एक्सपो से सिर्फ ऑर्डर नहीं, भदोही के हर हाथ को काम बढ़ने की उम्मीद
अखिल भारतीय
कालीन
निर्माता
संघ
अध्यक्ष
उमेश
कुमार
गुप्ता
‘मुन्ना’
बोले—विदेशी
खरीदार
बढ़ेंगे
तो
निर्यातक,
बुनकर
और
छोटे
उद्यमी
सभी
होंगे
लाभान्वित
सुरेश गांधी
भदोही। कालीन नगरी में शुरू
हो रहे 50वें गोल्डन जुबली
इंडिया कार्पेट एक्सपो को लेकर उद्योग
जगत की उम्मीदें कारोबार
के आंकड़ों से कहीं आगे
हैं। अखिल भारतीय कालीन
निर्माता संघ के अध्यक्ष
उमेश कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’ के मुताबिक, भदोही
में दुनिया के अलग-अलग
देशों से खरीदारों का
पहुंचना केवल निर्यातकों के
लिए कारोबारी अवसर नहीं, बल्कि
इससे जुड़े बुनकरों, डिजाइनरों, रंगाई-धुलाई इकाइयों, छोटे-मझोले निर्माताओं,
परिवहन कारोबारियों और दूसरे सहायक
उद्यमों तक काम की
नई संभावनाएं पहुंचने का रास्ता खोल
सकता है। उनके अनुसार,
50वां गोल्डन जुबली एक्सपो ऐसे समय में
हो रहा है जब
वैश्विक बाजार तेजी से बदल
रहा है। खरीदारों की
पसंद, डिजाइन, रंग, आकार, गुणवत्ता
और कीमत को लेकर
मांग लगातार बदल रही है।
ऐसे में विदेशी खरीदारों
का सीधे भदोही पहुंचना
स्थानीय उद्यमियों को यह समझने
का अवसर देगा कि
दुनिया का बाजार आखिर
किस तरह के कालीन
तलाश रहा है।
छोटे निर्यातकों के लिए बड़ा बाजार
गुप्ता के मुताबिक एक्सपो
की सबसे महत्वपूर्ण संभावनाओं
में छोटे और मध्यम
निर्यातकों को नए खरीदारों
तक पहुंच मिलना है। बड़े निर्यातकों
के पास अंतरराष्ट्रीय बाजारों
से पहले से संपर्क
होते हैं, लेकिन ऐसे
आयोजनों में छोटे निर्माता
भी अपने उत्पाद सीधे
विदेशी खरीदारों के सामने रख
सकते हैं। “एक खरीदार एक
कालीन देखता है, लेकिन उसके
पीछे पूरा रोजगार तंत्र
खड़ा होता है। ऑर्डर
बढ़ता है तो करघे
पर काम बढ़ता है,
बुनकर को काम मिलता
है, धागा, रंग, धुलाई, फिनिशिंग,
पैकिंग और परिवहन से
जुड़े कारोबार को गति मिलती
है।”
—उमेश कुमार
गुप्ता
‘मुन्ना’,
अध्यक्ष,
अखिल
भारतीय
कालीन
निर्माता
संघ
बुनकर की उंगलियों तक पहुंचे बाजार का फायदा
कालीन उद्योग की असली ताकत
मशीन नहीं, बल्कि बुनकर के हाथ हैं।
भदोही और आसपास के
क्षेत्रों में पीढ़ियों से
इस हुनर को जीवित
रखने वाले कारीगर ही
इस उद्योग की रीढ़ हैं।
गुप्ता के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय
मांग बढ़ने का सीधा असर
बुनकरों के काम पर
पड़ता है। बेहतर डिजाइन
और नए ऑर्डर आने
पर उत्पादन बढ़ता है और पारंपरिक
हुनर को रोजगार से
जोड़ने का अवसर मिलता
है। यही कारण है
कि एक्सपो को केवल निर्यातकों
का आयोजन मानना इस उद्योग की
पूरी तस्वीर नहीं होगी। इसके
परिणाम का दायरा बुनकर
से लेकर निर्यातक और
छोटे उद्यमी से लेकर स्थानीय
सेवा कारोबार तक फैल सकता
है।
‘भदोही’ खुद एक बाजार की पहचान
भदोही को लंबे समय
