Friday, 17 July 2026

काशी के प्राचीन जल स्रोतों को नई जिंदगी, ₹58 करोड़ से होगा तालाबों-कुंडों का कायाकल्प

काशी के प्राचीन जल स्रोतों को नई जिंदगी, ₹58 करोड़ से होगा तालाबों-कुंडों का कायाकल्प 

पीएफसी के सीएसआर से ऐतिहासिक पहल

• 25 तालाब, 30 कुंड और 100 सामुदायिक कुओं का होगा जीर्णोद्धार

रुद्राक्ष में हुआ एमओयू, भूजल संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा नया आधार

सुरेश गांधी

वाराणसी। धर्म, संस्कृति और सभ्यता की राजधानी काशी की प्राचीन जल विरासत को संरक्षित करने की दिशा में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएफसी) ने अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कार्यक्रम के तहत ₹58 करोड़ की लागत से वाराणसी के ऐतिहासिक तालाबों, कुंडों और सामुदायिक कुओं के संरक्षण, पुनरुद्धार एवं विकास के लिए वाराणसी स्मार्ट सिटी के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र में आयोजित समारोह में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे काशी की सांस्कृतिक धरोहर तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए मील का पत्थर बताया।

महापौर अशोक तिवारी ने कहा कि काशी की पहचान केवल मंदिरों से नहीं, बल्कि सदियों पुराने तालाबों, कुंडों और कुओं से भी जुड़ी है। इन जल स्रोतों का पुनर्जीवन शहर की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा देगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए धरोहर को सुरक्षित रखने का कार्य करेगा। उन्होंने इस पहल के लिए पीएफसी का आभार जताते हुए कहा कि इसका लाभ स्थानीय नागरिकों के साथ देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी मिलेगा। पीएफसी की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक परमिंदर चोपड़ा ने कहा कि संस्था ऊर्जा अवसंरचना के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति भी समान रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक तकनीक और तय समयसीमा के भीतर परियोजना पूरी होने से भूजल संरक्षण, जल गुणवत्ता और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूती मिलेगी।

नगर आयुक्त एवं वाराणसी स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी हिमांशु नागपाल ने बताया कि परियोजना के तहत जल निकायों का वैज्ञानिक तरीके से पुनरुद्धार किया जाएगा। तालाबों और कुंडों की सफाई, सौंदर्यीकरण तथा प्राकृतिक जल शोधन के लिए पर्यावरण अनुकूल तकनीकों का उपयोग होगा, जबकि सामुदायिक कुओं के पुनर्जीवन से स्थानीय क्षेत्रों में स्वच्छ जल उपलब्धता को बढ़ावा मिलेगा। परियोजना के तहत 25 ऐतिहासिक तालाबों, 30 कुंडों और 100 सामुदायिक कुओं का व्यापक जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसमें सारनाथ क्षेत्र के तालाबों का पर्यावरणीय पुनर्विकास, कंदवा, संदाहा, रेवागीर, सारंगनाथ, पुलिस लाइन और पांडेयपुर सहित विभिन्न तालाबों की डिसिल्टिंग तथा रानीपोखरी, बैतरणी कुंड, कुरुक्षेत्र तालाब, सोना तालाब, बाबा जगन्नाथ दास सरोवर और पोंगलपुर सहित अनेक जल स्रोतों का संरक्षण एवं जल शोधन कार्य शामिल है।

समारोह के अंत में एमओयू की प्रतियों का आदान-प्रदान हुआ। इसके साथ ही काशी की पारंपरिक जल संस्कृति और आधुनिक सतत विकास को जोड़ने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना की औपचारिक शुरुआत हो गई। मतलब साफ हैसदियों से काशी की जीवनरेखा रहे तालाब, कुंड और कुएं अब नए स्वरूप में नजर आएंगे। ₹58 करोड़ की सीएसआर परियोजना के तहत पीएफसी और वाराणसी स्मार्ट सिटी ने ऐतिहासिक जल धरोहरों के संरक्षण का संकल्प लिया है। यह पहल केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

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