कलम से कैमरे तक, आजादी की रोशनी में नारी शक्ति का सम्मान
पराड़कर भवन
में
स्वतंत्रता
दिवस
की
शाम
बनी
पत्रकारिता,
संस्कृति
और
बदलती
काशी
के
नाम
— अन्नपूर्णा
सिंह
ने
सोलर
सिस्टम
की
घोषणा
की,
महापौर
ने
‘बदलती
काशी
की
तस्वीर’
फोटोग्राफी
प्रतियोगिता
का
किया
ऐलान
सुरेश गांधी
वाराणसी. आजादी का पर्व केवल तिरंगे को सलाम करने का अवसर नहीं, बल्कि उन मूल्यों को फिर से याद करने का दिन है, जिनके लिए देश ने लंबा संघर्ष किया। इसी भाव को काशी की पत्रकारिता ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने अंदाज में जीवंत किया। पराड़कर स्मृति भवन का गर्दे सभागार शनिवार को उस शाम का साक्षी बना, जहां कलम की ताकत, नारी सम्मान, बदलती काशी की तस्वीर और संस्कृति के रंग एक साथ दिखाई दिए। काशी पत्रकार संघ से संचालित वाराणसी प्रेस क्लब की ओर से आयोजित सम्मान समारोह एवं सांस्कृतिक संध्या में दस महिला पत्रकारों को सम्मानित कर पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान को नमन किया गया। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया।
आजादी की लड़ाई में पत्रकारिता की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता
एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह ने कहा
कि स्वतंत्रता आंदोलन में पत्रकारों की
भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। पत्रकारिता
ने केवल घटनाओं को
दर्ज नहीं किया, बल्कि
जनचेतना को स्वर दिया
और समाज को दिशा
देने का काम किया।
उन्होंने कहा कि आज
महिला पत्रकारों का सम्मान करते
हुए उन्हें विशेष प्रसन्नता हो रही है।
महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियों के
साथ समाज और देश
के विकास में भी महत्वपूर्ण
भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने पराड़कर
स्मृति भवन की जरूरतों
को देखते हुए अपनी निधि
से सोलर सिस्टम लगवाने
की घोषणा की। यह घोषणा
ऐसे भवन में ऊर्जा
संरक्षण की दिशा में
महत्वपूर्ण कदम मानी जा
रही है, जिसकी दीवारों
ने दशकों से काशी की
पत्रकारिता के संघर्ष, सरोकार
और इतिहास को अपने भीतर
संजोया है।
बदलते बनारस को कैमरे में कैद करेंगे छायाकार
समारोह में मुख्य अतिथि
महापौर अशोक तिवारी ने
सम्मानित पत्रकारों को बधाई देते
हुए काशी के बदलते
स्वरूप को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि बनारस
केवल एक शहर नहीं,
बल्कि निरंतर बदलती हुई जीवंत तस्वीर
है। इसके पुराने घाट,
गलियां, मंदिर, आधुनिक परियोजनाएं और बदलती जीवनशैली—सब अपने भीतर
एक कहानी समेटे हुए हैं। उन्होंने
‘बदलती काशी की तस्वीर’
विषय पर विशेष फोटोग्राफी
प्रतियोगिता आयोजित करने का प्रस्ताव
रखा। प्रेस क्लब अध्यक्ष चंदन
रुपानी ने प्रस्ताव स्वीकार
करते हुए कहा कि
काशी के छायाकार इस
पहल के लिए पूरी
तरह तैयार हैं। इसके बाद महापौर ने
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट तस्वीरें
प्रस्तुत करने वाले फोटोग्राफरों
को प्राइज मनी से सम्मानित
करने की घोषणा कर
दी। यानी अब काशी
की बदलती तस्वीर केवल शब्दों में
नहीं, कैमरे की आंख से
भी दर्ज होगी।
दस महिला पत्रकारों का सम्मान, मेधावी विद्यार्थियों को भी प्रशस्ति
समारोह में डॉ. प्रभा
रानी, मीरा वोहरा, मनीषा
चौरसिया, निधि मिश्रा, काजल
सेठ समेत दस महिला
पत्रकारों को सम्मानित किया
