दुनिया की पसंद बना भदोही, 212 खरीदारों ने परखी कालीनों की कारीगरी
गोल्डन जुबली एक्सपो में
तीसरे दिन तक 231 बाइंग रिप्रेजेंटेटिव्स की दस्तक, अमेरिका से यूरोप तक भारतीय हस्तनिर्मित
कालीनों की बढ़ी पूछ
सुरेश गांधी
भदोही। कालीन सिर्फ धागों, रंगों और गांठों से
नहीं बनता। उसके पीछे पीढ़ियों
का हुनर, महीनों की मेहनत और
बदलते बाजार को समझने वाली
नजर होती है। भदोही
में चल रहा गोल्डन
जुबली 50वां इंडिया कार्पेट
एक्सपो इसी बदलती कहानी
का साक्षी बन रहा है।
तीसरे दिन तक दुनिया
के अलग-अलग देशों
से आए 212 से अधिक विदेशी
खरीदारों और 231 बाइंग रिप्रेजेंटेटिव्स ने भारतीय कालीनों
के नए संग्रहों को
परखा। किसी ने डिजाइन
में भविष्य की झलक देखी
तो किसी ने रंगों
में अपने बाजार की
पसंद तलाश की।
स्टॉलों पर चलती बातचीत
और कारोबारी पूछताछ ने यह संकेत
दिया कि भदोही के
करघों की आवाज अब
सिर्फ देश तक सीमित
नहीं रही। अमेरिका, ब्रिटेन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और यूरोप के
विभिन्न देशों से आए खरीदारों
की दिलचस्पी ने एक्सपो में
कारोबार की उम्मीदों को
नई रोशनी दी है। अंतरराष्ट्रीय
बाजार की मांग के
अनुरूप तैयार किए गए नए
डिजाइन, आकार, रंग, गुणवत्ता और
समकालीन पैटर्न खरीदारों को आकर्षित कर
रहे हैं। परंपरा के
साथ आधुनिकता का यह मेल
भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के लिए नई
पहचान गढ़ता दिखाई दे रहा है।
कालीन से आगे बढ़कर बाजार की तैयारी
इस बार एक्सपो
की खासियत सिर्फ कालीनों की चमक नहीं,
बल्कि उद्योग के भीतर हो
रहा बदलाव भी है। डिजाइन
अब केवल सुंदर दिखने
के लिए नहीं, बल्कि
दुनिया के अलग-अलग
बाजारों की पसंद और
जरूरत को ध्यान में
रखकर तैयार हो रहे हैं।
टिकाऊ उत्पाद, नए पैटर्न, समकालीन
रंग संयोजन और गुणवत्ता पर
जोर इस बदलाव के
प्रमुख संकेत हैं। इसी बदलती
जरूरत को संस्थागत ताकत
देने के लिए कारपेट
एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (CEPC) और Walmart Vriddhi के बीच समझौता
ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया
गया। ज्ञान-साझाकरण सत्र में Walmart Vriddhi के एसोसिएट
डायरेक्टर आदित्य वर्मा ने उद्यमियों और
एमएसएमई के लिए उपलब्ध
अवसरों और कार्यक्रमों की
जानकारी दी। समझौते का
उद्देश्य क्षमता निर्माण, कारोबार के विकास, ज्ञानवर्धन
और बाजार तक पहुंच के
अवसर बढ़ाना है। यानी भदोही
के करघे अब केवल
कालीन नहीं बुन रहे,
बल्कि वैश्विक बाजार के लिए अपने
कारोबार की नई भाषा
भी सीख रहे हैं।
पुराने हाथों का सम्मान, नई पीढ़ी की ओर नजर
गोल्डन जुबली का एक भावुक
पड़ाव उन लोगों का
सम्मान रहा, जिन्होंने वर्षों
तक CEPC और भारतीय हस्तनिर्मित
कालीन उद्योग को मजबूत करने
में भूमिका निभाई। पूर्व अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और प्रशासन समिति
के पूर्व सदस्यों को सम्मानित किया
गया। सम्मानित सदस्यों ने अपने अनुभव
साझा करते हुए इंडिया
कार्पेट एक्सपो के सफर को
याद किया। यह सम्मान दरअसल
उस पीढ़ी को सलाम था,
जिसने इस मंच की
नींव मजबूत की और आज
जिसकी बदौलत दुनिया के खरीदार भदोही
तक पहुंच रहे हैं।
‘नवसृष्टि’ में हुनर का नया चेहरा
एक्सपो में परंपरा के
साथ नवाचार को भी सम्मान
मिला। हस्तशिल्प बोर्ड और इंडियन इंस्टीट्यूट
ऑफ कार्पेट टेक्नोलॉजी (IICT) के सहयोग से
आयोजित ‘नवसृष्टि 2026’ में डिजाइन, नवाचार
और स्थिरता के क्षेत्र में
उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित किया
गया। Joho Floor
Coverings को
Innovative Design, Kabir Exports को
Sustainability और OAC
Rugs Carpets को ‘Best
Carpet of the Year’ पुरस्कार
मिला। IICT को भी क्षेत्र
में योगदान के लिए सम्मानित
किया गया। यह पुरस्कार
इस बात का संकेत
है कि कालीन उद्योग
अपनी विरासत को बचाते हुए
भविष्य के बाजार के
लिए खुद को बदल
रहा है।
युवा और महिलाओं के लिए नई राह
CEPC अध्यक्ष कैप्टन मुकेश कुमार गोम्बर ने कहा कि
परिषद नवाचार, उत्पाद विकास, डिजाइन उत्कृष्टता और स्थिरता को
बढ़ावा देने के साथ
युवा एवं महिला उद्यमियों
को सशक्त बनाने पर विशेष जोर
दे रही है। वैश्विक
बाजार में भारत की
स्थिति मजबूत करने के लिए
बदलते रुझानों को अपनाना और
गुणवत्ता सुधारना जरूरी है। CEPC उपाध्यक्ष असलम महबूब ने
तीसरे दिन तक मिले
अंतरराष्ट्रीय प्रतिसाद पर संतोष जताते
हुए उम्मीद जताई कि अंतिम
दिन भी खरीदारों की
भागीदारी से कारोबार के
नए अवसर बनेंगे। गोल्डन
जुबली का यह एक्सपो
इसलिए भी खास है
कि यहां कालीनों की
प्रदर्शनी भर नहीं लग
रही। यहां भदोही अपने
अतीत की विरासत को
भविष्य के बाजार से
जोड़ने की कोशिश कर
रहा है। धागे वही
हैं, हाथ वही हैं,
मगर सपने अब पहले
से कहीं बड़े हैं।

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