांच बार संसद
भेजा। यह मेरे लिए
सम्मान के साथ-साथ
बड़ी जिम्मेदारी भी थी।
प्रश्न : आपकी पहचान एक फायरब्रांड हिंदुत्व नेता के रूप में रही है। क्या हिंदुत्व और विकास साथ-साथ चल सकते हैं?
योगी आदित्यनाथ : हिंदुत्व
और विकास एक-दूसरे के
विरोधी नहीं हैं। भारत
की आत्मा उसकी संस्कृति है।
यदि संस्कृति सुरक्षित होगी तो विकास
भी स्थायी होगा। हिंदुत्व किसी के खिलाफ
नहीं है। यह भारत
की जीवन पद्धति है।
हमने हमेशा कहा कि विरासत
और विकास दोनों साथ-साथ चलेंगे।
अयोध्या, काशी और मथुरा
जैसे सांस्कृतिक केंद्रों का पुनरुत्थान भी
हुआ और एक्सप्रेस-वे,
एयरपोर्ट और उद्योग भी
आए।
प्रश्न : मुख्यमंत्री बनने के बाद आपकी पहली प्राथमिकता क्या थी?
योगी
आदित्यनाथ
: उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी
समस्या कानून-व्यवस्था थी। अपराध और माफियावाद ने
विकास को बंधक बना
रखा था। हमने स्पष्ट
संदेश दिया कि कानून
से ऊपर कोई नहीं
होगा। जब सुरक्षा का
वातावरण बनता है तभी
निवेश आता है, उद्योग
लगते हैं और रोजगार
पैदा होते हैं।
प्रश्न : बुलडोजर आज आपकी पहचान बन चुका है। क्या आपने इसकी कल्पना की थी?
योगी
आदित्यनाथ
: नहीं। बुलडोजर
कोई राजनीतिक प्रतीक नहीं है। यह
कानून के शासन का
प्रतीक है। यदि कोई
गरीब की जमीन कब्जाएगा,
अपराध करेगा या सरकारी संपत्ति
पर अवैध कब्जा करेगा,
तो कार्रवाई होगी। जनता ने देखा
कि पहली बार माफिया
कानून के सामने झुक
रहे हैं। इसीलिए बुलडोजर सुशासन का प्रतीक बन
गया।
प्रश्न : आलोचक कहते हैं कि बुलडोजर की राजनीति की जा रही है?
योगी
आदित्यनाथ
: कानून का पालन राजनीति
नहीं है। जो लोग
वर्षों तक अपराधियों को
संरक्षण देते रहे, उन्हें
कानून का राज असुविधाजनक
लग सकता है। हमारा
उद्देश्य किसी व्यक्ति या
वर्ग को निशाना बनाना
नहीं है। हम केवल
कानून का पालन कर
रहे हैं।
प्रश्न : उत्तर प्रदेश में विकास की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या मानते हैं?
योगी
आदित्यनाथ
: मैं किसी
एक उपलब्धि का नाम नहीं
लेना चाहूंगा।
एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट, मेडिकल
कॉलेज, निवेश, रोजगार, किसानों के लिए योजनाएं,
गरीबों के लिए आवास,
युवाओं के लिए अवसर—ये सभी उपलब्धियां
हैं। सबसे बड़ी उपलब्धि
यह है कि आज
उत्तर प्रदेश की पहचान बदल
गई है। पहले लोग
कहते थे कि यहां
निवेश मत करो। आज
लोग कहते हैं कि
उत्तर प्रदेश में अवसर तलाशो।
प्रश्न : दूसरी बार पूर्ण बहुमत से सत्ता में वापसी को आप कैसे देखते हैं?
योगी
आदित्यनाथ
: यह जनता का आशीर्वाद
था। 37 वर्षों बाद उत्तर प्रदेश
में किसी सरकार की
वापसी हुई। यह केवल
राजनीतिक जीत नहीं थी।
यह जनता का विश्वास
था कि सरकार ने
जो कहा, उसे पूरा
किया।
प्रश्न
: आपकी कार्यशैली को
देश
के
अन्य
मुख्यमंत्री
भी
अपनाने
लगे
हैं।
क्या
यह
‘योगी
मॉडल’
है?