गया। सम्मान के इस क्षण
में पत्रकारिता के क्षेत्र में
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
और उनकी प्रतिबद्धता को
विशेष रूप से रेखांकित
किया गया। बोर्ड परीक्षा
में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अंकिता
चौधरी और आर्यन चौधरी
को भी प्रशस्ति पत्र
प्रदान कर प्रोत्साहित किया
गया। पत्रकारिता और समाज के
बीच शिक्षा की इस कड़ी
ने समारोह को नई पीढ़ी
की उपलब्धियों से भी जोड़ा।
पत्रकारों की सुविधा में सहयोग करने वाले भी सम्मानित
एसएसपीजी अस्पताल में पत्रकारों के
लिए अलग काउंटर खोले
जाने पर अस्पताल के
प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बृजेश कुमार
का महापौर ने स्वागत किया।
पत्रकारों की व्यावहारिक जरूरतों
के प्रति इस पहल को
समारोह में सराहा गया।
वहीं संघ भवन में
अग्निशमन यंत्र लगवाने में सहयोग देने
वाले काशी केराना व्यापार
मंडल के महामंत्री संजय
केशरी, उपाध्यक्ष महेंद्र केशरी और मंत्री अजय
गुप्ता को भी सम्मानित
किया गया। इस बहाने
पत्रकारिता और समाज के
बीच सहयोग की उस परंपरा
को भी सम्मान मिला,
जो किसी संस्था को
केवल अपने सदस्यों तक
सीमित नहीं रहने देती।
देशभक्ति के गीतों से गूंजा पराड़कर भवन
सम्मान समारोह के बाद सांस्कृतिक
संध्या ने माहौल में
देशभक्ति और उल्लास के
रंग भर दिए। आलोक
मालवीय और गायक योगेश
फिलिप ने देशभक्ति गीतों
की प्रस्तुतियों से वातावरण को
भावपूर्ण बना दिया। वहीं
बालिकाओं संस्कृति और स्वीकृति की
नृत्य प्रस्तुतियों ने समारोह में
सांस्कृतिक छटा बिखेरी। कार्यक्रम
का संचालन वाराणसी प्रेस क्लब के मंत्री
विनय शंकर सिंह ने
किया। धन्यवाद ज्ञापन काशी पत्रकार संघ
के महामंत्री जितेंद्र श्रीवास्तव ने किया।
सुबह तिरंगे को सलाम, शाम कलम के प्रहरी सम्मानित
इससे पहले स्वतंत्रता दिवस की सुबह काशी पत्रकार संघ भवन में संघ अध्यक्ष अरुण मिश्रा ने ध्वजारोहण किया। तिरंगे को सलामी देने के साथ पत्रकारों ने देश की लोकतांत्रिक चेतना, संविधान और पत्रकारिता के मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। समारोह में संघ के पूर्व अध्यक्ष योगेश कुमार गुप्त, कृष्णदेव नारायण राय, डॉ. अत्रि भारद्वाज, पूर्व महामंत्री अखिलेश मिश्रा, उपाध्यक्ष सुनील शुक्ला, पुरुषोत्तम चतुर्वेदी, प्रेस क्लब के कोषाध्यक्ष संदीप गुप्ता, अजय राय, कृष्ण बहादुर रावत, कैलाश यादव, दीनबन्धु राय, रवीन्द्र प्रकाश त्रिपाठी, डॉ. नागेन्द्र पाठक, नरेन्द्र यादव, रोहित चतुर्वेदी, पंकज त्रिपाठी, सुरेश गांधी, ओंकार तिवारी, अमित शर्मा, डॉ. जिनेश कुमार, जावेद, मनोज राय, संजय गुप्ता, राकेश सिंह, उमेश गुप्ता, शैलेश चौरसिया, प्रदीप सिंह, राजेश यादव, विनोद यादव, प्रतीक रंजन श्रीवास्तव समेत बड़ी संख्या में पत्रकार साथी और विशिष्टजन मौजूद रहे। पराड़कर भवन की यह शाम इसलिए भी खास रही कि यहां आजादी के पर्व पर सिर्फ सम्मान नहीं हुआ, बल्कि पत्रकारिता की विरासत से भविष्य की काशी तक एक संवाद बना। एक ओर महिला पत्रकारों की मेहनत को सलाम था, दूसरी ओर कैमरे के जरिए बदलते बनारस को सहेजने का संकल्प। और इन सबके बीच तिरंगे की छांव में यह संदेश भी कि काशी की पत्रकारिता की असली ताकत उसकी कलम, उसकी संवेदना और समाज के प्रति उसकी जवाबदेही में है।

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