Thursday, 27 August 2026

कालीन की बुनावट से कारोबार की नई इबारत लिखेगा भदोही

कालीन की बुनावट से कारोबार की नई इबारत लिखेगा भदोही 

50वां इंडिया कार्पेट एक्सपो 4 से 7 अक्टूबर तक • 48 देशों के 164 खरीदारों का पंजीकरण • 170 भारतीय निर्यातक भी मैदान में, 30 से अधिक ब्रिक्स देशों की भागीदारी पर फोकस

सुरेश गांधी

भदोही। भारतीय हस्तनिर्मित कालीन की पांच दशक लंबी वैश्विक यात्रा अब अपने स्वर्णिम पड़ाव पर पहुंचने जा रही है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) की ओर से वाणिज्य मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से 50वां इंडिया कार्पेट एक्सपो (स्वर्ण जयंती संस्करण) 4 से 7 अक्टूबर तक भदोही में आयोजित होगा। पांच दशकों से भारतीय कालीन निर्माताओं और निर्यातकों को दुनिया के बाजारों से जोड़ता आया यह एक्सपो इस बार परंपरा, डिजाइन और वैश्विक कारोबार का बड़ा संगम बनने जा रहा है।

स्वर्ण जयंती संस्करण में भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी, पानीपत, जम्मू-कश्मीर, जयपुर और बीकानेर समेत देश के प्रमुख कालीन उत्पादक क्षेत्रों के 170 निर्यातक अब तक पंजीकरण करा चुके हैं। यहां भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों की पारंपरिक बुनाई, आधुनिक डिजाइन, विविधता और गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने पेश किया जाएगा। एक्सपो में विदेशी खरीदारों की भागीदारी भी उत्साहजनक है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों समेत करीब 48 देशों के 164 विदेशी खरीदार अब तक पंजीकरण करा चुके हैं। पिछले एक्सपो में करीब 400 विदेशी खरीदार पहुंचे थे। आयोजकों को इस बार स्वर्ण जयंती संस्करण में इससे भी व्यापक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी की उम्मीद है। 

ब्रिक्स बाजार पर खास नजर

इस बार उभरते वैश्विक बाजारों को साधने पर विशेष जोर है। ब्रिक्स समूह से जुड़े ब्राजील, रूस, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात समेत देशों के खरीदारों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। 30 से अधिक ब्रिक्स देशों के खरीदारों की सहभागिता अब तक सुनिश्चित हो चुकी है। इससे भारतीय कालीन निर्यातकों के लिए नए बी2बी कारोबार और नए बाजार खुलने की उम्मीद है।

पांच दशक की विरासत, नई उड़ान

विश्व के प्रमुख हस्तनिर्मित कालीन उत्पादन और निर्यात केंद्र के रूप में पहचान रखने वाले भदोही में एक्सपो का आयोजन स्थानीय उद्योग के लिए भी गौरव का अवसर है। यह केवल व्यापारिक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि कारीगरों की पीढ़ियों से चली रही कला, भारतीय कालीन उद्योग की पांच दशक की उपलब्धियों और वैश्विक बाजार में बनी उसकी पहचान का उत्सव है। स्वर्ण जयंती संस्करण भारतीय कालीनों की पारंपरिक विरासत को आधुनिक वैश्विक मांग से जोड़ते हुए निर्यात कारोबार को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

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