हरियाली की हुंकार, काशी का संकल्प... अब सांसें भी होंगी सुरक्षित
मंत्री रविन्द्र जायसवाल के नेतृत्व में 5 हजार पौधों का रोपण, पर्यावरण संरक्षकों का सम्मान. • "वृक्ष आने वाली पीढ़ियों की सबसे बड़ी पूंजी" का संदेश बना अभियान का मूल मंत्र. • पूरे जिले में गूंजा 'एक पेड़ मां के नाम' का संदेश, प्रशासन से न्यायपालिका तक एक मंच पर जुटा पूरा जिला
सुरेश गांधी
वाराणसी। रविवार को काशी ने
केवल पौधे नहीं लगाए,
बल्कि आने वाले कल
की सांसों को धरती की
गोद में सौंप दिया।
सावन की हरियाली के
बीच जब हजारों हाथ
एक साथ मिट्टी से
जुड़े, तो यह दृश्य
किसी सरकारी औपचारिकता का नहीं, बल्कि
प्रकृति के प्रति सामूहिक
आस्था के महायज्ञ का
प्रतीत हुआ। वृक्षारोपण महाभियान
ने यह संदेश दिया
कि यदि विकास को
स्थायी बनाना है तो उसकी
जड़ें मिट्टी में और उसकी
शाखाएं हरियाली में ही तलाशनी
होंगी।
मंत्री रविन्द्र जायसवाल का संदेश पूरे
अभियान का सबसे प्रभावशाली
स्वर बनकर उभरा। उन्होंने
कहा कि "वृक्ष केवल पर्यावरण को
संतुलित रखने का माध्यम
नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों
के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी
पूंजी हैं।" यह कथन केवल
भाषण का हिस्सा नहीं
था, बल्कि उस चेतावनी का
भी संकेत था कि यदि
आज पेड़ों को नहीं बचाया
गया, तो कल जीवन
का संतुलन बचाना कठिन हो जाएगा।
उन्होंने प्रत्येक नागरिक से वर्ष में
कम से कम एक
पौधा लगाने और उसे परिवार
के सदस्य की तरह संरक्षित
करने का आह्वान किया।
उधर, वृक्षारोपण का
यह संकल्प केवल एक मंच
तक सीमित नहीं रहा। जिलाधिकारी
सत्येंद्र कुमार ने अपने सरकारी
आवास पर बेटियों के
साथ पौधारोपण कर यह संदेश
दिया कि पर्यावरण संरक्षण
की शुरुआत परिवार से होती है।
जब बच्चे अपने हाथों से
पौधा लगाते हैं, तब वे
केवल एक वृक्ष नहीं,
बल्कि जिम्मेदारी का संस्कार भी
रोपते हैं। न्यायपालिका भी
इस महाभियान में पीछे नहीं
रही। जनपद न्यायाधीश संजीव
शुक्ला ने दीवानी न्यायालय
परिसर में "एक पेड़ मां
के नाम" अभियान के तहत पौधारोपण
करते हुए जल संरक्षण
को वृक्ष संरक्षण का अनिवार्य साथी
बताया। उन्होंने घरों में जल
बचाने के छोटे-छोटे
उपायों का उल्लेख करते
हुए स्पष्ट किया कि प्रकृति
की रक्षा केवल पेड़ लगाने
से नहीं, बल्कि जल बचाने की
संस्कृति विकसित करने से भी
होगी।
इसी कड़ी में
पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ.
नीलकंठ तिवारी ने अस्पताल परिसरों
और विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर पौधारोपण कर
नागरिकों से आह्वान किया
कि हर पौधे को
वृक्ष बनने तक संरक्षण
देना ही वास्तविक पर्यावरण
सेवा है। रविवार का
यह हरित अभियान एक
और कारण से विशेष
रहा। यहां प्रशासन, न्यायपालिका,
जनप्रतिनिधि, वन विभाग, स्वयंसेवी
संस्थाएं, पर्यावरणविद् और आम नागरिक
किसी अलग-अलग पहचान
के साथ नहीं, बल्कि
प्रकृति के प्रहरी बनकर
एक मंच पर दिखाई
दिए। यही इस अभियान
की सबसे बड़ी उपलब्धि
रही।
आज जब पूरी
दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और घटते हरित
क्षेत्र की चिंता में
डूबी है, तब काशी
ने अपने कर्म से
यह संदेश दिया कि भविष्य
की सबसे बड़ी विरासत
ऊंची इमारतें नहीं, बल्कि ऊंचे वृक्ष होंगे।
पांच हजार पौधे भले
आज मिट्टी में रोपे गए
हों, लेकिन यदि उनका संरक्षण
हुआ तो आने वाले
वर्षों में यही पौधे
हजारों लोगों को शुद्ध हवा,
शीतल छांव और सुरक्षित
भविष्य देंगे। काशी ने रविवार
को केवल वृक्षारोपण नहीं
किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों
के नाम हरियाली का
एक ऐसा संकल्प लिख
दिया, जिसकी हर पत्ती भविष्य
में जीवन का नया
अध्याय बनेगी।
'एक पेड़ मां के नाम' से हरित भविष्य का संदेश, सीपी ने किया पौधारोपण
वाराणसी। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने रविवार को "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत कैंप कार्यालय परिसर में पौधारोपण कर कमिश्नरेट में वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण, भूमि क्षरण और ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियों का सबसे प्रभावी समाधान वृक्षारोपण है। उन्होंने इसे प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक बताते हुए कहा कि वृक्ष शुद्ध ऑक्सीजन, तापमान संतुलन, भू-जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण और मिट्टी के कटाव को रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं। पुलिस आयुक्त के निर्देश पर पुलिस लाइन सहित कमिश्नरेट के सभी थानों, चौकियों, कार्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक पौधारोपण किया गया। उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों को लगाए गए पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने तथा आमजन से भी अपनी मां के सम्मान में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया।



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