12 घंटे में 119.8 मिमी बारिश से जनजीवन बेहाल
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में बारिश का ‘स्मार्ट’ सच, काशी डूबी, दावे तैरे
बीएचयू गेट पर घुटनों तक पानी, मरीज-तीमारदार बेहाल; मरीजों को पानी चीरकर अस्पताल पहुंचने की मजबूरी
तख्ती लेकर युवाओं का तंज—“क्योटो बदहाल, काशी मालामाल भाजपाई!”
मरीजों
को
पानी
चीरकर
अस्पताल
पहुंचने
की
मजबूरी
नालियां जाम,
सड़कें
बनीं
दरिया,
बाटा
मोड़
पर
दीवार
ढही,
पति-पत्नी
की
मौत
गंगा का
रौद्र
रूप,
घाट
जलमग्न,
राजघाट
पर
शाम
छह
बजे
68.08 मीटर
रहा
गंगा
का
जलस्तर,
चेतावनी
बिंदु
70.262 और खतरे का
निशान
71.262 मीटर
सुरेश गांधी
उधर गंगा का
रौद्र रूप मंगलवार को
भी काशी पर भारी
रहा। अधिकांश घाट गंगा में
समाए रहे और घाटों
की सीढ़ियां पानी के भीतर
डूबी रहीं। हालांकि केंद्रीय जल आयोग के
राजघाट गेज स्टेशन से
मंगलवार शाम छह बजे
मिली ताजा रिपोर्ट ने
थोड़ी राहत जरूर दी
है। गंगा का जलस्तर
68.08 मीटर दर्ज किया गया
और इसमें एक सेंटीमीटर प्रति
घंटे की दर से
कमी का रुख बना
हुआ है। केंद्रीय जल
आयोग के अनुसार राजघाट
पर गंगा का चेतावनी
स्तर 70.262 मीटर, जबकि खतरे का
निशान 71.262 मीटर है। मंगलवार
शाम छह बजे जलस्तर
68.08 मीटर रहा, यानी पानी
चेतावनी स्तर से 2.182 मीटर
नीचे और खतरे के
निशान से 3.182 मीटर नीचे है।
गंगा का उच्चतम बाढ़
स्तर (H.F.L.) 73.901 मीटर दर्ज है।
काशी के कई
हिस्सों में मंगलवार को
हालात ऐसे थे कि
सड़क और जलभराव के
बीच फर्क करना मुश्किल
हो गया। लहुराबीर, गोदौलिया,
मैदागिन, कबीरचौरा, नई सड़क समेत
शहर के तमाम प्रमुख
इलाके पानी में डूबे
रहे। नई सड़क पर
तो बारिश ने मानो सड़क
का अस्तित्व ही मिटा दिया।
गलियों का हाल इससे
भी बदतर रहा। दो-चार प्रमुख सड़कों
को छोड़ दें तो
शहर की बड़ी आबादी
को घुटनों तक पानी से
होकर गुजरना पड़ा।
नालियां जाम, नगर निगम पर फूटा गुस्सा
बाटा मोड़ पर टूटी दीवार, पति-पत्नी की मौत
गंगा ने निगली काशी की पहचान
उधर, गंगा का
रौद्र रूप भी काशी
को घेरे हुए है।
घाटों की सीढ़ियां जलमग्न
हैं और गंगा का
पानी घाटों को अपने आगोश
में ले चुका है।
काशी की जिस पहचान
को दुनिया तस्वीरों में देखती है,
मंगलवार को वही पहचान
पानी के भीतर नजर
आई। दशाश्वमेध से लेकर मणिकर्णिका
तक घाटों का स्वरूप बदल
गया है। गंगा का
पानी ऊपर चढ़ने से
घाटों का संपर्क और
सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। मणिकर्णिका
क्षेत्र में भी बारिश
और गंगा के बढ़े
जलस्तर ने मुश्किलें बढ़ा
दीं। हालांकि केंद्रीय जल आयोग के
अनुसार वाराणसी में गंगा के
जलस्तर में हाल में
घटाव का रुख भी
दर्ज हुआ है और
अगले 24 घंटे में और
कमी की उम्मीद जताई
गई थी, लेकिन घाट
और निचले इलाकों में बाढ़ का
असर अभी समाप्त नहीं
हुआ है।
एक साथ दो मोर्चों पर संकट
काशी मंगलवार को
दोहरी मार झेलती रही—ऊपर से बरसता
आसमान और नीचे उफनती
गंगा। बारिश का पानी शहर
की सड़कों पर था तो
गंगा का पानी घाटों
को निगल रहा था।
वरुणा के किनारे बसे
इलाकों में भी पहले
से बाढ़ का दबाव
बना हुआ है। प्रशासन
और राहत एजेंसियां बाढ़
प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए
