109 करोड़ से बदलेगी वाराणसी मंडल की सूरत
22 परियोजनाओं के साथ काशी
बनेगी धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन की धुरी
घाट, मंदिर, संग्रहालय,
ऑडिटोरियम और इको टूरिज्म पर सरकार का फोकस; मंत्री जयवीर सिंह बोले- गुणवत्ता और समयसीमा
से समझौता नहीं
सुरेश गांधी
वाराणसी। काशी और पूर्वांचल की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम बढ़ाया है। वाराणसी मंडल में पर्यटन, संस्कृति और धर्मार्थ कार्य विभाग की लगभग 109.20 करोड़ रुपये लागत वाली 36 परियोजनाओं पर गुरुवार को विस्तृत मंथन हुआ। लखनऊ से आए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह और अपर मुख्य सचिव अमित अभिजात ने कमिश्नरी सभागार में समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। सरकार का लक्ष्य काशी को राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त पहचान दिलाना है। मंडल की 36 परियोजनाओं में वाराणसी की सर्वाधिक 22, जौनपुर की 6, गाजीपुर की 5 और चंदौली की 3 परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के विकास, पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की योजनाएं शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
वाराणसी की प्रमुख परियोजनाओं में कैंट
क्षेत्र स्थित सती माई मंदिर, प्राचीन रामबाग मंदिर, रोहनिया का प्राचीन शिवधाम मंदिर,
पिंडरा का पौहारी बाबा मंदिर, निर्माण दास बाबा कुटी तथा भगवान राम-जानकी महावीर मंदिर
का विकास शामिल है। इसके अलावा शिवपुर स्थित सराय मोहनाघाट पर लगभग 15 करोड़ रुपये
की लागत से स्थायी घाट निर्माण, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में लगभग 17 करोड़
रुपये की लागत से एक हजार क्षमता वाले ऑडिटोरियम का निर्माण तथा ‘परंपरा केंद्र’
के विकास जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा की गई। शहर के प्रमुख स्थलों पर दिशा-सूचक
और सूचना पट्ट लगाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। रोहनिया में संत रविदास संग्रहालय
(24.63 करोड़ रुपये) और मुंशी प्रेमचंद स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय (5.21 करोड़
रुपये) की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
गाजीपुर में बूढ़े महादेव मंदिर, हनुमान
चौतरा और हथियाराम मठ के सौंदर्यीकरण तथा पर्यटन सुविधाओं के विकास पर चर्चा हुई। चंदौली
में विश्वकर्मा मंदिर, दुखहरण महादेव बाबा मंदिर और काली माता मंदिर के विकास प्रस्तावों
की समीक्षा की गई। जौनपुर में गोमतेश्वर महादेव धाम, मां वैष्णो देवी धाम और राधा-कृष्ण
मंदिर सहित छह प्रमुख धार्मिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की योजना
प्रस्तुत की गई। संस्कृति विभाग की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर भी विचार हुआ। इनमें
वाराणसी उत्तर क्षेत्र स्थित बत्तीस खंभा, बकरियाकुंड, कैंट क्षेत्र का गुरुधाम मंदिर
और अजगरा स्थित पंचो शिवाला के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार का प्रस्ताव शामिल है। इन परियोजनाओं
का उद्देश्य मंडल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए उन्हें पर्यटन
आकर्षण के रूप में विकसित करना है।
बैठक में निर्माणाधीन परियोजनाओं की भी
समीक्षा की गई। गाजीपुर स्थित शहीद वीर अब्दुल हमीद स्मारक के विकास, रोहनिया में लगभग
24.63 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित संत रविदास संग्रहालय तथा लगभग 5.21 करोड़
रुपये की लागत वाले मुंशी प्रेमचंद स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय की प्रगति पर चर्चा
हुई। मुंशी प्रेमचंद संग्रहालय परियोजना वर्तमान में टेंडर प्रक्रिया में है। धर्मार्थ
कार्य विभाग की ओर से जौनपुर के बड़े हनुमान मंदिर के विकास, वाराणसी स्थित भिंगराज
अनाथालय परिसर में लगभग 24.04 करोड़ रुपये की लागत से नए अनाथालय निर्माण तथा दंडी
सेवाश्रम परिसर में लगभग 23.41 करोड़ रुपये की लागत से सेवाश्रम विकास से जुड़े प्रस्ताव
प्रस्तुत किए गए। इन योजनाओं के माध्यम से धार्मिक और सामाजिक सरोकारों को पर्यटन विकास
से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने
के लिए पिंडरा क्षेत्र की करखियां झील को लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से इको टूरिज्म
डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। योजना के तहत झील के प्राकृतिक
स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों के लिए आकर्षक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पर्यटन
मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी परियोजनाओं में स्थानीय सांस्कृतिक
पहचान और विरासत का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक करोड़
रुपये तक की सभी स्वीकृत निर्माणाधीन परियोजनाएं नवंबर माह तक हर हाल में पूरी की जाएं।
अपर मुख्य सचिव अमित अभिजात ने विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय
स्थापित कर निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश
दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सभी मंडलों में पर्यटन, संस्कृति और धर्मार्थ कार्य
विभाग की परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा कर सतत और विरासत आधारित पर्यटन को नई दिशा
देने के लिए प्रतिबद्ध है।
वाराणसी मंडल पर्यटन पैकेज
कुल परियोजनाएं 36
कुल लागत ₹109.20 करोड़
वाराणसी 22 परियोजनाएं
जौनपुर 6
गाजीपुर 5
चंदौली 3




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