Friday, 4 September 2026

1978 जैसी तबाही मचाने को बेताब गंगा! चेतावनी पार, 71 मीटर की ओर बढ़ता पानी; खौफ के साए में तटवर्ती इलाके

1978 जैसी तबाही मचाने को बेताब गंगा! चेतावनी पार, 71 मीटर की ओर बढ़ता पानी; खौफ के साए में तटवर्ती इलाके 

राजघाट पर 70.67 मीटर पहुंचा जलस्तर | 0.5 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही गंगा | खतरे के निशान से महज 59 सेंटीमीटर दूर | काशी में फिर 1978 की याद से सहमे लोग

सुरेश गांधी

वाराणसी। गंगा के जलस्तर में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज होने से वाराणसी में नदी के किनारे बसे इलाकों और घाटों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के राजघाट गेज स्थल पर गुरुवार रात आठ बजे गंगा का जलस्तर 70.67 मीटर दर्ज किया गया। नदी 0.5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है। गंगा का चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर है। इस तरह जलस्तर चेतावनी बिंदु से करीब 41 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुका है, जबकि खतरे के निशान से अभी लगभग 59 सेंटीमीटर नीचे है। जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के कारण प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े विभागों की निगाह अब गंगा के अगले कुछ घंटों के रुझान पर टिकी है। फिलहाल स्थिति खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर घाट किनारे के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है।

घाटों पर बढ़ा पानी, निचले इलाकों पर नजर

गंगा के जलस्तर में वृद्धि का सीधा असर घाटों की सीढ़ियों और नदी से सटे निचले हिस्सों पर दिखाई दे रहा है। जलस्तर बढ़ने के साथ घाटों का खाली हिस्सा लगातार कम हो रहा है। नदी के तेवरों को देखते हुए घाटों पर आवाजाही, नौका संचालन और निचले इलाकों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। वाराणसी में बीते दिनों गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच प्रशासन की प्राथमिकता तटवर्ती क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा और किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने की तैयारी बनाए रखना है। खासकर उन स्थानों पर निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है, जहां जलस्तर बढ़ने पर पानी तेजी से रिहायशी अथवा व्यावसायिक हिस्सों की ओर पहुंच सकता है।

प्रयागराज में भी गंगा-यमुना का मिला-जुला रुख

उधर प्रयागराज से मिली रात आठ बजे की रिपोर्ट में भी नदियों के जलस्तर में अलग-अलग रुझान सामने आए हैं। जिले में गंगा का खतरे का स्तर 84.734 मीटर निर्धारित है। नैनी में यमुना का जलस्तर 82.56 मीटर दर्ज किया गया और पिछले चार घंटे में एक सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई। फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 82.97 मीटर रहा, जहां भी एक सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज हुई। वहीं छतनाग में गंगा का जलस्तर 82.18 मीटर रहा और पिछले चार घंटे में दो सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई। एसटीपी बक्शी बांध पर जलस्तर 82.68 मीटर पर स्थिर रहा। प्रयागराज की रिपोर्ट के अनुसार सभी बांध सुरक्षित बताए गए हैं। हालांकि अलग-अलग गेज स्थलों पर जलस्तर में हो रहे बदलाव को देखते हुए निगरानी जारी है।

अगले कुछ घंटे अहम

वाराणसी में रात आठ बजे की स्थिति में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन चेतावनी स्तर पार कर चुका है और बढ़ने का सिलसिला जारी है। ऐसे में अगले कुछ घंटों की रफ्तार और नदी के जलस्तर का रुझान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर तटवर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखना जरूरी हो गया है।

जलस्तर की स्थितिराजघाट, वाराणसी (03 सितंबर, रात 8 बजे)

वर्तमान जलस्तर: 70.67 मीटर

चेतावनी स्तर: 70.262 मीटर

खतरे का स्तर: 71.262 मीटर

एचएफएल: 73.901 मीटर

रुझान: 0.5 सेमी प्रति घंटे की दर से बढ़ोतरी

खतरे के निशान से दूरी: करीब 59 सेंटीमीटर नीचे

चेतावनी स्तर से ऊपर: करीब 41 सेंटीमीटर

घाटों पर गंगा का रौद्र रूपकहां पहुंचा पानी?

नमो घाट: जलस्तर बढ़ने के साथ निचले हिस्सों में पानी का दबाव बढ़ा। प्रशासन की निगरानी तेज।

अस्सी घाट: सीढ़ियों पर गंगा का कब्जा बढ़ा, घाट का निचला हिस्सा पानी में समाया। तटवर्ती गतिविधियों पर असर।  

दशाश्वमेध घाट: गंगा का पानी घाट की सीढ़ियों तक चढ़ा। आरती और घाट क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ी।

मणिकर्णिका घाट: बाढ़ का सबसे भयावह असर। घाट का बड़ा हिस्सा जलमग्न और आसपास की गलियों तक पानी पहुंचा; गलियों में नाव चलने की तस्वीर सामने आई है।

शीतला घाट: निचली सीढ़ियां पानी में डूबीं, जलस्तर बढ़ने के साथ घाट क्षेत्र में आवाजाही प्रभावित।

तुलसी घाट: गंगा का पानी निचले हिस्से तक पहुंचा, घाट क्षेत्र में लगातार बढ़ते जलस्तर पर नजर।

अन्य घाट: काशी के घाटों की सीढ़ियां लगातार डूब रही हैं। जलस्तर 70.67 मीटर पहुंचने और आधा सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ने के बीच तटवर्ती इलाकों में चौकसी बढ़ाई गई है।

ताजा आंकड़ारात 8 बजे:

राजघाट पर गंगा 70.67 मीटर | चेतावनी स्तर 70.262 मीटर पार | खतरे का निशान 71.262 मीटर | बढ़ोतरी 0.5 सेमी/घंटा

राहत के मोर्चे पर मंत्री भी मैदान में

गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल गुरुवार देर शाम शैलपुत्री और सरैया के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका हाल जाना और उनकी समस्याएं सुनीं। मंत्री ने पीड़ितों को फूड पैकेट और राहत सामग्री वितरित की। राहत शिविरों में बच्चों से भी मिले। उन्हें चॉकलेट-बिस्किट देकर दुलार किया और खूब पढ़ाई करने की नसीहत दी। मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि बाढ़ पीड़ितों तक राहत पहुंचाने में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं समेत सभी जरूरी इंतजाम लगातार दुरुस्त रखने तथा प्रभावित परिवारों की जरूरत का तत्काल संज्ञान लेने को कहा। मंत्री का संदेश: आपदा की इस घड़ी में सरकार बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ी है।

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