Saturday, 4 July 2026

गुटबाजी नहीं, अब विकास की बुनाई होगी

गुटबाजी नहीं, अब विकास की बुनाई होगी 

कारपेट इंडस्ट्री को कृषि उद्योग का दर्जा दिलाना पहली लड़ाई, सरकार से अधिक ग्रांट लेकर एक्सपो को बनाएंगे वैश्विक ब्रांड, नए बाजारों में बढ़ाएंगे भारतीय कालीन की धमक.

AICMA के नवनिर्वाचित अध्यक्ष उमेश गुप्ता 'मुन्ना' से विशेष बातचीत

ऑल इंडिया कारपेट मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (AICMA) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष उमेश कुमार गुप्ता 'मुन्ना' ने कहा कि चुनाव लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन अब चुनाव समाप्त हो चुका है। अब संगठन में किसी प्रकार की गुटबाजी के लिए कोई स्थान नहीं होगा। हमारी पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता पूरे कालीन उद्योग को एक सूत्र में पिरोकर उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि उद्योग का हित किसी व्यक्ति या गुट से बड़ा है और सभी को साथ लेकर ही भदोही की कालीन विरासत को वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है। प्रस्तुत है वरिष्ठ संवाददाता सुरेश गांधी की उमेश गुप्ता से हुए बातचीत के प्रमुख अंशः-  

प्रश्न : अध्यक्ष बनने के बाद आपकी पहली प्राथमिकता क्या होगी?

उमेश गुप्ता : सबसे पहले संगठन के भीतर चुनाव के दौरान बने मतभेदों को समाप्त किया जाएगा। हम सभी निर्यातकों, उद्यमियों, बुनकरों और कारीगरों को साथ लेकर चलेंगे। मेरा स्पष्ट मानना है कि "गुटबाजी से उद्योग कमजोर होता है, जबकि एकता से बाजार मजबूत होता है।" संगठन हर सदस्य का होगा और हर निर्णय पारदर्शिता के साथ लिया जाएगा।

प्रश्न : उद्योग के लिए सबसे बड़ा एजेंडा क्या रहेगा?

उत्तर : हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य कालीन उद्योग को कृषि आधारित उद्योग का दर्जा दिलाना है। कालीन निर्माण में उपयोग होने वाला ऊन, जूट और सूती धागा कृषि आधारित उत्पाद हैं। यदि सरकार इसे कृषि उद्योग घोषित करती है तो लाखों बुनकरों और ग्रामीण परिवारों को कृषि उद्योग जैसी सुविधाएं, योजनाएं और प्रोत्साहन मिल सकेंगे। इससे उद्योग की लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

प्रश्न : इंडिया कारपेट एक्सपो और डोमोटेक्स को लेकर आपकी क्या रणनीति है?

उत्तर : हमारा प्रयास रहेगा कि सरकार से अधिक से अधिक ग्रांट और वित्तीय सहयोग प्राप्त किया जाए ताकि इंडिया कारपेट एक्सपो और डोमोटेक्स दोनों को पहले से अधिक भव्य और वैश्विक बनाया जा सके। केवल पारंपरिक खरीदारों पर निर्भर रहने के बजाय हम नए देशों के आयातकों को जोड़ेंगे। डिजिटल मार्केटिंग, ब्रांडिंग, ऑनलाइन बिजनेस प्लेटफॉर्म और वैश्विक प्रचार अभियान पर विशेष फोकस रहेगा।

प्रश्न : अमेरिका द्वारा टैरिफ घटाने को आप किस रूप में देखते हैं?

उत्तर : यह भारतीय कालीन उद्योग के लिए बड़ी राहत है। अमेरिका हमारे सबसे बड़े बाजारों में शामिल है। टैरिफ में कमी आने से भारतीय कालीन वहां अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे। इससे निर्यात बढ़ेगा, नए ऑर्डर मिलेंगे और भदोही, मिर्जापुर तथा वाराणसी के हजारों कारीगरों को सीधा लाभ मिलेगा।

प्रश्न : सरकार से आपकी प्रमुख मांगें क्या रहेंगी?

उत्तर : सरकार के समक्ष हम ब्याज छूट योजना, कालीन उद्योग के लिए विशेष पीएलआई योजना, ड्रॉबैक एवं आरओडीटीईपी दरों में संशोधन, जीएसटी दरों का सरलीकरण, फ्रेट सब्सिडी, एमडीए ग्रांट, जीआई टैग के व्यापक उपयोग, आयकर दरों में राहत, अंतरराष्ट्रीय कंप्लायंस पर सब्सिडी तथा श्रम कानूनों के सरलीकरण जैसे मुद्दों को मजबूती से रखेंगे। हमारा उद्देश्य उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप सक्षम बनाना है।

प्रश्न : वैश्विक युद्ध और आर्थिक अनिश्चितता का उद्योग पर क्या असर पड़ रहा है?

उत्तर : निश्चित रूप से इसका प्रभाव पड़ा है। विदेशी खरीदारों का भारत आना कम हुआ है, लेकिन हम इसे अवसर में बदलेंगे। अब वर्चुअल मीटिंग, डिजिटल ट्रेड शो और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से नए खरीदारों तक पहुंच बनाई जाएगी। पारंपरिक बाजारों के साथ-साथ अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, पूर्वी यूरोप और एशिया के नए बाजारों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

प्रश्न : भदोही के कारीगरों के लिए आपका संदेश?

उत्तर : भदोही की पहचान उसके कारीगरों से है। हमारा प्रयास रहेगा कि उन्हें केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि सम्मान और बेहतर आय भी मिले। नई तकनीक, आधुनिक डिज़ाइन और सरकारी योजनाओं से जोड़कर उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाया जाएगा।

प्रश्न : सदस्यों से क्या कहना चाहेंगे?

उत्तर : मैं सभी सदस्यों का आभारी हूं जिन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास जताते हुए नई टीम को जिम्मेदारी सौंपी। मैं विश्वास दिलाता हूं कि पूरी निष्ठा, ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ संगठन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। आने वाले वर्षों में भारतीय कालीन उद्योग वैश्विक बाजार में और अधिक मजबूत पहचान बनाएगा।

उमेश गुप्ता के 10 बड़े संकल्प

चुनावी गुटबाजी समाप्त कर उद्योग को एकजुट करना।

कालीन उद्योग को कृषि उद्योग का दर्जा दिलाने की पहल।

सरकार से अधिक ग्रांट लेकर एक्सपो को विश्वस्तरीय बनाना।

डोमोटेक्स और इंडिया कारपेट एक्सपो में विदेशी खरीदारों की संख्या बढ़ाना।

नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ब्रांडिंग पर फोकस।

पीएलआई, ड्रॉबैक, आरओडीटीईपी और जीएसटी सुधार की मांग।

डिजिटल ट्रेड और ई-कॉमर्स नेटवर्क का विस्तार।

कारीगरों की आय और कौशल विकास को प्राथमिकता।

सरकार और उद्योग के बीच मजबूत समन्वय।

भदोही को विश्व की "कारपेट कैपिटल" के रूप में और मजबूत पहचान दिलाना।


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