गंजारी में अब बल्ला बोलेगा, गेंद गूंजेगी
अक्तूबर में उद्घाटन की
तैयारियां अंतिम दौर में, बीसीसीआई की हरी झंडी के बाद रणजी मुकाबले से हो सकता है
क्रिकेट का श्रीगणेश
सुरेश गांधी
वाराणसी। काशी में अब तक क्रिकेट के बड़े मुकाबले
की जो कमी खलती थी, वह जल्द दूर होने की उम्मीद है। गंजारी में आकार ले रहा अंतरराष्ट्रीय
क्रिकेट स्टेडियम अब उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां निर्माण की आहट के बाद क्रिकेट
की आवाज सुनाई देने का इंतजार है। अक्तूबर के तीसरे सप्ताह में स्टेडियम के उद्घाटन
की तैयारियां तेज हैं। इसके बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की निरीक्षण
टीम मैदान और क्रिकेट से जुड़ी व्यवस्थाओं को परखेगी। मानक पूरे मिले तो नवंबर में
रणजी ट्रॉफी के मुकाबले से काशी के इस नए क्रिकेट केंद्र में चौके-छक्कों की शुरुआत
हो सकती है।
हालांकि, बीसीसीआई ने अभी गंजारी को रणजी
ट्रॉफी के किसी मुकाबले के आधिकारिक वेन्यू के रूप में घोषित नहीं किया है। इसलिए नवंबर
में मैच की संभावना को फिलहाल तैयारियों और प्रस्तावित योजना के रूप में ही देखा जा
रहा है। बीसीसीआई के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार 2026-27 की रणजी ट्रॉफी का पहला
चरण 11 अक्तूबर से पांच नवंबर तक चलेगा। दूसरा चरण 17 जनवरी से चार फरवरी 2027 तक होगा
और नॉकआउट मुकाबले फरवरी-मार्च में खेले जाएंगे।
पहले परीक्षा, फिर मुकाबला
स्टेडियम का उद्घाटन हो जाने के बाद असली
परीक्षा बीसीसीआई के स्तर पर होगी। निरीक्षण टीम मैदान की आउटफील्ड, पिच, ड्रेनेज,
फ्लड लाइट, ड्रेसिंग रूम, खिलाड़ियों की सुविधाओं, मेडिकल और फिजियो व्यवस्था, मीडिया
सेंटर, प्रसारण से जुड़ी सुविधाओं के साथ दर्शकों के लिए उपलब्ध इंतजामों को परखेगी।
क्रिकेट के किसी आधिकारिक मुकाबले की मेजबानी से पहले इन सभी व्यवस्थाओं का मानकों
पर खरा उतरना जरूरी होगा। यही वजह है कि गंजारी में संभावित पहला रणजी मुकाबला केवल
एक क्रिकेट मैच नहीं, बल्कि नए स्टेडियम की पहली बड़ी परीक्षा भी माना जा रहा है। नई
पिच पर गेंद का व्यवहार, आउटफील्ड की गुणवत्ता, जल निकासी और मैच संचालन की व्यवस्थाएं
इस मुकाबले के जरिये परखी जा सकेंगी।
1788 मैचों के घरेलू सत्र में काशी की दस्तक
बीसीसीआई ने 2026-27 के घरेलू क्रिकेट
सत्र में कुल 1,788 मुकाबलों का कार्यक्रम जारी किया है। इसमें पुरुष और महिला क्रिकेट
के साथ अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-23 स्तर की प्रतियोगिताएं भी शामिल हैं। रणजी ट्रॉफी
में 32 टीमें चार एलीट समूहों में और छह टीमें प्लेट समूह में खेलेंगी। उत्तर प्रदेश
को रणजी ट्रॉफी के एलीट ग्रुप ए में रखा गया है। ऐसे में गंजारी में रणजी मुकाबला होने
की स्थिति में काशी को सीधे उत्तर प्रदेश की शीर्ष घरेलू क्रिकेट टीमों की मेजबानी
का अवसर मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के लिए अभी करना
होगा इंतजार
टीम इंडिया के 2026-27 घरेलू अंतरराष्ट्रीय
सत्र के घोषित कार्यक्रम में नवंबर में वाराणसी का कोई मुकाबला नहीं है। दिसंबर में
श्रीलंका के खिलाफ तीन वनडे दिल्ली, बेंगलुरु और अहमदाबाद में तथा तीन टी-20 राजकोट,
कटक और पुणे में प्रस्तावित हैं। इसके बाद जनवरी 2027 में जिम्बाब्वे और फिर ऑस्ट्रेलिया
