काशी से गूंजा विकसित उत्तर प्रदेश का संकल्प
दो दिवसीय दौरे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबा विश्वनाथ के दरबार से आस्था, विकास, शिक्षा, सुशासन और जनकल्याण की योजनाओं को दी नई गति, श्रावण तैयारियों से लेकर शिक्षक कल्याण तक हर मोर्चे पर दिखाई सक्रियता। मतलब साफ है किसी भी सरकार की पहचान उसकी घोषणाओं से नहीं, बल्कि उसकी प्राथमिकताओं से होती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस दो दिवसीय वाराणसी दौरे ने यह संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश का विकास मॉडल अब केवल सड़कों, पुलों और भवनों तक सीमित नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, सांस्कृतिक विरासत और सुशासन को समान महत्व देकर सरकार विकास की व्यापक परिभाषा प्रस्तुत कर रही है। काशी से निकला यह संदेश केवल वाराणसी के लिए नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण है। यदि शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षक सम्मान, प्रशासनिक पारदर्शिता और विकास परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन की यही गति बनी रही, तो काशी आने वाले वर्षों में केवल आध्यात्मिक राजधानी ही नहीं, बल्कि सुशासन और समावेशी विकास के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में भी अपनी नई पहचान स्थापित करेगी
सुरेश गांधी
वाराणसी केवल भारत की
सांस्कृतिक राजधानी ही नहीं, बल्कि
शासन की प्राथमिकताओं की
कसौटी भी बन चुकी
है। यही कारण है
कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का
हर काशी प्रवास सामान्य
प्रशासनिक दौरा न होकर
प्रदेश की विकास यात्रा
की दिशा तय करने
वाला अवसर बन जाता
है। उनका ताज़ा दो
दिवसीय वाराणसी दौरा भी इसी
दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।
इस दौरे में आस्था
और प्रशासन, विकास और विरासत, शिक्षा
और सुशासन—सभी एक साथ
दिखाई दिए। बाबा विश्वनाथ
के दरबार में माथा टेकने
से लेकर विकास परियोजनाओं
की समीक्षा, श्रावण मास की तैयारियों
का स्थलीय निरीक्षण और शिक्षा क्षेत्र
के लिए नई योजनाओं
की शुरुआत तक, मुख्यमंत्री का
प्रत्येक कार्यक्रम एक स्पष्ट संदेश
देता रहा कि उत्तर
प्रदेश का विकास केवल
निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं
है, बल्कि मानव संसाधन, सांस्कृतिक
धरोहर और सामाजिक सुरक्षा
को समान महत्व देने
वाला समग्र विकास मॉडल है।
दो दिवसीय प्रवास
के दौरान मुख्यमंत्री ने श्री काशी
विश्वनाथ धाम में बाबा
विश्वनाथ का दर्शन-पूजन
कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि
और कल्याण की कामना की।
काशी में यह परंपरा
केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं,
बल्कि यह संदेश भी
है कि शासन की
संवेदनशीलता जनता की सांस्कृतिक
चेतना से जुड़ी रहनी
चाहिए। मुख्यमंत्री का मंदिर दर्शन
इसी भाव का प्रतीक
था। इस दौरान उन्होंने
श्रावण मास की तैयारियों
की भी व्यापक समीक्षा की। सावन में
देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु
काशी पहुंचते हैं। ऐसे में
सुरक्षा, स्वच्छता, यातायात, पेयजल, चिकित्सा, पार्किंग और भीड़ प्रबंधन
जैसी व्यवस्थाओं की समीक्षा कर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को
स्पष्ट निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं
को किसी भी स्तर
पर असुविधा नहीं होनी चाहिए।
प्रशासनिक बैठकों से लेकर स्थलीय
निरीक्षण तक उनका जोर
इस बात पर रहा
कि व्यवस्थाएं केवल कागजों पर
नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई दें।
मुख्यमंत्री ने विकास परियोजनाओं
की भी समीक्षा की
और कई स्थलों का
निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि
विकास कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता
और समयबद्धता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। जनता
को योजनाओं का लाभ समय
पर मिले, यही सुशासन की
वास्तविक पहचान है। यह उनकी
कार्यशैली का भी महत्वपूर्ण
पक्ष है कि वे
प्रस्तुतिकरण से अधिक धरातल
पर कार्यों की वास्तविक स्थिति
देखने को प्राथमिकता देते
हैं। दौरे का सबसे
महत्वपूर्ण पड़ाव बड़ालालपुर स्थित ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर (टीएफसी) में आयोजित विशाल
कार्यक्रम रहा, जहां शिक्षा
और शिक्षक कल्याण से जुड़ी तीन
बड़ी पहलों का शुभारंभ किया
गया। मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना, विद्यार्थियों के लिए डीबीटी
के माध्यम से आर्थिक सहायता
तथा शिक्षकों की सामाजिक सुरक्षा
के लिए भारतीय स्टेट
बैंक के साथ समझौता—इन तीनों पहलों
ने यह स्पष्ट कर
दिया कि प्रदेश सरकार
शिक्षा व्यवस्था को समग्र रूप
से मजबूत करने की दिशा
में कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के
एक करोड़ दस लाख से
अधिक छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के
खातों में 1320 करोड़ रुपये की धनराशि डीबीटी
