वाराणसी को जाम से मिलेगी बड़ी राहत : वरुणा किनारे बनेगा 43.218 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर, केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी
सुरेश गांधी
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता
में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वाराणसी के
लिए एक ऐतिहासिक आधारभूत
संरचना परियोजना को मंजूरी दे
दी है। कैबिनेट ने
राष्ट्रीय राजमार्ग-31 (NH-31) को वाराणसी रिंग
रोड से जोड़ने वाले
43.218 किलोमीटर लंबे 6/4 लेन एलिवेटेड कॉरिडोर
के निर्माण को स्वीकृति प्रदान
की है। यह कॉरिडोर
वरुणा नदी के किनारे
विकसित किया जाएगा। परियोजना
की कुल अनुमानित लागत
10,998.32 करोड़ रुपये होगी। यह परियोजना वाराणसी में वर्षों से
चली आ रही ट्रैफिक
जाम की समस्या के
स्थायी समाधान की दिशा में
सबसे बड़ी पहल मानी
जा रही है। इसके
पूरा होने पर शहर
के भीतर भारी वाहनों
और लंबी दूरी के
यातायात का दबाव काफी
कम होगा।
शहर को मिलेगा नया ट्रैफिक कॉरिडोर
प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर NH-31 को सीधे वाराणसी
रिंग रोड से जोड़ेगा,
जिससे शहर के भीड़भाड़
वाले क्षेत्रों में प्रवेश किए
बिना वाहन आसानी से
एक छोर से दूसरे
छोर तक पहुंच सकेंगे।
इससे कैंट, चौकाघाट, अंधरापुल, लहुराबीर, मैदागिन, भोजूबीर, पांडेयपुर और आसपास के
इलाकों में जाम की
समस्या में उल्लेखनीय कमी
आने की उम्मीद है।
छह और चार लेन का आधुनिक मार्ग
परियोजना के तहत यातायात
की आवश्यकता के अनुसार कुछ
हिस्सों में 6 लेन तथा कुछ
हिस्सों में 4 लेन का एलिवेटेड
कॉरिडोर बनाया जाएगा। आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक से बनने वाला
यह मार्ग तेज, सुरक्षित और
निर्बाध यातायात सुनिश्चित करेगा।
वरुणा किनारे विकास को मिलेगी गति
कॉरिडोर के निर्माण से
केवल ट्रैफिक व्यवस्था ही नहीं सुधरेगी,
बल्कि वरुणा नदी के किनारे
शहरी विकास को भी नई
गति मिलेगी। आसपास के क्षेत्रों में
निवेश, व्यावसायिक गतिविधियों और रियल एस्टेट
विकास को बढ़ावा मिलने
की संभावना है। साथ ही
आपातकालीन सेवाओं, एंबुलेंस और सार्वजनिक परिवहन
की आवाजाही भी अधिक सुगम
होगी।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था को लाभ
देश-विदेश से
आने वाले लाखों श्रद्धालुओं
और पर्यटकों को काशी विश्वनाथ
धाम, सारनाथ, एयरपोर्ट तथा अन्य प्रमुख
स्थलों तक पहुंचने में
कम समय लगेगा। इससे
पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
और स्थानीय व्यापार तथा परिवहन क्षेत्र
को भी बड़ा लाभ
होगा।
रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे
करीब 11 हजार करोड़ रुपये
की इस मेगा परियोजना
के निर्माण के दौरान हजारों
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार
सृजित होंगे। निर्माण सामग्री, परिवहन, इंजीनियरिंग और अन्य क्षेत्रों
में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।
वाराणसी के लिए गेम चेंजर
विशेषज्ञों का मानना है
कि यह परियोजना वाराणसी
के शहरी यातायात की
तस्वीर बदल सकती है।
पिछले कुछ वर्षों में
रिंग रोड, फोरलेन सड़कों,
फ्लाईओवर और रोपवे जैसी
परियोजनाओं के बाद अब
यह एलिवेटेड कॉरिडोर शहर के परिवहन
नेटवर्क को नई ऊंचाई
देगा।
मुख्य बिंदु
परियोजना:
NH-31 से वाराणसी रिंग रोड तक
एलिवेटेड कॉरिडोर
लंबाई:
43.218 किमी
लेन: 6/4 लेन
स्थान:
वरुणा नदी के किनारे
अनुमानित
लागत:
₹10,998.32 करोड़
मंजूरी: केंद्रीय मंत्रिमंडल
मुख्य
उद्देश्य:
वाराणसी शहर को जाम
से राहत, तेज और निर्बाध
यातायात, पर्यटन एवं आर्थिक विकास
को बढ़ावा। यह परियोजना वाराणसी
के लिए केवल एक
सड़क नहीं, बल्कि भविष्य के आधुनिक, सुगम
और व्यवस्थित शहरी परिवहन तंत्र
की मजबूत नींव साबित हो
सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी के संसदीय क्षेत्र
बनारस में उत्तर प्रदेश
की सबसे लंबी एलिवेटेड
रोड बनेगी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की 4100 करोड़ की परियोजना को
केंद्र सरकार ने मंजूरी दे
दी है। 21 किलोमीटर लंबी रोड हरहुआ-राजातालाबा आउटर रिंग रोड
से शुरू होकर शहरी
इलाके में वरुणा किनारे
होते हुए नमो घाट
तक बनेगी। रिंग रोड से नमोघाट
के बीच में चार
स्थानों से पुल को
जोड़ा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश
में अब तक सबसे
लंबी 10 किमी की एलिवेटेड
रोड गाजियाबाद में है। बनारस
में बनने वाली एलिवेटेड
रोड इसकी दोगुनी लंबी
होगी। वरुणा कॉरिडोर को सिटी ट्रांसपोर्ट
से जोड़ने का प्रयास वर्ष
2019 से चल रहा है।
पहले कॉरिडोर के किनारे ई-रिक्शा ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम विकसित करने की योजना
थी, लेकिन हर साल बाढ़
में कॉरिडोर डूब जाने से
परियोजना धरातल पर नहीं उतर
सकी। इसके बाद वर्ष
2022 में रिंग रोड फेज-2
से गुजरने वाले वरुणा किनारे
एलिवेटेड रोड़ बनाने को
सर्वे शुरू हुआ था।
भारी भरकम बजट के
कारण इसे ठंडे बस्ते
में डाल दिया गया
था।

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