योगी
आदित्यनाथ
: यदि किसी राज्य को
उत्तर प्रदेश के अनुभवों से
लाभ मिलता है तो यह
अच्छी बात है। सुशासन,
पारदर्शिता और सुरक्षा किसी
एक राज्य की जरूरत नहीं,
पूरे देश की जरूरत
है।
प्रश्न : आपकी दिनचर्या आज भी चर्चा का विषय रहती है।
योगी
आदित्यनाथ
: अनुशासन के बिना कोई
बड़ा लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा
सकता। योग, ध्यान और
नियमित दिनचर्या मुझे ऊर्जा देती
है। मैं आज भी
स्वयं को पहले एक
साधक मानता हूं।
प्रश्न : युवाओं के लिए आपका संदेश?
योगी
आदित्यनाथ
: भारत का भविष्य युवा
शक्ति है। लक्ष्य निर्धारित
करें, अनुशासन रखें और राष्ट्रहित
को सर्वोपरि मानें। परिश्रम का कोई विकल्प
नहीं है।
प्रश्न : आज आपके समर्थक आपको भविष्य के राष्ट्रीय नेतृत्व के रूप में भी देखते हैं।
योगी
आदित्यनाथ
: मैं स्वयं को केवल एक
कार्यकर्ता मानता हूं। मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण
उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता की सेवा
है। राजनीति
में व्यक्ति नहीं, संगठन और राष्ट्र सर्वोपरि
होते हैं।
प्रश्न : 54वें जन्मदिवस पर उत्तर प्रदेश और देशवासियों के लिए आपका संदेश?
योगी
आदित्यनाथ
: मेरा संकल्प वही है जो
पहले दिन था—राष्ट्र
प्रथम। उत्तर प्रदेश को देश की
नंबर एक अर्थव्यवस्था बनाना
और विकसित भारत के निर्माण
में अपनी भूमिका निभाना
हमारी प्राथमिकता है। जनता का
विश्वास ही मेरी सबसे
बड़ी शक्ति है और उसी
विश्वास को बनाए रखना
मेरी जिम्मेदारी भी।
फिरहाल, गोरक्षपीठ की तपोभूमि से
निकलकर उत्तर प्रदेश की सत्ता के
शिखर तक पहुंचने वाले
योगी आदित्यनाथ का जीवन भारतीय
राजनीति की उन विरल
यात्राओं में शामिल है
जहां आध्यात्म और प्रशासन, संत
और शासक, परंपरा और आधुनिकता एक
साथ दिखाई देते हैं। 54 वर्ष
की आयु में योगी
आदित्यनाथ केवल एक मुख्यमंत्री
नहीं, बल्कि एक राजनीतिक प्रवृत्ति,
एक प्रशासनिक मॉडल और करोड़ों
समर्थकों के लिए एक
वैचारिक प्रतीक बन चुके हैं।
शायद यही कारण है
कि उनके समर्थक उन्हें
केवल मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि "राजयोगी" कहकर संबोधित करते
हैं।
🔶 "पीडीए
नहीं,
हमारा
मंत्र
है—परफॉर्मेंस,
डेवलपमेंट
और
अकाउंटेबिलिटी"
🔶 "उत्तर
प्रदेश
की
जनता
अब
जातिवाद
और
परिवारवाद
नहीं,
विकास
और
सुशासन
पर
वोट
करती
है"
🔶 "2027 में
जनता
काम
और
परिणाम
के
आधार
पर
फैसला
करेगी"
🔶 "हमारा
लक्ष्य
केवल
चुनाव
नहीं,
उत्तर
प्रदेश
को
देश
की
नंबर-1
अर्थव्यवस्था
बनाना
है"

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