धागों में बुनी विरासत, बाजार में नए हुनर की तलाश
कालीन
के
धागों
में
केवल
रंग
नहीं
होते,
उनमें
सदियों
की
विरासत,
कारीगरों
की
मेहनत
और
हुनर
की
अनगिनत
परतें
बुनी
होती
हैं।
भदोही
के
50वें
इंडिया
कारपेट
एक्सपो
में
पहुंचकर
यह
एहसास
और
गहरा
हुआ।
गोल्डन
जुबली
के
इस
आयोजन
में
देश-दुनिया
के
कालीनों
को
एक
छत
के
नीचे
देखने,
उनकी
बुनावट
को
करीब
से
समझने
और
इस
कारोबार
की
बदलती
दुनिया
को
परखने
का
अवसर
मिला।
हर
स्टॉल
पर
एक
अलग
रंग,
एक
अलग
डिजाइन
और
एक
अलग
शिल्प-दृष्टि
दिखाई
दी।
कहीं
परंपरा
अपनी
पूरी
गरिमा
के
साथ
मौजूद
थी,
तो
कहीं
आधुनिक
बाजार
की
मांग
के
अनुरूप
नए
प्रयोगों
ने
ध्यान
खींचा।
एक
पत्रकार
के
रूप
में
इस
आयोजन
को
देखने
का
नजरिया
स्वाभाविक
रूप
से
थोड़ा
अलग
था।
उद्घाटन
समारोह
और
मुख्यमंत्री
योगी
आदित्यनाथ
के
संबोधन
के
साथ-साथ
मेरी
दिलचस्पी
उन
कालीनों
में
भी
थी,
जिनके
धागों
में
भदोही
की
पहचान
और
हजारों
परिवारों
की
आजीविका
सांस
लेती
है।
हर
स्टॉल
पर
ठहरकर
कालीनों
को
देखना,
उनकी
बारीक
कारीगरी
को
समझना
और
निर्यातकों
से
बातचीत
करना
इस
यात्रा
का
सबसे
दिलचस्प
हिस्सा
रहा
सुरेश गांधी
कालीनों के धागों में
परंपरा की खुशबू थी
तो रंगों और डिजाइनों में
बदलते वैश्विक बाजार की नई सोच
भी। 50वें इंडिया कारपेट
एक्सपो में हर स्टॉल
अपने हुनर और कल्पनाशीलता
की अलग दास्तां बयां
कर रहा था। कहीं
पारंपरिक बुनावट की नफासत थी
तो कहीं आधुनिक डिजाइन
और रंगों का ऐसा मेल,
जिसने विदेशी खरीदारों को ठहरकर देखने
और तस्वीरें खिंचवाने पर मजबूर किया।
विदेशी खरीदार अली रेजा की
नजर में प्रतिस्पर्धा के
इस दौर में कालीन
उद्योग को हर दिन
कुछ नया करना होगा।
उनका कहना था कि
जिस तरह टेक्सटाइल, कारों
और साड़ियों के बाजार में
डिजाइन, रंग और फीचर
लगातार बदलते हैं, उसी तरह
कालीनों में भी नए
प्रयोग जरूरी हैं। कुछ निर्यातक
आकर्षक लुक, नए डिजाइन
और रंगों के अनूठे संयोजन
के साथ बाजार में
अपनी अलग पहचान बना
रहे हैं। हालांकि, ऐसे
कालीनों की लागत अधिक
होने से आम आयातकों
के लिए कीमत चुनौती
बन जाती है। इसका
फायदा मध्यम स्तर के निर्यातकों
के उत्पादों को भी मिल
सकता है। फिर भी
खरीदारों को आकर्षित करने
के लिए समय और
मांग के अनुरूप बदलाव
जरूरी है।
एक्सपो में ग्लोबल ओवरसीज
के संजय गुप्ता और
बृजेश गुप्ता के स्टॉल पर
फिल्मी दुनिया के महानायक अमिताभ
बच्चन, अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय
की सांकेतिक चित्रकारी वाले कालीन आकर्षण
का केंद्र रहे। मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ ने भी इन्हें
गौर से देखा। दोनों
भाइयों ने मुख्यमंत्री को
गदा और हनुमान की
मूर्ति भेंट की। सीईपीसी
के बुनकर प्रशिक्षण केंद्र की महिला बुनकर
द्वारा कालीन पर उकेरी गई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि
ने भी खूब सराहना
बटोरी। वहीं उमेश गुप्ता
और सीईपीसी प्रशासनिक सदस्य रोहित गुप्ता के स्टॉल पर
विदेशी खरीदारों की दिलचस्पी दिखी।
ओपी कारपेट के आकर्षक उत्पादों
ने भी अंतरराष्ट्रीय खरीदारों
का ध्यान खींचा। हर स्टॉल पर
एक ही संदेश उभर
रहा था—विरासत अपनी
जगह, लेकिन बाजार में पहचान बनाए
रखने के लिए नवाचार
अब सबसे बड़ी जरूरत
है.