से वैश्विक कालीन पहचान से जोड़ा जाता
रहा है। सार्वजनिक रिपोर्टों
में भी उद्योग प्रतिनिधियों
ने ‘भदोही’ नाम को कालीन
कारोबार की अंतरराष्ट्रीय ब्रांड
पहचान से जोड़कर देखा
है। गुप्ता के अनुसार गोल्डन
जुबली एक्सपो इस पहचान को
कारोबारी संबंधों में बदलने का
अवसर है। दुनिया के
खरीदार जब यहां आते
हैं तो उन्हें सिर्फ
तैयार कालीन नहीं दिखता, बल्कि
वे उत्पादन की पूरी परंपरा,
बुनकरों का हुनर और
भदोही की कारोबारी क्षमता
को करीब से समझते
हैं।
डिजाइन बदले, बाजार की पसंद समझे उद्योग
आज वैश्विक बाजार
में सिर्फ खूबसूरत कालीन पर्याप्त नहीं है। डिजाइन
के साथ गुणवत्ता, टिकाऊपन,
रंगों की पसंद, आकार,
कीमत, समय पर आपूर्ति
और बदलती जीवनशैली के अनुरूप उत्पाद
भी महत्वपूर्ण हैं। एक्सपो के
दौरान खरीदारों से मिलने वाला
फीडबैक स्थानीय निर्माताओं के लिए बाजार
की दिशा समझने का
माध्यम बन सकता है।
इसीलिए गुप्ता की नजर में
यह आयोजन ‘ऑर्डर लेने का मंच’
भर नहीं, बल्कि बाजार को पढ़ने का
अवसर भी है।
निर्यात बढ़ा तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति
एक्सपो में 65 देशों के 430 विदेशी खरीदारों का पंजीकरण और
223 से अधिक प्रदर्शकों की
भागीदारी इसे बड़े कारोबारी
मंच का स्वरूप देती
है। खासकर BRICS देशों के 106 खरीदारों की मौजूदगी नए
बाजारों और कारोबारी संपर्कों
की संभावनाओं को बढ़ाती है।
गुप्ता के मुताबिक विदेशी
खरीदारों की आवाजाही का
असर केवल एक्सपो परिसर
तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन, पैकेजिंग, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला और अन्य सेवाओं
को भी इसका लाभ
मिल सकता है।
आधी सदी के पड़ाव पर नई उम्मीद
अखिल भारतीय कालीन
निर्माता संघ के अध्यक्ष
का मानना है कि 50वें
गोल्डन जुबली संस्करण का महत्व इसलिए
भी अधिक है क्योंकि
यह सिर्फ एक व्यापारिक आयोजन
की निरंतरता नहीं, बल्कि भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग की लंबी यात्रा
का पड़ाव है। भदोही के
लिए असली सफलता तब
मानी जाएगी जब एक्सपो की
चकाचौंध खत्म होने के
बाद भी उसके करघों
पर काम बढ़े, बुनकरों
के हाथों में लगातार रोजगार
रहे, छोटे उद्यमियों को
नए खरीदार मिलें और ‘भदोही कार्पेट’
की पहचान दुनिया के बाजार में
और मजबूत हो।
मुन्ना की नजर में एक्सपो का असर
विदेशी खरीदार → नए बाजार और
कारोबारी संपर्क
निर्यातक → नए ऑर्डर और
बाजार की सीधी समझ
छोटे उद्यमी → बड़े
खरीदारों तक पहुंच
बुनकर → बढ़ते ऑर्डर के साथ रोजगार
की संभावनाएं
डिजाइनर → वैश्विक पसंद और नए
डिजाइन का फीडबैक
सहायक उद्योग → धागा, रंगाई, धुलाई, फिनिशिंग, पैकिंग व परिवहन में
काम
भदोही → ‘कालीन नगरी’ की वैश्विक कारोबारी
पहचान को मजबूती

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