एयर शो की चमक के बीच जाम में कराहता बनारस, सड़कों पर थम गई रफ्तार
शो के
रास्ते
रोकना
समझ
में
आया,
लेकिन
पूरे
शहर
की
राह
क्यों
बंद?
डायवर्जन
के
फेर
में
हजारों
लोग
हलकान
सुबह 9.30 बजे
के
बाद
बिगड़ने
लगी
यातायात
व्यवस्था,
आजमगढ़-लालपुर
रिंग
रोड
से
पड़ाव
तक
वाहनों
की
लंबी
कतारें
सुरेश गांधी
वाराणसी। गंगा के ऊपर
आसमान में लड़ाकू विमानों
की गर्जना और जमीन पर
सड़कों पर फंसे वाहनों
के हॉर्न। शनिवार को काशी में
एयर शो के दूसरे
दिन शहर की यही
दो तस्वीरें नजर आईं। एक
ओर आसमान में वायुसेना का
शौर्य प्रदर्शन जारी था, तो
दूसरी ओर शहर की
सड़कों पर आम आदमी
की रफ्तार थम गई। जगह-जगह डायवर्जन, वाहनों
के प्रवेश पर रोक और
पुलों पर आवाजाही बंद
होने से यातायात व्यवस्था
चरमरा गई। शहर के
भीतर ही नहीं, बाहरी
इलाकों में भी जाम
का असर दिखाई दिया।
सुबह 9.30 बजे के बाद
प्रतिबंध सख्त होते ही
वाहनों की कतारें लंबी
होने लगीं। नतीजा, जरूरी काम से निकले
लोग भी घंटों रास्तों
में उलझे रहे।
एयर शो के
दौरान सुरक्षा सर्वोपरि है। आयोजन स्थल,
गंगा घाटों और प्रधानमंत्री के
आवागमन वाले मार्गों पर
वाहनों को नियंत्रित करना
भी जरूरी है, लेकिन सवाल
यह है कि सुरक्षा
के नाम पर शहर
की यातायात व्यवस्था का संतुलन क्यों
बिगड़ गया? कार्यक्रम स्थल
और उससे जुड़े रास्तों
तक प्रतिबंध सीमित रखने के बजाय
जब दूर-दराज के
मार्गों पर भी आवाजाही
बाधित होने लगे, तो
उसका खामियाजा आम नागरिकों को
भुगतना पड़ता है। शनिवार को
शहर में यही स्थिति
बनी। जाम में फंसे
लोगों के लिए न
तो समय की कोई
कीमत रह गई और
न ही अपने गंतव्य
तक पहुंचने का भरोसा।
रिंग रोड से पड़ाव तक वाहनों की कतारें
एयर शो के
मद्देनजर हाईवे से शहर के
भीतर वाहनों के प्रवेश पर
रोक का असर बाहरी
मार्गों पर भी पड़ा।
आजमगढ़-लालपुर रिंग रोड मार्ग
पर सुबह से ही
वाहनों की लंबी कतारें
लग गईं। बसों, कारों
और दूसरे वाहनों को आगे बढ़ने
से रोके जाने के
कारण आवागमन बाधित रहा। शहर में
प्रवेश के रास्ते बंद
होने से वाहन चालकों
के सामने आगे बढ़ने और
वैकल्पिक मार्ग तलाशने की चुनौती खड़ी
हो गई। यातायात का
दबाव दूसरे रास्तों पर भी बढ़ा,
जिससे जाम का दायरा
फैलता गया। पड़ाव चौराहे
पर वाहनों की एंट्री बंद
कर दी गई। राजघाट
पुल पर वाहनों के
साथ पैदल आवाजाही भी
रोक दी गई। सामनेघाट
पुल पर केवल दोपहिया
वाहनों को गुजरने की
अनुमति रही। इन प्रतिबंधों
के कारण एक ओर
जहां लोगों को रास्ता बदलना
पड़ा, वहीं दूसरी ओर
उपलब्ध मार्गों पर यातायात का
दबाव बढ़ गया। शहर
के प्रमुख हिस्सों तक पहुंचना मुश्किल
होने लगा।
गोदौलिया-मैदागिन में भी बढ़ी परेशानी
शहर
के भीतर गोदौलिया और
मैदागिन की तरफ भी
पुलिस भीड़ प्रबंधन में
जुटी रही। गंगा घाटों
की ओर सभी प्रकार
के वाहनों की आवाजाही पर
रोक का असर आसपास
के मार्गों पर पड़ा। स्थानीय
लोगों, दुकानदारों और जरूरी काम
से निकलने वालों को भी बदली
हुई यातायात व्यवस्था के बीच रास्ता
तलाशना पड़ा। एक मार्ग पर
रोक का असर दूसरे
मार्ग पर पड़ा और
कई स्थानों पर वाहनों की
रफ्तार धीमी पड़ गई।
वरुणापार के हुकूलगंज रोड,
पांडेयपुर, पुलिस लाइन, खजुरी रोड सहित कई
सड़कों पर बेरिकेटिंग कर
दी गयी, जिससे घंटो
लोग चिलचिलाती धूप में खड़े
रहे.
सुरक्षा जरूरी, लेकिन शहर को ठप करना कैसा प्रबंधन?
एयर शो अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन है। प्रधानमंत्री का आगमन भी सुरक्षा की दृष्टि से विशेष व्यवस्था की मांग करता है। ऐसे में आयोजन स्थल और वीवीआईपी मूवमेंट से जुड़े रास्तों पर नियंत्रित आवाजाही स्वाभाविक है। लेकिन किसी बड़े आयोजन की सफलता का आकलन केवल मंच, सुरक्षा घेरे और दर्शकों की संख्या से नहीं होना चाहिए। यह भी देखा जाना चाहिए कि आयोजन के दौरान शहर के आम नागरिकों की दिनचर्या कितनी प्रभावित हुई। सवाल यह भी है कि क्या प्रतिबंधित मार्गों की स्पष्ट जानकारी समय रहते हर नागरिक तक पहुंचाई गई? क्या वैकल्पिक रास्तों पर यातायात का दबाव आंककर पर्याप्त इंतजाम किए गए? क्या एंबुलेंस, मरीजों, जरूरी सेवाओं और स्थानीय निवासियों के आवागमन के लिए व्यावहारिक व्यवस्था बनाई गई? सुरक्षा व्यवस्था के साथ यातायात का विकेंद्रीकृत प्रबंधन भी उतना ही जरूरी है। काशी जैसे घनी आबादी वाले शहर में कुछ प्रमुख मार्गों पर रोक लगने का असर दूर तक पहुंचता है। इसलिए हर सड़क पर एक साथ प्रतिबंध लगाने के बजाय मार्गवार योजना, वैकल्पिक रास्तों पर पुलिस की तैनाती और यातायात की स्थिति के अनुसार प्रतिबंधों में बदलाव जरूरी है। एयर शो की भव्यता तभी आम लोगों के लिए भी सुखद अनुभव बन सकती है, जब आसमान में शौर्य के साथ जमीन पर व्यवस्था भी दिखाई दे।

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