कश्मीरी कालीनों की बुनावट में बेमिसाल नफासत
एक्सपो में विभिन्न शैलियों
और क्षेत्रों के कालीनों के
बीच कश्मीरी कालीनों ने खास तौर
पर ध्यान खींचा। उनकी बुनावट की
महीनता, रंगों का संयोजन, पारंपरिक
आकृतियों की नफासत और
डिजाइन की कलात्मकता देखते
ही बनती थी। ऐसा
लगता था, जैसे ऊन
और रेशम के धागों
में किसी कलाकार ने
अपनी कल्पना को बेहद धैर्य
से उतार दिया हो।
कश्मीरी कालीनों की अपनी विशिष्ट
पहचान है। उनकी बारीकी
और सौंदर्य के सामने ठहरकर
उन्हें देखना अपने आप में
एक अनुभव था। हालांकि, किसी
एक क्षेत्र की कला को
दूसरे से बेहतर बताने
के बजाय यह कहना
अधिक उचित होगा कि
भारतीय कालीन शिल्प की असली ताकत
उसकी विविधता है। कश्मीर की
नफासत हो, भदोही की
पारंपरिक बुनावट हो या दूसरे
क्षेत्रों की विशिष्ट शैलियां—हर एक की
अपनी पहचान और अपना बाजार
है। यही विविधता भारतीय
हस्तनिर्मित कालीनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर
पर अलग स्थान दिलाती
है।
परंपरा के साथ नए डिजाइन की चुनौती
एक्सपो में घूमते हुए
एक बात लगातार महसूस
हुई कि केवल पुरानी
प्रतिष्ठा के भरोसे वैश्विक
बाजार में लंबे समय
तक टिके रहना आसान
नहीं होगा। परंपरागत डिजाइन हमारी ताकत हैं, लेकिन
बदलते समय में ग्राहकों
की पसंद भी तेजी
से बदल रही है।
घरों की सजावट, जीवनशैली
और आंतरिक वास्तुशिल्प में आए बदलावों
ने कालीनों के रंग, आकार,
बनावट और उपयोग की
अपेक्षाओं को भी प्रभावित
किया है। ऐसे में
निर्यातकों को अपनी पारंपरिक
पहचान बचाए रखते हुए
नए डिजाइन, नए रंग-संयोजन
और आधुनिक जरूरतों के अनुरूप उत्पाद
विकसित करने होंगे। बाजार
में बने रहने का
रास्ता परंपरा को छोड़ने में
नहीं, बल्कि उसे नए समय
के साथ जोड़ने में
है। हस्तनिर्मित कालीन की असली खूबसूरती
उसकी मानवीय छुअन और कारीगर
की कल्पना में है। तकनीक
और डिजाइन का इस्तेमाल इस
खूबसूरती को और व्यापक
बाजार तक पहुंचाने का
माध्यम बन सकता है।
एक्सपो में प्रदर्शित नए
फॉल-विंटर रंगों और डिजाइन ने
भी इस बदलाव की
झलक दी। साफ था
कि कारोबार अब केवल उत्पादन
और निर्यात तक सीमित नहीं
है। ग्राहक की पसंद को
समझना, डिजाइन में निरंतर प्रयोग
करना और गुणवत्ता के
साथ समय पर आपूर्ति
सुनिश्चित करना भी उतना
ही जरूरी हो गया है।
पुराने साथियों से मुलाकात, रिश्तों की गर्माहट
इस आयोजन की
एक और खास उपलब्धि
रही—कालीन उद्योग से जुड़े कई
पुराने साथियों, निर्यातकों और सीईपीसी पदाधिकारियों
से मुलाकात। वर्षों से इस कारोबार
को करीब से देखने
और इससे जुड़े लोगों
के साथ संवाद का
रिश्ता रहा है। ऐसे
में एक्सपो केवल कालीनों का
प्रदर्शन नहीं, बल्कि पुराने संबंधों को फिर से
ताजा करने और उद्योग
की नई चुनौतियों पर
चर्चा का भी अवसर
बन गया। निर्यातकों से
बातचीत में कारोबार की
संभावनाओं के साथ कई
व्यावहारिक कठिनाइयां भी सामने आईं।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा, बदलती मांग, उत्पादन की लंबी प्रक्रिया
और बेहतर आधारभूत सुविधाओं की जरूरत जैसे
मुद्दे चर्चा में रहे। यह
भी महसूस हुआ कि कालीन
उद्योग की सफलता केवल
बड़े निर्यात आंकड़ों से नहीं आंकी
जा सकती। असली कसौटी यह
है कि कारोबार बढ़ने
का लाभ बुनकरों, कारीगरों
और उनके परिवारों तक
कितना पहुंचता है।
मुख्यमंत्री का आश्वासन, उद्योग में नई उम्मीद
एक्सपो के उद्घाटन अवसर
पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की
मौजूदगी ने आयोजन को
विशेष महत्व दिया। मुख्यमंत्री ने न केवल
कालीनों की कारीगरी और
डिजाइन को करीब से
देखा, बल्कि निर्यातकों से संवाद कर
उनकी मांगों और समस्याओं को
भी सुना। उन्होंने उद्योग से जुड़े लोगों
