लेसा में 5606 पद समाप्त, 3300 संविदा कर्मियों की छंटनी से हड़कंप
रिस्ट्रक्चरिंग
पर
बिजली
कर्मियों
का
विरोध
तेज
ऊर्जा विभाग
की
रिस्ट्रक्चरिंग
नीति
पर
बिजली
कर्मियों
का
आक्रोश,
राजधानी
से
लेकर
जिलों
तक
विरोध
तेज
सुरेश गांधी
वाराणसी। ऊर्जा विभाग की ओर से
लागू की गई नई
रिस्ट्रक्चरिंग व्यवस्था के चलते लेसा
(लखनऊ इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई एडमिनिस्ट्रेशन) में विभिन्न संवर्गों
के कुल 5606 पद समाप्त कर
दिए गए हैं। इनमें
सबसे बड़ी मार संविदा
पर कार्यरत करीब 3300 कर्मियों पर पड़ी है,
जिनकी नौकरी एक झटके में
समाप्त हो गई है।
इस निर्णय से न सिर्फ
बिजली विभाग में हड़कंप मच
गया है, बल्कि राजधानी
से लेकर जिलों तक
विरोध प्रदर्शन तेज हो गया
है।
संघर्ष समिति द्वारा प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, 15 मई
2017 के एक शासनादेश के
तहत प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर 36 संविदा कर्मी तैनात होने चाहिए थे।
वर्तमान में लेसा में 154 उपकेंद्र
संचालित हैं। इस आधार
पर 5544 संविदा कर्मियों की आवश्यकता बनती
है। लेकिन नई व्यवस्था में
616 गैंग और 391 एसएसओ (सब स्टेशन ऑपरेटर)
ही मंजूर किए गए हैं।
प्रति गैंग 3 कर्मी होने के हिसाब
से केवल 1848 संविदा कर्मी कार्यरत रह जाएंगे। कुल
2239 संविदा कर्मी ही अब लेसा
में रहेंगे।
संघर्ष समिति का आरोप है
कि यह कदम बिजली
क्षेत्र के निजीकरण की
दिशा में माहौल तैयार
करने के लिए उठाया
गया है। लेसा में पद समाप्त
होने की जानकारी सामने
आने के बाद बड़ी
संख्या में विद्युत कर्मियों
ने प्रदर्शन किया। विरोध में प्रदेश के
कई ज़िलों—वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, मेरठ, कानपुर, आगरा—में भी
रोष सभाएँ आयोजित की गईं। कर्मचारियों का
कहना है बिना विचार-विमर्श और बिना कार्यप्रवाह
का मूल्यांकन किए इतने पद
खत्म करना न सिर्फ
अव्यवहारिक है, बल्कि बिजली
उपभोक्ताओं की सेवाओं को
भी प्रभावित करेगा।
पहले नई व्यवस्था कमी
5544 संविदा कर्मी 2239 संविदा कर्मी 3305 कर्मी कम
कर्मचारी
नेताओं का कहना है
कि यह कटौती सीधे-सीधे संविदा कर्मियों
की जीविका पर हमला है,
जो पहले से ही
न्यूनतम वेतन पर कार्य
कर रहे थे। नई
संरचना में केवल संविदा
कर्मी ही नहीं, बल्कि
अधिकारी और तकनीकी पदों
में भी व्यापक कटौती
की गई है।
पद समाप्त हुए पद
अधीक्षण
अभियंता 4
अधिशासी
अभियंता 17
सहायक
अभियंता 36
अवर
अभियंता (जेई) 155
टीजी-2
(टेक्नीशियन ग्रेड) 1517
अन्य
वर्गों के पद शेष
मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ से इस निर्णय
पर तत्काल रोक लगाने और
बिजली व्यवस्था पर स्थानीय परिस्थितियों
के अनुरूप नीति बनाने की
मांग की है। समिति ने
चेताया है कि यदि
पद समाप्त करने और निजीकरण
की प्रक्रिया वापस नहीं ली
गई, तो संघर्ष तेज
किया जाएगा।

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