Sunday, 6 September 2026

सम्मान से बढ़ा संकल्प, बच्चों के भविष्य को संवारने की राह हुई और मजबूत

सम्मान से बढ़ा संकल्प, बच्चों के भविष्य को संवारने की राह हुई और मजबूत

शिक्षक दिवस पर उत्कृष्ट कार्य के लिए कलकली बहरा प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाचार्य वर्षारानी जायसवाल सम्मानित

सुरेश गांधी

रॉबर्ट्सगंज। शिक्षक होना केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर सपनों के बीज बोना और उन्हें आत्मविश्वास के साथ भविष्य की ओर बढ़ने का रास्ता दिखाना है। शिक्षक दिवस के अवसर पर जब उत्कृष्ट कार्य के लिए कलकली बहरा प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाचार्य वर्षारानी जायसवाल को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया तो यह सम्मान उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं अधिक जिम्मेदारी और संकल्प का अवसर बन गया। 

कलेक्ट्रेट सभागार, रॉबर्ट्सगंज में आयोजित समारोह में जिलाधिकारी चर्चित गौड़, मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती जागृति अवस्थी, मंत्री संजीव गौड़, विधायक भूपेश चौबे एवं जिला विद्यालय निरीक्षक जयराम ने वर्षारानी जायसवाल को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। सम्मान मिलने के क्षण ने उनके शिक्षकीय जीवन की उस निरंतर साधना को रेखांकित किया, जिसमें विद्यालय केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण का केंद्र बनता है।

सम्मान के बाद वर्षारानी जायसवाल ने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए गौरव का विषय जरूर है, लेकिन इससे कहीं अधिक यह आगे की जिम्मेदारी का एहसास कराती है। उन्होंने कहा, “यह सम्मान हमें अधिक निष्ठा, समर्पण एवं बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। कृतज्ञ हूँ, विनम्र हूँ और आगे और बेहतर करने के लिए प्रेरित हूँ।

उनके शब्दों में सम्मान की चमक से अधिक शिक्षक के दायित्व की गंभीरता दिखाई देती है। उनके लिए प्रशस्ति पत्र मंजिल नहीं, बल्कि उस यात्रा का पड़ाव है, जहां हर दिन बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए कुछ नया करने की चुनौती सामने होती है।

शिक्षा की दुनिया में ऐसे सम्मान इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे कक्षा की चारदीवारी के भीतर होने वाले उन प्रयासों को सार्वजनिक पहचान देते हैं, जो अक्सर सुर्खियों से दूर रहते हैं। किसी शिक्षक के लिए बच्चे की आंखों में सीखने की चमक, उसके आत्मविश्वास में आया बदलाव और उसके भविष्य के प्रति जागा विश्वास ही सबसे बड़ा पुरस्कार होता है।

वर्षारानी जायसवाल का सम्मान इसी शिक्षक-धर्म की निरंतरता का प्रतीक है। समारोह में मिला प्रशस्ति पत्र उनके कार्यों की सराहना भर नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ शिक्षा को नई दिशा देने वाले शिक्षकों के प्रयास समाज के लिए अमूल्य हैं।

सम्मान ने बढ़ाया उत्साह, जिम्मेदारी भी

वर्षारानी जायसवाल के लिए यह सम्मान आत्मसंतोष का नहीं, आत्ममंथन का अवसर है। उनका कहना है कि सम्मान मिलने के बाद अपेक्षाएं भी बढ़ती हैं। यही अपेक्षाएं उन्हें बच्चों के लिए और अधिक बेहतर करने, विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता को मजबूत करने और अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभाने की प्रेरणा देती हैं। शिक्षक दिवस पर मिला यह सम्मान इसलिए खास बन जाता है कि इसके केंद्र में कोई पद या प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति समर्पण है। एक शिक्षक जब सम्मान के बाद भी यही कहे किआगे और बेहतर करना है”, तो यही भाव शिक्षा की असली शक्ति और शिक्षक की सच्ची पहचान बन जाता है।

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