का उत्साहवर्धन करते हुए आश्वासन
दिया कि सरकार हर
उचित अवसर पर उनके
साथ खड़ी रहेगी और
मांगों पर सकारात्मक ढंग
से विचार करेगी। निर्यातकों की ओर से
उद्योग के लिए अलग
नीति, विशेष दर्जे और आधारभूत सुविधाओं
से जुड़ी मांगें सामने रखी गईं। विंध्य
एक्सप्रेस-वे के लिए
आभार जताने के साथ माधोसिंह
रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज की
मांग भी उठी। मुख्यमंत्री
का उद्योग प्रतिनिधियों से सीधे संवाद
करना और उनकी बात
सुनना इस आयोजन का
महत्वपूर्ण पक्ष रहा। उद्योग
जगत को उम्मीद है
कि संवाद से निकली बातें
योजनाओं और ठोस फैसलों
में भी दिखाई देंगी।
भदोही का कालीन उद्योग
केवल एक जिले की
आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि भारतीय हस्तशिल्प की अंतरराष्ट्रीय पहचान
है। इसके पीछे लाखों
हाथों की मेहनत, पीढ़ियों
से चली आ रही
कला और बदलते बाजार
के साथ कदम मिलाने
की चुनौती है। गोल्डन जुबली
एक्सपो में घूमते हुए
यही लगा कि भदोही
की असली पूंजी उसके
धागे नहीं, उन धागों को
जीवंत कलाकृति में बदलने वाले
हुनरमंद हाथ हैं। आधी
सदी का सफर पूरा
कर चुका यह आयोजन
अब एक नए दौर
की दहलीज पर खड़ा है।
आगे की राह उसी
उद्योग की होगी, जो
अपनी जड़ों को संभालते हुए
नए रंगों, नए डिजाइनों और
नई बाजार-दृष्टि को अपनाएगा। परंपरा
की गरिमा और नवाचार की
ऊर्जा का यही मेल
भदोही के कालीनों को
दुनिया के घरों तक
पहुंचाने की सबसे मजबूत
डोर बन सकता है।
हर दिन नया डिजाइन, तभी बाजार में टिकेगा कालीन
विदेशी खरीदार अली रेजा ने
कहा कि प्रतिस्पर्धा के
दौर में कालीन उद्योग
को हर दिन कुछ
नया करना होगा। जिस
तरह साड़ियों के डिजाइन, टेक्सटाइल
के रंग और कारों
के फीचर बदलते हैं,
उसी तरह कालीनों में
भी नए प्रयोग जरूरी
हैं।
महंगे डिजाइन से बढ़ी मध्यम निर्यातकों की पूछ
अली रेजा के
मुताबिक, नए लुक और
आकर्षक रंग-संयोजन वाले
कालीनों की लागत अधिक
होती है। इससे आम
आयातकों के लिए कीमत
चुनौती बनती है। ऐसे
में मध्यम स्तर के निर्यातकों
के उत्पादों की मांग और
पूछ-परख बढ़ने की
संभावना रहती है।
कालीन पर अमिताभ-अभिषेक की छवि, मुख्यमंत्री भी ठहरे
ग्लोबल ओवरसीज के संजय गुप्ता
और बृजेश गुप्ता के स्टॉल पर
अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय
की सांकेतिक चित्रकारी वाले कालीन ने
सबका ध्यान खींचा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने
भी इसे बड़े ध्यान
से देखा।
कालीन के साथ गदा और संत रविदास की मूर्ति भेंट
ग्लोबल ओवरसीज के दोनों भाइयों
संजय गुप्ता और बृजेश गुप्ता
ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को
गदा और संत रविदासजी की मूर्ति
भेंट कर स्वागत किया।
उनके स्टॉल पर फिल्मी हस्तियों
की चित्रकारी वाले कालीन खास
आकर्षण बने रहे।
कालीन पर उकेरी पीएम मोदी की छवि, महिला हुनर को सराहना
सीईपीसी के बुनकर प्रशिक्षण
केंद्र की महिला बुनकर
द्वारा कालीन पर उकेरी गई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि
लोगों के आकर्षण का
केंद्र बनी। पारंपरिक बुनाई
के साथ चित्रकारी के
इस प्रयोग की खूब सराहना
हुई।
विदेशी खरीदारों को लुभाते दिखे भदोही के डिजाइन
उमेश गुप्ता और
सीईपीसी प्रशासनिक सदस्य रोहित गुप्ता के स्टॉल पर
विदेशी खरीदारों का रुझान दिखा।
खरीदार कालीनों की बारीकी देखने
के साथ उनके साथ
तस्वीरें खिंचवाते भी नजर आए।
ओपी कारपेट के स्टॉल पर भी खरीदारों की नजर
एक्सपो में ओपी कारपेट
के स्टॉल पर प्रदर्शित आकर्षक
कालीनों ने विदेशी खरीदारों
का ध्यान खींचा। डिजाइन, रंगों और बुनावट को
लेकर खरीदारों की दिलचस्पी ने
मेले में कारोबारी संभावनाओं
को और मजबूत किया।
No comments:
Post a Comment