'हरि का भजे सो हरि का होय' का संदेश, समरसता से ही सशक्त होगा समाज
संघ के
अखिल
भारतीय
कुटुम्ब
प्रबोधन
संयोजक
रवीन्द्र
शंकर
जोशी
बोले—
अहंकार
छोड़
रामभक्ति
अपनाने
से
मिटते
हैं
ऊंच-नीच
के
भेद
सुरेश गांधी
वाराणसी। सीरगोवर्धनपुर स्थित संत गुरु रविदास जन्मस्थली पर पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के कुटुम्ब प्रबोधन के रामलला गट द्वारा आयोजित सद्गुरु पूजनोत्सव एवं महंत भारत भूषण सम्मान समारोह में सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक एकता और रामभक्ति का संदेश दिया गया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कुटुम्ब प्रबोधन संयोजक रवीन्द्र शंकर जोशी ने कहा कि संत रविदास का संदेश "हरि का भजे सो हरि का होय" इस सत्य को स्थापित करता है कि ईश्वर की कृपा सभी पर समान रूप से होती है, उसमें जाति या ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि अहंकार आध्यात्मिक उन्नति का सबसे बड़ा शत्रु है और रामभक्ति से ही जीवन का उत्थान संभव है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते
हुए कैलाशमठ के महामंडलेश्वर स्वामी
आशुतोषानंद गिरी महाराज ने
कहा कि भारतीय संस्कृति
और साहित्य समरसता का संदेश देते
हैं तथा समाज के
प्रत्येक वर्ग को सम्मान
देना हमारी परंपरा रही है। संत
गुरु रविदास मंदिर के महंत भारत
भूषण महाराज ने कहा कि
श्रेष्ठ कार्य करने वाले प्रत्येक
व्यक्ति के प्रति अपनत्व
और प्रेम का भाव ही
वास्तविक समरसता का आधार है।
कार्यक्रम में अतिथियों ने
संत रविदास की प्रतिमा पर
माल्यार्पण कर महंत भारत
भूषण को अंगवस्त्र एवं
स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
प्रख्यात संगीतकार देवव्रत मिश्र और उनके शिष्य
अनुराग ने संत रविदास
के भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुति
देकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर
दिया। समारोह में संघ एवं
विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों
और बड़ी संख्या में
मातृशक्ति की सहभागिता रही।


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