हुए हैं। हाल के
दिनों में गंगा और
वरुणा के किनारे प्रशासनिक
अधिकारियों तथा एनडीआरएफ की
सक्रियता भी देखी गई
है। लेकिन मंगलवार की बारिश ने
यह साफ कर दिया
कि काशी की समस्या
सिर्फ गंगा की बाढ़
नहीं है। शहर के
भीतर बरसात का पानी रोकने
और निकालने की क्षमता भी
उतनी ही बड़ी चुनौती
बन चुकी है।
बारिश ने खोल दी विकास की पोल
काशी में स्मार्ट
सिटी, चौड़ी सड़कों, फ्लाईओवर और बड़े-बड़े
विकास कार्यों की तस्वीरें भले
चमकती हों, लेकिन मंगलवार
की बारिश ने एक अलग
तस्वीर सामने रख दी—पानी
में डूबी सड़कें, जाम
नालियां, फंसे वाहन, अस्पताल
पहुंचने के लिए जूझते
मरीज और घरों से
बाहर निकलने के लिए संघर्ष
करते लोग। सवाल विकास
पर नहीं, विकास की प्राथमिकताओं और
उसके रखरखाव पर है। सड़क
बनाना जरूरी है तो उसके
साथ जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था
उससे भी जरूरी है।
नाला बनाना जरूरी है तो उसकी
नियमित सफाई और क्षमता
का आकलन भी उतना
ही जरूरी है। बारिश हर
साल आती है। मानसून
कोई अनहोनी नहीं है। फिर
भी हर बड़ी बारिश
में काशी का यही
हाल क्यों?
काशी पूछ रही है—बारिश कब तक बनेगी आफत?
मंगलवार की काशी में
छाता बेअसर था, सड़कें बेकार
थीं और नालियां लाचार।
मरीज अस्पताल पहुंचने के लिए पानी
में उतर रहे थे।
दुकानदार अपनी दुकानों के
सामने पानी निकालने में
जुटे थे। राहगीर जूते
हाथ में लेकर रास्ता
तलाश रहे थे। वाहन
चालक पानी की गहराई
का अंदाजा लगाकर आगे बढ़ रहे
थे। और गंगा—वह
अपनी ही लय में
काशी के घाटों को
अपने भीतर समेटती चली
जा रही थी। बारिश
थमेगी, पानी उतरेगा, सड़कें
फिर दिखाई देंगी। लेकिन मंगलवार की यह तस्वीर
एक सवाल छोड़ जाएगी—क्या काशी हर
मानसून में इसी तरह
डूबती रहेगी या शहर की
जलनिकासी व्यवस्था को कभी स्थायी
समाधान मिलेगा? यह
सिर्फ बारिश की कहानी नहीं
है। यह काशी की
उस व्यवस्था का आईना है,
जिसमें आसमान से बरसी बूंदें
शहर के विकास के
दावों को सड़क पर
बहा ले गईं।
गंगा जलस्तर में
कमी का रुख राहत
की खबर जरूर है,
लेकिन घाटों और निचले इलाकों
में गंगा के पानी
का असर अभी खत्म
नहीं हुआ है। लगातार
बारिश के बीच शहर
का जलभराव और गंगा का
बढ़ा हुआ पानी मिलकर
काशी की मुश्किलें बढ़ा
रहे हैं। एक तरफ
आसमान से बरसता पानी
सड़कों और गलियों को
तालाब बना रहा है,
तो दूसरी तरफ गंगा घाटों
को अपने आगोश में
लिए हुए है। अर्थात
खतरे का निशान अभी
दूर है, लेकिन काशी
के घाटों पर संकट अभी
टला नहीं है। बारिश
थमने और जलस्तर में
लगातार गिरावट के बाद ही
घाटों की स्थिति सामान्य
होने की उम्मीद की
जा सकती है।
गंगा का ताजा आंकड़ा
तारीख
: 25 अगस्त 2026
समय
: शाम 6:00 बजे
गेज
साइट : राजघाट, वाराणसी (CWC)
जलस्तर
: 68.08 मीटर
चेतावनी
स्तर : 70.262 मीटर
खतरे
का निशान : 71.262 मीटर
H.F.L. : 73.901 मीटर
रुझान
: 1 सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर
से घटाव
काशी
में बारिश का पानी भले
सड़कों पर सैलाब बन
गया हो, लेकिन गंगा
के आंकड़े फिलहाल राहत का संकेत
दे रहे हैं। सवाल
अब यह है कि
शहर का पानी कब
उतरेगा और घाट कब
फिर अपनी पुरानी शक्ल
में लौटेंगे।








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