Tuesday, 1 September 2026

कान्हा के स्वागत को सजा काशी का बाजार, भक्ति के रंग में रंगी खरीदारी

कान्हा के स्वागत को सजा काशी का बाजार, भक्ति के रंग में रंगी खरीदारी 

मुकुट-मोरपंख से लेकर जरीदार पोशाक और नक्काशीदार झूलों तक की धूम, दुकानों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़; 4 सितंबर को जन्माष्टमी, बाजार में 10 करोड़ के कारोबार की उम्मीद

सुरेश गांधी

वाराणसी. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की आहट के साथ ही काशी के बाजारों में कान्हा की बाल लीलाओं का रंग उतर आया है। चौक, गोदौलिया, लंका, लक्सा, विशेश्वरगंज, चौखंभा और ठठेरी बाजार समेत प्रमुख बाजारों में लड्डू गोपाल के श्रृंगार और जन्मोत्सव से जुड़ी सामग्री की दुकानें सज गई हैं। श्रद्धालु अपनी पसंद और सामर्थ्य के अनुसार कान्हा के लिए पोशाक, मुकुट, मोरपंख, बांसुरी, आभूषण और झूले खरीदने में जुटे हैं। उधर, मंदिरों से लेकर मोहल्लों तक तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। बाजार में भगवान श्रीकृष्ण की सुंदर पोशाकें, मोर मुकुट, बांसुरी, झूले और लड्डू गोपाल की मूर्तियां लोगों को खूब पसंद रही हैं.

इस बार बाजार में पारंपरिक सामग्री के साथ डिजाइनर श्रृंगार का भी खास आकर्षण है। साधारण सूती और रेशमी पोशाकों से लेकर जरी, गोटा-पत्ती और कुंदन कारीगरी वाली पोशाकें उपलब्ध हैं। लड्डू गोपाल के लिए लकड़ी, धातु, पीतल और मखमली नक्काशीदार झूलों की भी खूब मांग है। झूलों की कीमत आकार, धातु और सजावट के अनुसार करीब 100 रुपये से 5000 रुपये तक पहुंच रही है।

जन्माष्टमी इस वर्ष 4 सितंबर को मनाई जाएगी। काशी में उत्सव का उल्लास बाजार से घरों और मंदिरों तक पहुंच चुका है। कहीं छोटे से पालने में बाल गोपाल विराजेंगे तो कहीं भव्य झांकियों में कृष्ण की बाल लीलाएं जीवंत होंगी। बाजार की चहल-पहल बता रही है कि इस बार जन्माष्टमी केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और बाजार की रौनक का भी बड़ा उत्सव बनने जा रही है। वाराणसी में कारोबारी संगठनों के अनुमान के अनुसार जन्माष्टमी से दो दिनों में 10 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार की उम्मीद है।

वृंदावन और मथुरा की छाप भी काशी के बाजार में साफ दिखाई दे रही है। जरीदार पगड़ी, मोती जड़ी अचकन और ब्रज शैली के मुकुट श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। मंदिरों और घरों की सजावट के लिए फूलों, झालरों, कृत्रिम पुष्पों, पालने और झांकी सजाने की सामग्री की भी मांग बढ़ी है।  

घर-घर सजेगा कान्हा का दरबार

बाजार में सिर्फ लड्डू गोपाल के श्रृंगार की सामग्री ही नहीं, बल्कि बच्चों को कान्हा स्वरूप में सजाने के लिए पोशाक, मुकुट और बांसुरी के सेट भी उपलब्ध हैं। पूजन सामग्री की दुकानों पर पंचामृत, तुलसी दल, माखन-मिश्री, धूप-दीप, फूल और भोग सामग्री की खरीदारी तेज हो गई है।

कढ़ाई-बुनाई के हिसाब से प्राइज़

दुकानदार ने बताया कि इस बार श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर बाजारों में अनेक प्रकार की वैरायटी उपलब्ध है. ठाकुर जी के लिए अच्छी सुंदर आकर्षक दिखने वाली पोशाक तैयार कराई गई हैं और सभी साइज के पोशाक मिल जाते हैं. जिस प्रकार से पोशाक में कढ़ाई-बुनाई का काम बारीकी के साथ होता है उसकी कीमत उतनी बढ़ती जाती है.

झूले पर भगवान की सुंदर मूर्ति

दुकानदार ने बताया कि इस बार बाजारों में माखन की हांडी, बांसुरी श्रद्धालुओं के डिमांड के अनुसार मंगवाई गई है. बर्थडे ड्रेस की बात की जाए तो सफेद कलर की पोशाक खूब पसंद रही, क्योंकि हर रोज तो ठाकुर जी मल्टी कलर की पोशाक पहनते हैं लेकिन जन्म उत्सव के दिन सफेद कलर की पोशाक का एक अलग ही लुक सामने निकलकर आता है. इस बार सफेद कलर की पोशाक बृजवासियों को खूब भा रही है. मथुरा-वृंदावन से आई पोशाकों के साथ मोर पंख, कुंदन और फूलों से सजे श्रृंगार के सामान की भी अच्छी मांग है। दुकानदारों ने बताया कि इस बार मोर पंखों वाली पोशाकें और नए डिजाइन के झूले लोगों को ज्यादा पसंद रहे हैं। वहीं ग्राहको ने बताया कि ठाकुर जी के लिए अनेक प्रकार की पोशाक खरीदी हैं. झूले में कई प्रकार की वैरायटी दुकानों पर उपलब्ध है. ठाकुर जी का उत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाएंगे.

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