के खिलाफ मुकाबले निर्धारित हैं। ऐसे में गंजारी में पहला मुकाबला यदि नवंबर में होता
है तो उसके रणजी ट्रॉफी का घरेलू मुकाबला होने की संभावना अधिक स्वाभाविक है। अंतरराष्ट्रीय
क्रिकेट के लिए स्टेडियम को बीसीसीआई के मानकों और भविष्य के कार्यक्रम में जगह मिलने
का इंतजार करना होगा।
450 करोड़ में खड़ा हुआ काशी का क्रिकेट
सपना
गंजारी में करीब 450 करोड़ रुपये की लागत
से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम विकसित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
ने 23 सितंबर 2023 को इसकी आधारशिला रखी थी। 30 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित हो
रहे स्टेडियम की प्रस्तावित दर्शक क्षमता करीब 30 हजार है। इसकी वास्तुकला में काशी
की सांस्कृतिक पहचान को भी स्थान दिया गया है। अर्धचंद्राकार छत, त्रिशूल आकार की फ्लड
लाइट, घाट की सीढ़ियों जैसी दर्शक दीर्घा और बेलपत्र से प्रेरित डिजाइन इसे दूसरे क्रिकेट
स्टेडियमों से अलग पहचान देते हैं। निर्माण की प्रगति लगातार तेज हुई है। अगस्त में
हिन्दुस्तान ने 15 अक्तूबर तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य बताया था। सितंबर की रिपोर्टों
में स्टेडियम का करीब 95 प्रतिशत काम पूरा होने और प्रधानमंत्री के संभावित दौरे के
लिए तैयारियां किए जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि, प्रधानमंत्री का दौरा और उद्घाटन
कार्यक्रम अंतिम रूप से आधिकारिक घोषित होना बाकी बताया गया था।
रणजी के बाद महिला क्रिकेट की बारी
गंजारी की कहानी सिर्फ पुरुष क्रिकेट
तक सीमित रहने वाली नहीं है। स्टेडियम तैयार होने के बाद यहां महिला क्रिकेट के बड़े
मुकाबलों की मेजबानी की संभावनाएं भी बन रही हैं। अगले वर्ष महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल)
के मुकाबलों के लिए वाराणसी का नाम सामने आना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
हालांकि, इसकी अंतिम मेजबानी भी संबंधित क्रिकेट बोर्ड और आयोजन संस्था के आधिकारिक
कार्यक्रम पर निर्भर करेगी।
काशी के खिलाड़ियों को मिलेगा नया आसमान
गंजारी का सबसे बड़ा अर्थ केवल यह नहीं
कि काशी में अब अंतरराष्ट्रीय आकार का स्टेडियम होगा। इसका असर यहां के स्थानीय क्रिकेट
पर भी पड़ेगा। बड़े मैदान, बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं
की संभावित मेजबानी से काशी और पूर्वांचल के खिलाड़ियों को अपने ही शहर में उच्च स्तर
की क्रिकेट देखने और सीखने का अवसर मिलेगा। अब तक बड़े मुकाबलों के लिए खिलाड़ियों
और दर्शकों की निगाहें दूसरे शहरों की ओर रहती थीं। गंजारी के तैयार होने के बाद यह
तस्वीर बदल सकती है। काशी, जो धर्म और संस्कृति की वैश्विक राजधानी के रूप में अपनी
पहचान रखती है, उसके पास खेल की दुनिया में भी अपना एक नया मंच होगा। अक्तूबर में उद्घाटन
की तैयारी और उसके बाद बीसीसीआई का निरीक्षण—दोनों पड़ाव पार होते ही गंजारी के मैदान
पर क्रिकेट की पहली गेंद का इंतजार खत्म होने की दिशा साफ हो जाएगी। अगर नवंबर में
रणजी मुकाबले की मेजबानी मिलती है तो वह मैच केवल चार दिन का प्रथम श्रेणी मुकाबला
नहीं होगा, बल्कि काशी के क्रिकेट इतिहास में एक नए अध्याय की पहली पारी होगी।

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