के माध्यम से हस्तांतरित की।
यह धनराशि विद्यार्थियों के लिए यूनिफॉर्म,
जूते-मोजे, स्कूल बैग और स्टेशनरी
जैसी आवश्यक सामग्री की खरीद के
लिए दी गई है।
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की
यह व्यवस्था पारदर्शिता के साथ यह
भी सुनिश्चित करती है कि
सहायता बिना किसी बिचौलिये
के सीधे पात्र परिवारों
तक पहुंचे। इसी मंच से
मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना का शुभारंभ किया
गया। इस योजना के
माध्यम से बेसिक एवं
माध्यमिक शिक्षा विभाग के लगभग 12 लाख
शिक्षक, शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक, अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के कर्मचारी तथा
मध्यान्ह भोजन योजना के
रसोइये और उनके परिवार
कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा का लाभ प्राप्त
करेंगे। गंभीर बीमारियों और जटिल उपचारों
के लिए सरकारी तथा
सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में
इलाज की सुविधा उपलब्ध
कराई जाएगी। लंबे समय से
शिक्षक वर्ग जिस स्वास्थ्य
सुरक्षा की अपेक्षा कर
रहा था, वह इस
योजना के माध्यम से
साकार होती दिखाई देती
है।
कार्यक्रम के दौरान बेसिक
शिक्षा विभाग और भारतीय स्टेट
बैंक के बीच सामाजिक
सुरक्षा संबंधी एमओयू का आदान-प्रदान
भी हुआ। इसके अंतर्गत
शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों
को जीवन बीमा, दुर्घटना
बीमा, विकलांगता सुरक्षा तथा आकस्मिक परिस्थितियों
में परिवार के लिए आर्थिक
सहायता जैसी सुविधाएं प्रदान
की जाएंगी। यह पहल इस
बात का संकेत है
कि सरकार अब केवल कर्मचारियों
से अपेक्षाएं नहीं रखती, बल्कि
उनके सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा
कवच को भी मजबूत
करना चाहती है। अपने संबोधन
में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने
कहा कि "कोई बच्चा शिक्षा
से वंचित नहीं रहना चाहिए।
यह केवल सरकार की
नहीं, बल्कि पूरे समाज, शिक्षकों
और अभिभावकों की साझा जिम्मेदारी
है।" उनका यह कथन
शिक्षा को सामाजिक आंदोलन
का स्वरूप देने का संदेश
था। उन्होंने कहा कि बच्चे
राष्ट्र की सबसे बड़ी
पूंजी हैं और उनका
सर्वांगीण विकास ही विकसित भारत
की सबसे मजबूत नींव
बनेगा।
मुख्यमंत्री ने निपुण भारत
अभियान का उल्लेख करते
हुए कहा कि प्रत्येक
बच्चे की सीखने की
क्षमता को बेहतर बनाना
सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि मजबूत
नींव पर ही मजबूत
इमारत खड़ी होती है।
उसी प्रकार यदि प्रारंभिक शिक्षा
मजबूत होगी तो भविष्य
का भारत भी उतना
ही सशक्त होगा। यह विचार नई
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मूल
उद्देश्य को भी प्रतिबिंबित
करता है, जिसमें केवल
परीक्षा परिणाम नहीं बल्कि कौशल,
नवाचार और व्यक्तित्व विकास
पर बल दिया गया
है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर
का उल्लेख करते हुए कहा
कि एक समय प्रदेश
को 'बीमारू राज्य' कहा जाता था,
लेकिन पिछले नौ वर्षों में
डबल इंजन सरकार के
प्रयासों ने उत्तर प्रदेश
को देश के अग्रणी
राज्यों की श्रेणी में
खड़ा कर दिया है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा
में किया गया निवेश
कभी व्यर्थ नहीं जाता। आज
प्रदेश में नकलमुक्त परीक्षा
व्यवस्था स्थापित हुई है और
युवाओं के भविष्य के
साथ किसी प्रकार का
खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने आचार्य चाणक्य
और पंडित मदन मोहन मालवीय
का स्मरण करते हुए कहा
कि भारत के युवाओं
को ऐसे ही आदर्शों
से प्रेरणा लेनी चाहिए। ज्ञान,
चरित्र और राष्ट्रभक्ति से
ही मजबूत समाज और सशक्त
राष्ट्र का निर्माण संभव
है। काशी की धरती
पर मालवीय जी का उल्लेख
इस बात का भी
प्रतीक था कि शिक्षा
केवल रोजगार का माध्यम नहीं,
बल्कि राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा
साधन है। दौरे के
दौरान स्वच्छ एवं हरित विद्यालय
योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय
स्तर पर चयनित विद्यालयों
के प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया
गया। यह सम्मान विद्यालयों
में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और बेहतर शैक्षिक
वातावरण को बढ़ावा देने
की दिशा में महत्वपूर्ण
पहल है। यदि पूरे
दो दिवसीय दौरे का समग्र
मूल्यांकन किया जाए तो
यह स्पष्ट होता है कि
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने
वाराणसी को केवल धार्मिक
राजधानी के रूप में
नहीं देखा, बल्कि उसे उत्तर प्रदेश
के विकास मॉडल की प्रयोगशाला
के रूप में प्रस्तुत
किया। एक ओर बाबा
विश्वनाथ की नगरी की
सांस्कृतिक गरिमा को संरक्षित करने
का प्रयास दिखाई दिया, तो दूसरी ओर
आधुनिक आधारभूत संरचना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक सम्मान, डिजिटल पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही
को समान महत्व दिया
गया।


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